<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446</id><updated>2011-11-04T03:22:22.016-07:00</updated><title type='text'>खबरी कलम</title><subtitle type='html'></subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>58</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-492426709108399126</id><published>2011-09-19T07:36:00.001-07:00</published><updated>2011-09-19T07:36:23.697-07:00</updated><title type='text'>तुम्हारा आना</title><content type='html'>&lt;span&gt;तुम्हारा आना &lt;/span&gt; &lt;div&gt;&lt;span&gt;जैसे किसी मरूभूमी में &lt;/span&gt;&lt;/div&gt; &lt;div&gt;&lt;span&gt;गुलाब का खिल जाना &lt;/span&gt;&lt;/div&gt; &lt;div&gt;&lt;span&gt;जैसे आषाढ़ की गर्मी में &lt;/span&gt;&lt;/div&gt; &lt;div&gt;&lt;span&gt;सावन की घटा का छाना &lt;/span&gt;&lt;/div&gt; &lt;div&gt;&lt;span&gt;जैसे पुश की रात में &lt;/span&gt;&lt;/div&gt; &lt;div&gt;&lt;span&gt;वसंत हो जाना &lt;/span&gt;&lt;/div&gt; &lt;div&gt;&lt;span&gt;तुम्हारा आना &lt;/span&gt;&lt;/div&gt; &lt;div&gt;&lt;span&gt;जैसे सूर्ख गालों पर &lt;/span&gt;&lt;/div&gt; &lt;div&gt;&lt;span&gt;चुटकी भर भोर मल जाना &lt;/span&gt;&lt;/div&gt; &lt;div&gt;&lt;span&gt;जैसे किसी थके हुए पथिक को &lt;/span&gt;&lt;/div&gt; &lt;div&gt;&lt;span&gt;पीपल की  छांव मिल जाना &lt;/span&gt;&lt;/div&gt; &lt;div&gt;&lt;span&gt;जैसे किसी प्यासे को &lt;/span&gt;&lt;/div&gt; &lt;div&gt;&lt;span&gt;पानी का घड़ा मिल जाना &lt;/span&gt;&lt;/div&gt; &lt;div&gt;&lt;span&gt;तुम्हारा आना &lt;/span&gt;&lt;/div&gt; &lt;div&gt;&lt;span&gt;जैसे उजड़े चमन में &lt;/span&gt;&lt;/div&gt; &lt;div&gt;&lt;span&gt;बहार आ जाना &lt;/span&gt;&lt;/div&gt; &lt;div&gt;&lt;span&gt;जैसे अंधेरी रातों में &lt;/span&gt;&lt;/div&gt; &lt;div&gt;&lt;span&gt;चांद का निकल आना &lt;/span&gt;&lt;/div&gt; &lt;div&gt;&lt;span&gt;जैसे किसी भटके हुए मुसाफिर को &lt;/span&gt;&lt;/div&gt; &lt;div&gt;&lt;span&gt;पगडंडी का मिल जाना &lt;/span&gt;&lt;/div&gt; &lt;div&gt;&lt;span&gt;तुम्हारा आना ... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-492426709108399126?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/492426709108399126/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/09/blog-post.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/492426709108399126'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/492426709108399126'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/09/blog-post.html' title='तुम्हारा आना'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-4386392528164301335</id><published>2011-08-18T04:04:00.000-07:00</published><updated>2011-08-18T04:44:25.626-07:00</updated><title type='text'>हम हैं बिहारी या विजय</title><content type='html'>&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span id="ctl00_ContentPlaceHolder1_ConvertedText"&gt;&lt;br /&gt;   &lt;br /&gt;गलत बर्दाश्त नहीं कर पाना यह लगता है, विजय की आदत सी बन गई है। मैट्रिक  पास किये कई साल बीत चुके हैं। गांव में पढे लिखे में गिनती होने के बावजूद  कोई भी काम नहीं है, कारण तुरंत गलत सही का विरोध कर देना। आज तो विजय ने  हद कर दी सरपंच के बेटे को ही मार मार कर बुरा हाल कर दिया है।                                                           गोपाल बाबू किसी  तरह सरपंच के हाथ पांव जोड़कर मामला सलटाने में लगे हुये हैं।&lt;br /&gt;गोपाल बाबू  ठहरे छोटे मोटे कर्जदार किसान वह अपने बेटे विजय के रोज रोज के झंझट से  परेशान हो चुके हैं, आज उनका टेम्पर बहुत हाई है।  ‘सुनो राघव बहुत संयोग से तुम दिल्ली से आये हो, इस बार इस नालायक को भी  यहां से ले जाना, हम तंग आ चुके हैं’।     &lt;br /&gt;‘बाबूजी हमने क्या किया है,&lt;br /&gt;सुनो राघव भैया वो सरपंच का बेटा , राजू भैया  की जो साली बबीता आयी है उसे बुरी तरह से छेड़ रहा था, हम बीच में नहीं आते  तो पता नहीं क्या करता। हम कोई नपुंसक तो हैं नहीं कि चुपचाप देखते रहते।’     &lt;br /&gt;‘खबरदार, सारे गांव की लडकियों की चिंता है तुम्हें अपनी बहन कुवांरी बैठी  है, इसकी फिक्र है घ् रूपयों के कारण अच्छा घर हाथ से निकल जा रहा है, और  तुम मुफ्त का अनाज खाआ॓ और साड की तरह लड़ो। तुम राघव के साथ दिल्ली जा रहे  हो बस।’                                              &lt;br /&gt;आज गांव में काली पूजा की धूम मची हुई है  ,गाने-बजाने, आकेस्ट्रा का प्रोगाम चल रहा है, सभी खूब इंजॉय कर रहे हैं।  लेकिन विजय वहां खामोश बैठा है। राघव भैया, विजय को समझाने की कोशिश करते  हैं, लेकिन विजय वहां से तमतमाते हुए   चला जाता है। रात का समय है, विजय  खाना खा रहा होता है तभी उसकी मां समझाती है ‘ देख बेटा दिल्ली जाआ॓गे तो  दो पैसा कमा कर भेजोेगे तब तो पूजा की शादी और कर्ज उतार पायेंगे।’     &lt;br /&gt;‘ठीक है मां जब तू भी यही चाहती है तो हम जाते हैं लेकिन ए  क शर्त है।’    &lt;br /&gt;‘ क्या ’घ्    &lt;br /&gt;‘तुम रोना मत, और अब अच्छा लडका देखना शुरू कर दो, हम जा रहे हैं।&lt;br /&gt;’  मां की आंखो में आंसूू आ जाते हैं। इधर विजय के जाने की खबर सुनकर जो सबसे  ज्यादा उदास होती है वह है बबीता। उस दिन के घटना के बाद से बबीता मन ही मन  विजय से प्यार करने लगती है।&lt;br /&gt;र्ट्रेन खुल चुकी है, विजय जनरल बॉगी में किसी  तरह बैठने के लिए   जगह बनाता है, चिंताआ॓ से घिरा हुआ है, आखिर अब दिल्ली  में करेगा क्या घ्     &lt;br /&gt;‘राघव भैया , दिल्ली में हम करेंगे क्या’ घ्     &lt;br /&gt;‘अरे वहां बहुत काम है, गाडी चलाना जानता है’ घ्     &lt;br /&gt;‘टर्र्र््रेक्टर भी चला लेते हैं’     &lt;br /&gt;तो बस हो गया, ऑटो रिक्शा चला लेना, मैं अपने पुराने मालिक से तेरे लिए    बात कर लूंगा और तुम्हारा वो दोस्त लक्ष्मण चाचा का बेटा मनोज भी तो है ,  वह भी यही ऑटो चलाता है।                                                  &lt;br /&gt;राघव गली कुची से होते  हुए   अपनी छोटी सी खोली में विजय को ले जाता है। विजय इस छोटी सी खोली, इस  अस्त व्यस्त जगह को देखकर सोच रहा है साला यही दिल्ली है, इससे तो अच्छा  अपना गांव है।                                         &lt;br /&gt;शाम का समय है, विजय अकेले कमरे  में बैठा होता है तभी अचानक से मनोज अंदर आता है और कहता है कि अरे यार  विजय आ पहले गले लग जा, बता कैसा है । गांव में सब ठीक है ,तु कैसे गांव से  शहर आ गया ।     &lt;br /&gt;‘बस सबने मिलकर जबरदस्ती भेज दिया , और सब ठीक है।’     &lt;br /&gt;‘तु काम की चिंता मत कर, राघव भैया हमें मिले थे। मेरे पास ए  क ऑटो रिक्शा  है हम उसे रात में चलाए  ंगे और तुम उसे दिन में चलाना’।      &lt;br /&gt;अब चल तुम्हें दिल्ली की सैर कराता हूं। अच्छा ये बता गांव में मेरी वाली  कैसी है। ‘कैसी है घ् किसी और के साथ भाग गई’। ‘चल भाग साले तू’।        &lt;br /&gt;मनोज विजय को अपने ऑटो में बैठाकर घूमाने निकलता है, दूर से ही अपने ऑटो से  कुतुबमीनार दिखाते हुए   ए  क र्पा के अंदर ले जाता है, जहां लडके लडकियां  रोमांस कर कर रहे होते हैं। विजय बोलता है कि ये तुम कहां ले आए   हो।     &lt;br /&gt;‘यही तो जन्नत है वहां देखो, जोडे की आ॓र दिखाकर , ये लालकिला है , ये  कुतूबमीनार और ये ताजमहल है’। ‘चल साले तु नहीं सुधरेगा’ ।      &lt;br /&gt;आज सुबह सुबह ही विजय ऑटो लेकर निकल जाता है। पेसैंजर का इंतजार कर रहा  होता है, तभी ए  क लडकी आती है और बोलती है।     &lt;br /&gt;‘भैया गुरूद्वारा चलोगे’।      &lt;br /&gt;‘हां क्यों नही ? लडकी बैठ जाती है ऑटो चलती है उसकी नजर मीटर पर पडती  है, मीटर चालु होती है वह बोलती है      &lt;br /&gt;‘भैया वाह आप तो बहुत ईमानदार हो , बिना बोले मीटर से ले जा रहे हो , यहां  तो बोलने पर भी कोई मीटर से नहीं चलता है। ’    &lt;br /&gt;‘मैडम इसमें ईमानदारी क्या यह तो नियम है’।     &lt;br /&gt;‘नहीं नहीं ये ऑटो वाले ज्यादातर बिहारी होते हैं। बहुत ढीट और ठग होते  हैं। आप तो पक्का बिहारी नही हो ।’     &lt;br /&gt;‘विजय अपने गुस्से पर ंर्र्र्ट्रोल करते हुए   ‘ नह  मैडम ए  ेसी बात नहीे  है’।     &lt;br /&gt;‘ए  ेसी बात नहीं क्या, सारे के सारे बिहारी चोर और गंवार होते हैं’।     &lt;br /&gt;अब विजय से बर्दाश्त नहीे होता है वह तेज ब्रेक मारकर ऑटो रोकता है और  बोलता है ‘ मैडम अभी के अभी उतरो ’।     &lt;br /&gt;‘क्यों’ ?&lt;br /&gt;‘क्योंकि हम भी बिहार के रहने वाले हैं और आप जैसी पढी लिखी बददिमाग और  बदतमीज लडकी से हम मुंह ंलगाना नहीे चाहते हैं।&lt;br /&gt;लडकी ऑटो से उतरते हुए   ‘ ए  ेसा मैंने क्या गलत कह दिया, सभी तो कहते हैं  ’।     &lt;br /&gt;‘सब जो कहते हैं जरूरी नहीं वह सही ही कहते हैं और हम आपके जानकारी के लिए    बता देते हैें कि, जिस लोकतंत्र को पूरे विश्व ने माना है, वहां के  संविधान लिखने का भी गौरव ए  क बिहारी को प्राप्त है, देश के प्रथम  राष्टपति डॉ राजेंद्र प्रसाद। ‘गौतम बुद’ जिनके ज्ञान और उपदेश की चर्चा  पूरे विश्व में है, उन्हें भी ज्ञान की प्राप्ति बिहार में ही हुई और कुछ  सुनाउं।       &lt;br /&gt;वह माई फुट बोलते हुए   और पैर पटकते हुए   वहां से चली जाती है। रात  का समय है राघव भैया विजय से पुछ रहे हैं , तब आज की कमाई कैसी रही। विजय  बोलता है ठीक ही रही, बस यहां के कुछ लोग थोडे बदतमीज है।                            &lt;br /&gt;धूप खिली हुई है विजय खाली ऑटो चलाते गुजर रहा  है , तभी उसकी नजर मनोज पर पडती है, वह मनोज के पास पहुंचता है। दो तीन  आदमी मनोज से बात कर कर रहे होते हैं,उसे डरा धमका रहे होते हैं     &lt;br /&gt;‘साले पैसा मांगता है जहां से आया है वहीे भेज दूंगा।     &lt;br /&gt;‘आप हिसाब देख लो साब, आप के यहां मेरा रूपया निकल रहा है।’      &lt;br /&gt;‘बिहारी मादर---- मुझे हिसाब दिखाता है’।     &lt;br /&gt;विजय चुपचाप सुन रहा होता है, अब उससे बर्दाश्त नहीे होता है वह उनलोगों को  मारना शुरू कर देता है, उसके दो चार गुंडे और आ जाते हैं लेकिन विजय अकेले  सब पर भारी पडता है, और मनोज का बकाया रूपया दिलवा कर छोडता है।यह सीन  मनोज को कुछ और जानने वाले लोग देख रहे होते हैें। सबो में विजय की चर्चा  होने लगती है। यह बात राघव भैया तक पहुंचती है, वह विजय को समझाते हैं  दूसरो के मामले में मत पडो , यहां कमाने के लिए   आए   हो । हमें तो किसी  से लडाई नहीे होती है। विजय बोलता है , आपलोग चुपचाप गाली सुन लेते हैं हम  नहीे सुन पाते हैं। हमारा खून खौल उठता है। राघव फिर समझाते हैें और बोलते  हैं कि थोडा दिमाग ठंढा रख कर काम करो, यह गांव नहीे शहर है।                    &lt;br /&gt;विजय टेलीफोन बूथ से मां से बात कर रहा होता है । गांव  में विजय के चाचा के पास मोबाइल है उसी से बात होती है। शाम का समय है विजय  बूथ से निकलकर ऑटो चलाते आगे बढता है तभी ए  क कार पीछे से धीमी टक्कर  मारती है, विजय ऑटो साइड करता है। कार रूकती है उससे तीन चार लडके निकलते  हैं, विजय अपने ऑटो से निकलकर देख रहा होता है कि ऑटो का कुछ नुकसान तो नही  हुआ। तभी ‘ये साले हॉर्न सुनाई नही देती है’     &lt;br /&gt;‘भैया हम तो अपने साइड से जा रहे थे, सत्यानाश तो आपने हमारे ऑटो का कर  दिया । अब इसका हर्जाना कौन भरेगा ’।     &lt;br /&gt;‘साला हरामी बिहारी तुम मुझसे हर्जाना मांगेगा’।     &lt;br /&gt;‘हर्जाना तो आपके बाप को भी देना होगा’।     &lt;br /&gt;तभी उसमें से ए  क विजय का कॉलर पकड लेता है, फिर क्या शुरू होती है मार  पिटाई। इसी दौरान कार का शीशा फूट जाता है उन चारो की भी हालत खराब होती  है। तभी मौके पर पुलिस पहुंचती है। सभी को थाना ले जाती है। राघव भैया को  पता चलता है तो वह थाना आकर विजय को छुडा कर ले जाता है। राघव भैया विजय को  बोलते हैं तेरे से ऑटो का काम नहीे होगा हमने दूसरा काम देख लिया है।  बिल्डिंग बनाने का काम चल रहा है तुम्हें वहां काम कर रहे मजदूरों पर  निगरानी का काम करना है, 4000 रूपये महीना मिलेगा। वहां लडना मत। विजय कुछ  नहीें बोलता है।     &lt;br /&gt;विजय साइट पर जाने लगता है, अच्छा काम चल रहा हैै।मजदूर सब विजय से घुल मिल  जाते हैं। विजय भी वहीें मजदूरों की मदद करते रहता है। ए  क दिन ए  क  मजदूर को छुट्टी लेनी होती है,क्योंकि उसकी बहन की शादी है। लेकिन जब वह  छुट्टी मांगता है तो उसे नौकरी छोड देने को कहा जाता है। यह बात जब विजय  जानता है तो इसका विरोध कर देता है, साथ में सारे मजदूर भी आ जाते हैं। उस  मजदुर को तो छुट्टी मिल जाती है लेकिन विजय मेनेजमेंट के नजर पर आ जाता है।  इनलोगों को लगता है यह बिहारी यहां नेतागिरी शुरू करें, इससे पहले निकाल  दो । इधर वो मजदुर विजय को शादी में आने का निवेदन करता है। विजय मनोज को  लेकर शादी में पहुंचता है, वहां बैंड बाजा, आकेस्ट्रा चलता है। दोनों खुब  जमकर डांस करतें हैं।     &lt;br /&gt;अचानक से ए  क दिन विजय का हिसाब किताब कर दिया जाता है और उसे नौकरी छोड  देने को कहा जाता है। उससे बोला जाता है कि इस काम के लिए   उससे ज्यादा  पढा लिखा लडका मिल गया है।विजय उनकी चाल समझ जाता है, मजदूर सभी विजय के  साथ खडे हो जाते हैं, लेकिन विजय को लगता है ,मेरे कारण बेचारे इन लोगों के  रोजी रोटी पर असर पडेगी। वह मजदूरों को समझाकर काम छोडकर चला जाता है। कुछ  दिनों तक काम नहीे होने के कारण घर पर ही बैठा होता हे। तभी राघव भैया ए  क  दिन ए  क प्रस्ताव लेकर आते हैं,वह विजय से बोलते हैं कि मेरे मालिक को ए   क आदमी की जरूरत है, जिसे खेती बारी की जानकारी हो, लेकिन तुम्हें उसके  लिए   पंजाब जाना होगा। सरदार जी बहुत बडे किसान है, साथ ही बहुत अच्छे  आदमी भी है। हम पर बहुत विश्वास करते हैं तब तो दिल्ली वाली दुकान का सारा  भार हम पर छोडकर निश्ंिचत से पंजाब में रहते हैं।तुम्हे वहां कोई दिक्कत  नहीे होगी। विजय बोलता है जब घर छोडकर निकल ही गया हूं तो क्या दिल्ली,  क्या पंजाब । बस वहां आपलोगों की कमी खलेगी।              &lt;br /&gt;‘अरे हम तो हर महीने वहां हिसाब देने आते ही हैं, भेंट होते रहेगी।  अब बस  तू जाने की तैयारी कर , हां वहां कोई झगडा मत कर लेना’।     &lt;br /&gt;विजय अब पंजाब सरदार जी के घरं पहुंचता है , पहुंचते ही उसकी नजर ए  क लडकी  पर पडती है, दोनों ए  क दूसरे को देखने लगते हैं। यह वही लडकी है जिसे  विजय ऑटो से गुरू़़द्वारा ले जाते वक्त रास्ते में ही उतार दिया था। यह  लडकी है सरदार जी की बेटी हरप्रीत। वह बोलती है ‘तुम ही वह ऑटोवाले हो ना,  तुम यहां क्या कर रहे हो ’।     &lt;br /&gt;‘अरे आप तो वही नकचढी मैडम हैं’।     &lt;br /&gt;‘क्या बोला’।     &lt;br /&gt;‘कुछ नहीं आप यहां क्या कर रही हैं’। हमको तो सरदार करतार सिंह ने यहां काम  करने बुलाया है ’।     &lt;br /&gt;‘वो मेरे पापा है तुम्हें यहां कोई काम नहीे मिलेगा।’     &lt;br /&gt;तभी सरदार जी उधर से आते हैं, बोलते हैं ये क्या हंगामा हो रहा है। विजय  सरदार जी को राघव भैया का चिट्टी देता है, और बोलता है राघव भैया ने मुझे  भेजा है। सरदार जी बोलते हैं तुम्हीे विजय हो। तभी हरप्रीत बोलती है     &lt;br /&gt;‘पापा ये यहां काम नहीें करेगा।      &lt;br /&gt;‘ क्यों ’?     &lt;br /&gt;‘ पापा आपको याद है जब मैं मौसी के यहां दिल्ली गयी थी , तो वहां ए  क ऑटो  वाले ने मुझे रास्ते में उतार दिया था, यह वही है, ये यहां नहीे रहेगा’’     &lt;br /&gt;सरदार जी हंसते और बोलते हें , बेटा जब किसी ईमानदार आदमी को चोर बईमान या  उसकी कौम को गाली दिया जाता है तो वह वही करेगा जो विजय ने किया था।  तुम्हें बिहारी को गाली नहीे देनी चाहिए   थी। कोई भी कौम अच्छा या बुरा  नहीे होता है वहां के आदमी अच्छे या बुरे होते हैं। हरप्रीत झल्लाते हुए    चली जाती है। यह बात सुनकर विजय सरदार जी के पैर छूता है और बोलता है आप सच  में बहुत अच्छे आदमी हैं। सरदार जी का यहां फार्म हाउस होता है , यहीे  विजय के रहने की व्यवस्था हो जाती है। सरदार जी के दो और भाई होते हैं,  उनका परिवार, सभी साथ में रहते हैं। दो भाई में ए  क सरदार जी से बडे होते  हैं, जो पैर से अपाहिज होते हैं, लेकिन घर का फैसला उन्हीं के मर्जी से  होता है। इन्हें कोई संतान नहीे है। दूसरा भाई बलबंत सिंह सरदार जी से छोटा  है, उसके दो छोटे छोटे बच्चे होते हैें और सरदार करतार सिंह को तो ए  क ही  बेटी हरप्रीत हैंं।                                                                                       विजय यहां अपने काम से सबका दिल जीत लेता है। सरदार जी के बडे  भाई जो अपाहिज हैं ,उनका सारा भार जैसे नहलाने ,खिलाने तथा सुलाने तक का वह  अपने उपर ले लेता है। अपना खेत तो अपना खेत दूसरों के खेत में भी हाथ बंटा  देता है। दूसरे लोग भी सरदार जी को कहते हैं आपको तो हीरा मिल गया है। घर  की औरतों को कुछ बाहर का काम हो तो उनके मुंह पर सीधे विजय का ही नाम आता  है और काम भी तुरंत हो जाता है। धीरे धीरे विजय सबका चहेता हो जाता है । बस  हरप्रीत के साथ उसकी नोक झोंक चलती रहती है। हरप्रीत उससे कुछ पंजाबी में  बोलती है तो विजय उसका जवाब भोजपुरी में देता है, और बोलता है कि हम आपको  तो भोजपुरी सिखा कर रहेंगे। दोनों में यही सब होते रहता है।                                                                   &lt;br /&gt;ए  क  दिन हरप्रीत अपने ए  क दोस्त से मिलने के लिए   तैयार हो कर जा रही है। खेत  के बीच से रास्ता होता है । खेत में दो तीन लडके शराब पी रहे होते हैं,  उनकी नजर हरप्रीत पर पडती है, वेलोग खेत का फायदा उठाना चाहते हैें,  हरप्रीत को पकडकर खेत मे खीच लेते हैंै।  तभी वह चिल्लाती है , येलोग  हरप्रीत के साथ जोर जबरदस्ती कर ही रहे थे, तभी चीख की आवाज सुनकर विजय  वहां पहुंच जाता है। उसकी इनलोगों के साथ लडाई होती है।ए  क लडका पीछे से  शराब की बोतल से विजय के सर पर वार करता है, उसके सर से खून गिरने लगता है,  सभी भागने लगते हैं ,विजय उनको पकडने की कोशिश करता है ,लेकिन सभी भाग  जाते हैं। हरप्रीत को लेकर विजय घर पहूुंचता है। विजय की मरहम पट्टी होती  है। सभी लोग तहे दिल से ए  हसान मानते हैं।                                                                       &lt;br /&gt;हरप्रीत अब लडने के बदले उसका क्ष्याल रखने लगती है। वह विजय से बोलती है  कि पापा उस दिन सही बोल रहे थे कि आदमी अच्छा या बुरा होता है , कोई कौम  बुरा नहीे होता है।वह अब विजय के करीब आना चाहती है। वह विजय से भोजपुरी  सीखने लगती है, ताकि वह उसके और करीब आ सके । अब तो उसके सपनो में भी विजय  आने लगता हैं। हरप्रीत को विजय से प्यार हो जाता है। वह उसे बिना बोले  समझाने की कोशिश करती है लेकिन सीधे साधे विजय को यह समझ में कहां आती है।  घर में हरप्रीत की शादी की बात चल रही होती है । उसे कोई लडका वाला देखने आ  रहा है। अब हरप्रीत से बर्दाश्त नही होता है वह जाकर अपनी सारी फीलिंग  विजय से बता देती है। विजय उसे समझाता है यह गलत है, आप ए  ेसा मत सोचिए  ,  सरदार जी हम पर विश्वास करते हैं । वो क्या सोचेंगे ,ए  ेसे भी हम आपके  लायक नहीं है । हम तो बहुत गरीब है। हरप्रीत उससे बोलती है प्यार अमीर गरीब  देखकर नहीं होता है। हरप्रीत उससे भोजपुरी में आई लव यू कहती है और चली  जाती है।                                                           &lt;br /&gt;लडका वाले  देखने आते हैं,विजय लडका को खेत दिखाने ले जाता है। हरप्रीत वहां पहुंच  जाती है और लडके को ही सब बता देती है और उससे शादी नहीे करने की रिक्वेस्ट  करती है। लडका मान जाता है । हरप्रीत विजय से कहती है, वह उससे बहुत प्यार  करती है।वह शादी करेगी तो र्सि उसीसे , नहीं तो जान दे देगी । विजय को भी  हरप्रीत अच्छी लगती थी , वह भी प्यार को स्वीकार कर लेता है। दोनो चोरी  छिपे मिलने लगते हैं।                                                          &lt;br /&gt;विजय आजकल काफी  परेशान रह रहा है। वह इस उलझन में पडा हुआ है कैसे हरप्रीत के बारे में  अपने घर में बताए   और सरदार जी को क्या बताए  ं। तभी राघव भैया़ को आते  देखता है, राघव भैया सरदार जी को हिसाब किताब देने आये हैें। विजय सोचता है  क्योंना पहले राघव भैया से सारी बात बता दें। लेकिन विजय के कहने से पहले  ही राघव विजय से कहते हैं कि तुम्हारी बहन पूजा की शादी ठीक हो गई है, घर  से फोन आया था। सरदार जी से छुट्टी लेकर घर जाने की तैयारी करो। विजय अब मन  की बात मन में ही रख लेता है और बहन की शादी की तैयारी के बारे में सोचने  लगता है। विजय सरदार जी से यह बात बताता है और ए  क महीने की छुट्टी लेता  है। तभी वहां हरप्रीत आती है वह यह बात सुनकर खुश भी होती है और उदास भी  होती है। खुश इसलिए   कि पुजा की शादी ठीक हो गई और दुखी इसलिए   कि ए  क  महीने विजय से दूर रहना होगा। सरदार जी बोलते हैं कि हां हां बेटा बहन की  शादी है जरूर जाआ॓ और यदि कुछ रूपये की जरूरत हो तो मुझसे लेते जाना। अब  विजय सामान लेकर घर जाने के लिए   निकलता है, रास्ते में हरप्रीत उसका  इंतजार कर रही होती है। हरप्रीत ए  क सोने का चेन विजय को देती है और कहती  है यह मेरे तरफ से पूजा के लिए   है और हरप्रीत के आंखो में आंसु आ जाते  हैं।विजय उसे गले लगाकर कहता है जल्द ही वापस आउंगा और तुमसे शादी करके  तुम्हें अपने साथ ले जाउंगा यह बोलकर विजय चला जाता है।                                                                                           &lt;br /&gt;विजय अपने गांव पहुंचता है देखता है सबलोग उसका इंतजार कर  रहे होते हैं। विजय देखता है कि बबीता उसके घर में खाना बना रही होती है।  वह मां से पूछता है मां ये यहां खाना बना रही है। मां बोलती है कि बेटा  तुम्हारे जाने के बाद से बबीता ने इस घर का सारा भार अपने उपर उठा ली है।  सारे सुख दुख में बबीता ही हमारे साथ रही है और अभी तुम्हारी बहन खाना बनाए   गी नहीें और बबीता हमको कुछ करने नहीे देती है।जैसे ही जानी कि तुम आ रहे  हो तुम्हारे पसंद की ही खाना बनाने में लगी हुई है, यह बात सुनकर बबीता  थोडी शर्मा जाती है।                                                      &lt;br /&gt;विजय शादी की  तैयारी में व्यस्त है। आज बारात आने वाली है । खूब धूम धाम से शादी होती  है। विजय के बहन की आज विदाई भी हो जाती है। अब विजय भी वापस जाने की बात  करता है। वह मां को हरप्रीत के बारे में बताना चाहता है , तभी उसकी मां  कहती है , बेटा जाना चाहते हो तो जाआ॓ लेकिन हम चाहते हैें कि अब तुम भी  शादी कर ही लो, क्योंकि पूजा के जाने के बाद घर भी सूना सूना हो गया है, और  हम दोनो ठहरे बूढे , कोई तो देखभाल करने वाला भी चाहिए  । विजय बोलता है  बबीता तो है ही , मां कहती है वही तो हम भी कहना चाहते हैं कि बबीता को  हमेशा के लिए   अपने ही पास रख लेते हैं। हम और तुम्हारे बाबूजी दोनों की  यही इच्छा है तुम्हारी और बबीता की शादी हो जाए  । ए  क तरह से समझो कि  तुम्हारे बाबूजी बबीता के घरवाले से बात भी कर लिए   हैं, तुम्हें तो कोई  दिक्कत नहीे है, हां ए  क दिन पूजा कह रही थी कि बबीता तुम्हें उसी दिन से  पसंद करने लगी है जिस दिन तुमने उसे सरपंच के बेटे से बचाया था। यह सब  सुनकर विजय सन्न रह जाता है, और बिना कुछ कहे घर से निकल जाता है। उसके मौन  को मां सहमति समझ लेती है।                                                &lt;br /&gt;इधर विजय अब उलझन मे पडा  हुआ है, ए  क तरफ बबीता है जो उससे प्यार करती है और उसके मां बाप का पूरा  क्ष्याल रखती है तो दुसरी तरफ हरप्रीत है जिसे वह दिलो जान से चाहता है और  वह उसके बिना ज्रिंदा नहीं रह सकती है। विजय को कुछ समझ में नहीं आ रहा है  कि वह क्या करें ?इधर उसके घरवाले शादी की बात आगे बढाने में लगे हुए    हैं। सभी लोग बहुत खुश है। बबीता विजय की परेशानी को देखकर अकेले में पूछती  है कि आप शादी से खुश नहीं है क्या ? विजय चेहरे पर हंसी लाकर बात को टाल  देता है। बबीता ए  क दिन विजय के घर आती है, तो देखती है कि विजय की मां  विजय का कपडा साफ कर रही होती है। वह बबीता से कहती है उस तरफ जो शर्ट पडी  हुई है वह देना। बबीता शर्ट उठाती है तभी शर्ट उसके हाथ से गिर जाती है।  उसके पॉकेट से ए  क फोटो निकलती है जिसमें विजय और हरप्रीत साथ साथ होते  हैं। अब बबीता वह फोटो अपने पास रख लेती है और शर्ट मां को दे देती है। अब  बबीता फोटो लेकर विजय को ढूंढने निकलती है। फोटो दिखाकर विजय से पूछती है  यह कौन है। पहले विजय बात को टालने की कोशिश करता है, लेकिन बबीता अपने सर  की कसम देती है, तो विजय सारी बात बबीता को बताता है। बबीता सुनकर थोडी देर  के लिए   खामोश हो जाती है और फिर बोलती है आपको कुर्बानी देने की कोई  जरूरत नहीं है, आप हमसे कहे तो होते, ए  ेसे भी आपका हमारे उपर बहुत बडा ए   हसान है। यह शादी नहीे होगी, आप पंजाब जाने की तैयारी कीजिए  ।&lt;br /&gt;विजय पूछता  है कैसे ?&lt;br /&gt;बबीता कहती है यह आप हम पर छोड दीजिए  । बबीता विजय के सामने  खुश होने का नाटक दिखाती है,कि उसे इस फैसले से कोई दुख नही है। वहां से  जाने के बाद अकेले में बहुत रोती है।                                   &lt;br /&gt;विजय और बबीता की शादी टूट जाती है और  घरवाले भी विजय और हरप्रीत के बारे में जान जाते हैं। पहले तो बहुत गुस्से  में होते है, फिर विजय की बात सुनकर सहमति दे देते हैं। विजय जाने से पहले  बबीता से मिलता है और उससे कहता है हमें माफ कर देना, तुम्हें हमसे बहुत  अच्छा लडका मिलेगा।                                                                              &lt;br /&gt;अब विजय पंजाब पहुंचता है। हरप्रीत विजय को देखकर खुश हो जाती हैं।  विजय अपने काम में लग जाता है। आज विजय और हरप्रीत दोनो फिर खेत में मिलते  हैं, विजय का सर हरप्रीत के गोद में होता है। वह उससे बोल रहा होता है ‘  मेरे घर का तो मामला फिट हो गया , अब बस तुम्हारे पापा से बात कर लें। इस  तरह चोरी छिपे मिलते बहुत डर लगता है, कोई देख लिया तो क्या समझेगा।’     &lt;br /&gt;‘कोई नहीे देखेगा’।      &lt;br /&gt;तभी सरदार जी का छोटा भाई बलवंत सिेह इनदोनो को खेत में देख लेता है। वह  गुस्साते हुए   विजय का कॉलर पकडता है, विजय उसे समझाने की कोशिश करता है,  लेकिन वह ए  क नही सुनता है और विजय को ए  क जोरदार झापर मारता है और  हरप्रीत का हाथ पकड खिंचते हुए   घर की आ॓र ले जाता है। विजय भी पीछे पीछे  आता है। हरप्रीत को गेट के अंदर करता है और विजय को बाहर ही रोक देता है।  सरदार जी पूछते हैं     &lt;br /&gt;‘क्या हो रहा है’।           &lt;br /&gt;‘अपनी बेटी से पूछिए  ’। यह बोलकर बलवंत सिंह बाहर चला जाता है।     &lt;br /&gt;हरप्रीत बोलती है ‘ पापा हमदोनों ए  क दूसरे से बहुत प्यार करते हैं।’     &lt;br /&gt;‘साहब जी हम आपको यह बताने ही वाले थे, हमें माफ कर दीजिए  , हम ए  क दूसरे  से बहुत प्यार करते हैं’।   सरदार जी बोलते हैं ‘ खामोश, यदि ए  क लफ्ज भी अपनी गंदे जुबान से निकाला  तो जीभ खिंच लेंगे।’                                                                                                                               &lt;br /&gt;यह आावाज सुनकर घर के सभी लोग बाहर आ जाते हैं। सरदार जी के बडे भाई भी  अपने व्हील चेयर लेकर आ जाते हैं। संयोग से राघव भैया भी आये होते हैं।  सरदार जी फिर बोलते हैं ‘ मैंने तुम्हें क्या समझा और तुम क्या निकले , अभी  के अभी यहां से निकल वरना तुम्हारे दो टुकडे कर दूंगा।’     &lt;br /&gt;‘पापा मेरे भी दो टुकडे कर दीजिए   , मैं विजय के बिना नहीे जी पाउंगी’।  सरदार जी हरप्रीत को गुर्राकर देखते हैं।     &lt;br /&gt;‘ साहब जी हमसे गलती हुई, लेकिन हम आपके बेटी से सच्चा प्यार करते हैें,  हमें माफ कर दीजिए  । ’     &lt;br /&gt;‘अभी के अभी गंदी सुरत लेकर निकल जाआ॓’’     &lt;br /&gt;तभी बलवंत सिंह अपने साथ 10-12 गुंडो को लाता है, जिसके पास तलवार, लाठी,  चैन होता है, ये सब मिलकर विजय को मारना शुरू करते हैं। हरप्रीत का हाथ  सरदार जी पकड लेते है, वह चिल्ला रही होती है। राघव भैया से नहीे देखा जाता  है वे बचाने जाते हैं, लेकिन वे लोग उन्हें भी मारना शुरू कर देते हैें,  और बिहारी कह कर गाली देने लगते हैं। उन्हें मार खाता देख , विजय उठता है  और सभी गुंडो को मारना शुरू कर देता है ,धीरे धीरे सभी पस्त हो जाते हैं।  विजय वहीे पास पडी तलवार उठाता है और बलवंत सिंह पर तान देता है, फिर तलवार  फेंक देता है, और राघव भैया को उठाकर वहां से जाने के लिए   निकलता है।  गेट तक पहुंचते ही पीछे से ए  क जोरदार आवाज आती है, यह आवाज सरदार जी के  बडे भाई की होती है,  &lt;br /&gt;वह बोलते हैें ‘ विजय यहां आआ॓’, विजय पीछे घूमता है और खून से लथपथ उनके  पास जाकर खडा हो जाता है। फिर बोलते है ‘ हरप्रीत इधर आआ॓ ’। सभी स्तब्ध  रहते हैं, वह दोनो का हाथ ए  क दूसरे के हाथ में देते हैं और बोलते हैें  ‘किसी को कोई ए  तराज ,बहुत देर से तुमलोगों की बकवास सुन और देख रहा हू"’।     &lt;br /&gt;सरदार जी बोलते है‘ भाई साहब आप ये क्या कर रहे हैं’     &lt;br /&gt;‘इससे अच्छा लडका तु हरप्रीत के लिए   ढू"ढ सकता है तो बता। यह चाहता तो  इसे भगाकर कब का ले गया होता, तब क्या करता। दोनों ए  क दूसरे से प्यार  करते हैं, विजय ए  क नेक बंदा है तब तुमलोगों को क्या परेशानी है’। ए  क  बार फिर वह जोरदार और आदेश के लहजे में कहते हैे ‘ किसी को कोई ए  तराज’  कोई कुछ नहीे बोलता है।                                              &lt;br /&gt;विजय और हरप्रीत सरदार जी  के बडे भाई के पैर पर गिर जाते हैं। । वह दोनों को उठाते हैं और विजय से  कहते हैं ‘ हमें माफ कर देना’।      &lt;br /&gt;‘साहब जी आप हमें शर्मिंदा मत कीजिए  ’।         &lt;br /&gt;‘मुझे साहब जी मत बोल पुत्तर तुम तो अब हमारे बेटे हुए  ’।     &lt;br /&gt;सरदार जी भी अब दोनों को आशीर्वाद देते हैं, बलवंत सिंह चुपचाप खडा देख रहा  होता है। तभी सरदार जी के बडे भाई बोलते हैें, यह शादी विजय के गांव बिहार  से होगी, यही बहाने हमलोग बिहार भी देख लेंगे और विजय के घरवालों से भी  मिल लेंगे।                                             &lt;br /&gt;सभी लोग बिहार के लिए    निकलते हैं, यहां छठ पर्व का माहौल  होता है, येलोग विजय के घर पहुंचते  हैं, उस दिन शाम का अर्ग होता है। सभी लोग पूजा का आनंद उठाते हैं और फिर  दोनों की शादी हो जाती है। इधर बबीता भी शादी में अपने पति के साथ आयी हुई  होती है।                                                                                                        &lt;br /&gt;समाप्त&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-4386392528164301335?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/4386392528164301335/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/08/blog-post_18.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' 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style="font-size:130%;"&gt;&lt;span id="ctl00_ContentPlaceHolder1_ConvertedText"&gt;&lt;span style="color: rgb(204, 0, 0);font-size:6;" &gt;&lt;u&gt;कास्टीज्म या दलित&lt;/u&gt;            &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;   &lt;br /&gt;चारो तरफ अशांति फैली हुई है। जो लोग कभी नीचे बैठा करते थे,  उन्होंने कुर्सी                                   पर बैठने की लड़ाई शुरू कर दी है। कास्ट के नाम पर जहरीले हवाए  ं  बहायी जा         रही है। देश की सबसे बडी पार्टी राष्ट्रीय चरखा पार्टी के अध्यक्ष  को यह गर्म हवा          काफी परेशान कर रही है। दरअसल देश के सबसे बडे़ राज्य में विधानसभा  चुनाव           जो होने वाले हैं। राज्य के चुनाव प्रभारी मिश्रा जी को तलब किया  गया था। आज          वो अध्यक्ष जी से मिलने दिल्ली पहु"चे हैं।                  &lt;br /&gt;‘मिश्रा जी इस बार भी हमारी पार्टी की ही सरकार बननी चाहिए  । क्या  लगता है बन                                                       पाए  गी ?’          &lt;br /&gt;मिश्रा जी चाय की चुस्की  लेते हुए   बोलते हैं।          &lt;br /&gt;‘अध्यक्ष जी क्यों नहीं , जरूर बनेगी। पूरे राज्य में चरखा पार्टी  की लहर है। बस वो          नया-नया ए  क दलित नेता विजयशंकर कुछ परेशान कर रहा है। उसके कारण  थोड़ा         जातीय समीकरण गड़बड़ा सकता है।’            &lt;br /&gt;‘थोड़ी नहीं पूरी जातीय समीकरण बिगड़ सकती है। इस दलित नेता का  बैकग्राउंड क्या         है ?’      &lt;br /&gt;‘सर वह पहले मानव संसाधन मंत्रालय में र्क्ल पद पर कार्यरत था। प्रमोशन को  लेकर    भेद-भाव बरतने का आरोप सीधे-सीधे मंत्री जी पर लगा दिया था। कहा  जाता है मंत्रीजी ने इसका जवाब थप्पड से दिया था। वहीं से इसने जातीय  राजनीति की शुरूआत की और फिर नौकरी छोड़कर दलितों, गरीबों के समर्थन से अपनी  पार्टी बना सक्रिय राजनीति में आ गया है।’     &lt;br /&gt;‘आप विजयशंकर से मिले और उसे अपनी पार्टी में लाने की कोशिश करें, नहीं  माने तो मंत्रालय का आश्वासन दें। मुक्ष्यमंत्री जी से कहिए   चुनाव भर  दलित, गरीब और अल्पसंक्ष्यकों का खास क्ष्याल रखें । इसमें किसी भी तरह की  गलती बर्दाशत नहीं होगी, और आप विजयशंकर पर नजर बनाए  ं रखें।’     &lt;br /&gt;जनमोर्चा मैदान पर हजारों हजार लोगों की भीड़ जमा है। भीड़ में काफी जोश है।  विजयशंकर जिंदाबाद, बाबा अंबेदकर जिंदाबाद, समता समाज पार्टी जिंदाबाद की  गूंज चारों तरफ फैल रही है। विजयशंकर मंच से इन लोगों को संबोधित कर रहे  हैं।     &lt;br /&gt;‘यहां उपस्थित लोगों को मेरा बहुत-बहुत धन्यवाद ! यह धन्यवाद आपकी उपस्थिति  भर के लिए   नहीे बल्कि इस उपस्थिति में जो जोश है , उसके लिए   है। हमें  कमजोर कहा जाता है ,क्योंकि हमने अपनी सहनशक्ति जरूरत से ज्यादा बढा ली है।  बाहम्णों, फॉरवार्डो के अन्याय को सहना हमने अपना धर्म बना लिया है। यहां  कौन नहीं जानता है कि इन ठाकुरों ने हमारी बहनों, बेटियों के साथ खेतों  में, बंद कमरो में जो हैवानियत की है। हर अपमान का बदला लिया जाए  गा।  जरूरत है आपको अपने खून में गर्मी लाने का जो बहुत ठंढा पडा हुआ है। हम  बोलते हैं तो बोला जाता है कि यह आदमी जात के नाम पर विषैले बाण छोड़ रहा  है। क्या हम कुछ गलत बोलते हैं ।’     &lt;br /&gt;भीड़ से आवाज आती है, ‘नहीं’ और नारों की गूंज शुरू हो जाती है। विजयशंकर  फिर से बोलना शुरू करते हैं।     &lt;br /&gt;‘ आप अपनी ताकत को समझिए  । आप काम नहीं करेंगे तो जमींदारों के खेत बंजर  पड़ जाए  ंगे। हमें अपनी काम की कीमत पैरों पर गिरकर नहीं बल्कि पूरे अधिकार  के साथ नजर से नजर मिलाकर लेनी चाहिए  । सत्ता में बैठे संपन्न लोगों को  हमारी कोई फिक्र नहीं है। अब समय आ गया है कि हम अपनी पूर्ण जिम्मेदारी के  साथ इस विधानसभा चुनाव में ए  क नया अध्याय लिखें। जय हिन्द !’     &lt;br /&gt;भाषण के बाद भीड़ में और दोगुना उत्साह आ गया है। उत्साह के साथ-साथ  फॉरवार्डो के अन्याय के प्रति आक्रोश को भी साफ-साफ देखा जा सकता है।                                                                      &lt;br /&gt;सुबह का समय हैं। विजयशंकर अपने  सहयोगी दयाराम के साथ मिर्जापुर में होनेवाले लोकसभा सीट के उपचुनाव पर  चर्चा के साथ चाय पी रहे हैं, और हाथ में लिए   अखबार पर भी नजर डाले हुये  हैं। तभी उनकी नजर मिर्जापुर की ए  क खबर पर पड़ती है। वह दयाराम से पूछते  हैं कि यह मिर्जापुर अस्पताल में क्या हो रहा है, और यह कुमारी मधुमती कौन  है ?      &lt;br /&gt;‘कुमारी मधुमती मिर्जापुर अस्पताल की ए  क दलित नर्स है। जिसने अस्पताल  प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दरअसल ए  क गरीब महिला का प्रसव  अस्पताल के बाहर हुआ जिसमें उसके बच्चे की मौत हो गयी। बताया जाता है सभी  डॉक्टर व्यस्त थे, जबकि उस महिला के ठीक बाद आए   पूर्व विधायक की बहू का  प्रसव अस्पताल के अंदर हुआ।                                         &lt;br /&gt;विजयशंकर बोलते हैं कि तब तो  मधुमती ने संवेदनशील काम किया है। हमें उसके हौसले के लिए   धरणा में शीघ्र  शरीक होना चाहिए  । यह लोग मिर्जापुर के लिए   निकलते हैं।                               &lt;br /&gt;इधर कुमारी मधुमती के धरणा में कुछ अस्पताल  के कर्मचारी भी शामिल हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का भी खूब समर्थन मिल रहा है, मगर  प्रशासन इस आ॓र कोई रूचि नहीं दिखा रही है। विजयशंकर को आता देख मधुमती आगे  आकर अभिवादन करती है। विजयशंकर भी मधुमती के साथ धरणा पर बैठ जाते हंै।   विजयशंकर के इस धरणा से जुड़ने की खबर सरकार तक पहुंचती है। सरकार अब इस बात  को और आगे बढाना नहीं चाहती है, तुरंत सुपरिटेंडेंट को सस्पेंड कर दिया  जाता है। विजयशंकर मधुमती को पार्टी ज्वाइन करने का ऑफर देते हैं और साथ  में पार्टी महासचिव पद की पेशकश कर देते हैं। कुमारी मधुमती को तो शायद इसी  दिन का इंतजार होता है, वह तुरंत समर्पित कार्यकर्ता बनने को तैयार हो  जाती है। हालांकि दयाशंकर अचंभित होकर विजयशंकर से पूछते हैं इस नयी लड़की  को महासचिव का पद क्यों दिया जा रहा है। विजयशंकर बताते हैं कि इस लड़की की  जरूरत हमारी पार्टी को है, और दार्शनिक अंदाज में बोलते हैं ‘ इसे कोई रोक  नहीं पाए  गा।’                            भादोपुर गांव में अलग ही हंगामा मचा हुआ है।  भासो मोची के बेटे धर्मा पर उस दिन के भाषण का रंग चढा हुआ है। वह ठाकुर  अजय सिंह के दरवाजे पर उसके सामने रखी कुर्सी पर बैठकर अपना मेहनाताना  मांगता है। कुछ देर तो अजय सिंह देखते रह जाते हैं । फिर वहां बैठे ठाकुरों  के खून में उफान आता है और गाली गलौज के साथ धर्मा को अधमड़ा करके उसके  बस्ती में फेंक दिया जाता हैं। अब यह बात यहीं थमने वाली नहीे है, तुरंत  धर्मा जैसे कुछ दलित युवा मिलकर योजना बनातें हैं, और चौक पर खड़े हो जाते  हैंै। जैसे अजय सिंह का भाई मंगल सिंह अपने बाइक से वहां पहुंचता है, वह  लोग भी उसे अधमडा कर भाग जाते हैं। पुलिस आकर कुछ दलित युवा को पकड़ कर ले  जाती है। लेकिन ठाकुरों को कुछ नहीं करती है। इस घटना की खबर जैसे ही  मधुमती को मिलती है, वह तुरंत बस्ती पहुंचकर बेकवार्डो को ए  कजुट कर ए  न ए   च जाम कर अनशन पर बैठ जाती है। शहर के ए  सपी के संबंधी होने के बावजूद  भी ठाकुर अजय सिंह को जेल जाना पड़ता हैं। इस घटना के बाद मधुमती राजनीतिक  पार्टीयों और आम लोगों के बीच भी चर्चे में आ गयी है।                                                   &lt;br /&gt;चुनाव जैसे-जैसे नजदीक  आ रहा है, माहौल भी गर्माता जा रहा है। भारतीय धर्म पार्टी के कद्दावर  नेता अमरनाथ सिंह मिर्जापुर सीट के उपचुनाव को लेकर अपने पार्टी के सांसद  रामनाथ त्रिपाठी से चर्चा कर रहे हैं और सामने अखाडे पर कुश्ती चल रही है।  इस बार अमरनाथ सिंह के बेटे संजय सिंह को इस सीट से टिकट देने का फैसला  पार्टी ने किया है। अमरनाथ सिंह ताल ठोककर कह रहे हैं उनका बेटा ही जीतेगा।  इधर संजय सिंह ए  क दलित शिक्षक की बेटी शोभना के प्यार में फिदा है।  इन्हें अमरनाथ सिंह से कड़ी हिदायत मिली है कि वह इस दलित लड़की को भूल जाए   ं।                                       &lt;br /&gt;इधर विजयशंकर भी मधुमती से चुनावी  तैयारी को लेकर चर्चा कर रहे हैं। तभी राष्ट्रीय चरखा पार्टी के चुनाव  प्रभारी मिश्रा जी वहां पहुंचते हैें, वह अकेले में बात करने की पेशकश करते  हैं । विजयशंकर मधुमती को अपना करीबी बता वहीं बात करने बोलते हैं। दोनों  में बात चलती है, मिश्राजी बात बनता नहीं देख मंत्रालय की पेशकश करते हैं ,  उसे भी ठुकरा दिया जाता है। उन्हें बेआबरू हो वहां से निकलना पड़ता है।  मधुमती बोलती है कि मंत्रालय की पेशकश बुरी नहीं थी, हम सरकार में पावर में  आयेंगे तभी तो कुछ कर पाए  ंगे। विजयशंकर बोलते हैं ‘हमें पावर से ज्यादा  तरजीह गरीबों, दलितों के विश्वास को देनी चाहिए  , पावर तो खुद ब खुद आ जाए   गा। और ये मंत्रालय नहीे केवल मंत्रालय का आश्वासन दे रहे थे।’     &lt;br /&gt;मिर्जापुर लोकसभा सीट के लिए   सभी पार्टी के उम्मीदवार तय हो जाते हैं।  विजयशंकर की पार्टी ‘समता समाज पार्टी’ से वहां के लोकल नेता रामनाथ पासवान  को खड़ा किया जाता है। भारतीय धर्म पार्टी से संजय सिंह मैदान में होते  हैं। राष्ट्रीय चरखा पार्टी से उम्मीदवार दलित महिला आशा देवी होती है। इधर  अमरनाथ सिंह पैसा खिलाकर कुछ और छोटे-छोटे दलित नेताओं को गुपचुप तरीके से  खड़ा करवा देते हैं। चुनावा प्रचार जोर -शोर से चल रहा है। अमरनाथ सिंह  चिंतित है, क्योंकि जिस तरह की बेकवार्ड और फॉरवार्ड की हवा बह रही है,  इसमें जीतना मुश्किल है। मिर्जापुर में केवल 20 प्रतिशत ही फॉरवार्ड वोटर  है। तभी ए  क समस्या और आ जाती है, संजय सिंह को शोभना के साथ अकेले गाड़ी  से निकलते ए  क प्रेस रिर्पोटर देख लेता है, और यह कल की खबर बन जाती है।  इस खबर से अमरनाथ सिंह की परेशानी और बढ जाती है, लेकिन तभी उनके मन में ए   क विचार आता है। वह संजय को बुलाकर पूछते हैं , शोभना तुमसे प्यार करती  है, वह तुमसे शादी के लिए   तैयार हो जाए  गी ? संजय कुछ देर तो देखता रह  जाता है फिर हॉ बोलता है। अमरनाथ सिंह संजय को लेकर शोभना के घर पहुंचते  हैं और दोनो के प्यार और शादी की बात करते हैें। सीधे-साधे शोभना के पिता  बेटी की खुशी और इतने बडे़ घर से रिश्ते को देखकर मान जाते हैं। चार दिनों  के अंदर दोनों की शादी हो जाती है। शोभना मिर्जापुर की रहने वाली दलित है,  इसका फायदा अमरनाथ सिंह चुनाव प्रचार में खुब उठाते हैें। अपनी अलग छवि पेश  की जाती है। जातीय समीकरण घुमा दी जाती है और चुनाव में संजय सिंह की जीत  होती है।                 &lt;br /&gt;विजयशंकर हार को लेकर चिंतित होने से ज्यादा हार का कारण  कार्यकर्ताओं को समझने कह रहे हैं, क्योंकि विधानसभा चुनाव बिलकुल नजदीक आ  चुकी है।                                             &lt;br /&gt;जीत की जश्न ठंडी भी नहीे पड़ती  है कि खबर आती है, संजय सिंह की पत्नी शोभना की करंट लगने से मौत हो गयी।  इस मौत पर राजनीति शुरू हो जाती है। मधुमती इस मौत के मौके को गंवाना नहीं  चाहती है। वह तुरंत अनशन पर बैठ जाती है और मौत की जांच सीबीआई से कराने की  मांग करती है। आम लोगों के बीच यह बात फैल जाती है कि संजय सिंह से शोभना  की शादी केवल चुनावी फायदे के लिए   था, दलितों को धोखा दिया गया है। सभी  पार्टी इसे भुनाने में लगी हुई है। भारतीय धर्म पार्टी अमरनाथ सिंह के बचाव  में लगी हुई है वह इसे ए  क दुखद दुर्घटना बता रही है। विजयशंकर इस घटना  से काफी दुखी है। वह शोभना के पिता से मिलते हैं और न्याय दिलाने का वायदा  करते हैं। अमरनाथ सिंह से सवाल पूछे जा रहे हंै, वह जगह-जगह सफाई देते फिर  रहे हैं, लेकिन किसी को विश्वास नहीं हो रहा है। हॉ, उनके बेटे संजय सिंह  को यह विश्वास नहीें हो रहा है कि उनके पिता की यह कोई साजिश है। सच कहा  जाय तो शोभना की मौत का सबसे ज्यादा गम संजय सिंह को है।                                     &lt;br /&gt;मिश्राजी और मुक्ष्यमंत्री जी इस  मामले को अभी और गर्माए  ं रखना चाहते हैं। मुक्ष्यमंत्री जी दलितों,  पिछड़ों और अल्पसंक्ष्यकों को प्रमोशन पर प्रमोशन दे रहे हैं, नये नये  योजनाओं की घोषणा कर रहे हैं।ं                                             &lt;br /&gt;मधुमती  अनशन पर बैठी है।  विजयशंकर चुनाव के लिए   पार्टी ंड में चंदा इकट्ठा कर रहे हैंै। पिछड़े और  दलित अधिकारी, कर्मचारी, व्यवसायी गुपचुप तरीके से पार्टी ंड में पैस दे  रहे हैं।                                                                     &lt;br /&gt;चुनाव के डेट फाइनल हो जाते हैंै। सरकार की तरफ से सीबीआई जांच की मांग मान  ली जाती है। धरणा प्रदर्शन खत्म हो जाते हैं, लेकिन मामले को छोड़ा नही गया  है। मधुमती लोगों से घर-घर जाकर मिल रही है। जगह-जगह भाषण कार्यक्रम चल  रहा है। पार्टी में विजयशंकर के बाद दूसरी पोजीशन कुमारी मधुमती ने बना ली  है। लोगों में भी काफी पोपुलर हो गयी है। इधर विजयशंकर रिसर्च र्व में लगे  हुए   हैं, किस विधानसभा में किस जाति के कितने वोटर है पूरा डाटा तैयार  किया जा रहा है।                              &lt;br /&gt;मोहनपुर दलित बाहुल्य गांव है। वहां आज  मधुमती का भाषण कार्यक्रम है, ठीक उसके बाद अमरनाथ सिंह का भी भाषण होने  वाला है। मधुमती काफी जोशीला और अक्रामक भाषण देती है, इसमें दलित महिला  शोभना हत्याकांड की भी चर्चा होती है। भीड़ गुस्से में होती है। जैसे अमरनाथ  सिंह भाषण को आते हैं, उन्हें जूते चप्पल से स्वागत किया जाता है। वह जान  बचाकर भागते हैं। संजय सिंह को जैसे यह पता चलता है, इस युवा ठाकुर के खून  में उबाल आ जाता है। वह अपने कुछ दोस्तों के साथ गाड़ी से मोहनपुर पहुंचता  है, और दलितों पर गोलियां बरसा देता है। 15 लोगों की मौत हो जाती है और 10  से अधिक घायल हैं । भारतीय धर्म पार्टी तुरंत संजय सिंह को पार्टी से बाहर  का रास्ता दिखा देती है। सरकारी कारवाई तुरंत होती है, और संजय सिंह को जेल  होती है। ए  क सप्ताह बाद चुनाव है, मामला बिलकुल तनावपूर्ण बना हुआ है।  बेकवार्ड और फॉरवार्ड की राजनीति चरमसीमा पर पहुंच चुकी है। राष्ट्रीय चरखा  पार्टी दोनों तरफ से हाथ सेंक रही है। मधुमती कुछ ए  ेसा चाहती है कि पूरे  दलित और पिछड़े वोट बैंक पर उसका कब्जा हो, क्योंकि वह जानती है कि इसके  बिना उसके मुक्ष्यमंत्री बनने का सपना पूरा नहीं हो पाए  गा। वह दयाराम और  अपने पार्टी प्रवक्ता तथा ंडदाता सूरजदास के साथ गुप्तगु करती है और चुनााव  से ठीक दो दिन पहले विजयशंकर को गोली मरवा दी जाती है। पूरा देश सन्न रह  जाता है। वोटिंग होती है और ‘समता समाज पार्टी’ सबसे बड़ी पार्टी उभरकर आती  है, लेकिन अकेले सरकार नहीं बना सकती है। कुमारी मधुमती ‘भारतीय धर्म  पार्टी’ के समर्थन से सरकार बनाती है, और खुद मुक्ष्यमंत्री बन जाती है तथा  अमरनाथ सिंह को राज्य का गृहमंत्री बनाया जाता है। पिछडे़ और दलित वोटर  खुद को ठगा महसुस कर रहे हैं। ए  क पढा लिखा दलित इस खबर को अखबार में पढ  रहा होता है वह इतना आक्रोशित हो जाता है कि अखबार फाड़कर फेंक देता है।  पत्नी की तरफ देखकर बोलता है, हमें ए  क बार फिर ठगा गया। यदि विजयशंकर  जिंदा होते तो बात कुछ और होती, पता नहीं उन्हें मरवाया किसने ? अब तो हम  कतई इस दलित राजनीति के चक्कर में पडने वाले नहीं हैं, इस राजनीति से जो  फायदा मिलना था मिल गया। अब तो जो विकास की बात करेगा उसे ही वोट देंगे।                                  &lt;br /&gt;                                                                                                           समाप्त&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-3416009121969684695?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/3416009121969684695/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/08/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/3416009121969684695'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/3416009121969684695'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/08/blog-post.html' title='कास्टीज्म या दलित'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-9178950395268004355</id><published>2011-03-05T02:05:00.000-08:00</published><updated>2011-03-05T02:12:53.962-08:00</updated><title type='text'>एक्साइज डय़ूटी के विरोध में कारोबारियों का धरना-प्रदर्शन</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/-z4CMzLM_NJM/TXIMLiMCmrI/AAAAAAAAAGk/iWcTg30v0rU/s1600/2.jpg"&gt;&lt;img style="float: left; margin: 0pt 10px 10px 0pt; cursor: pointer; width: 170px; height: 64px;" src="http://1.bp.blogspot.com/-z4CMzLM_NJM/TXIMLiMCmrI/AAAAAAAAAGk/iWcTg30v0rU/s320/2.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5580536280560868018" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;  नई दिल्ली (४/३/11)। रेडीमेड गारमेंट पर 10 फीसद एक्साइज डय़ूटी लगाने के  विरोध में रेडीमेड गारमेंट से जुड़े देशभर के कारोबारियों ने शुक्रवार को  जंतर-मंतर पर धरना दिया। इस दौरान राजधानी सहित दूसरे शहरों के भी व्यापारी  यहां पहुंचे और अपनी आवाज बुलंद की। हजारों की संख्या में पहुंचे  कारोबारियों ने सरकार को यह चेतावनी भी दी कि अगर सरकार एक्साइज डय़ूटी नहीं  हटाती तो वह अपना आंदोलन इसी तरह से पूरे देश में जारी रखेंगे। इसके साथ  ही उन्होंने सरकार को यह इंडस्ट्री बंद होने और उससे देश में बड़ी संख्या  में बढ़ने वाले बेरोजगारों की संख्या का आइना भी दिखाया। विरोध-प्रदर्शन का  आयोजन क्लोथिंग मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएमएआई) तथा इंटिमेट  अपेरेल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएआई) की ओर से किया गया था। आईएएएम के एमडी  राकेश ग्रोवर ने बताया कि रेडीमेड गारमेंट पर 10 फीसद एक्साइज डय़ूटी लगता  है तो उत्पाद की कीमतों में 40 फीसद तक का इजाफा होगा। आईएएआई के एमडी  राकेश ग्रोवर ने कहा कि पिछले एक साल में कॉटन की कीमतों में 130 फीसद की  बढ़ोतरी हुई है, जिससे पहले ही कॉटन से बने उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी  हुई है। अब फिर रेडीमेड गारमेंट पर 10 फीसद एक्साइज डय़ूटी बढ़ाने से रूमाल  से लेकर अंडर गारमेंट की कीमतें इतनी बढ़ जाएंगी कि आम आदमी को अपना तन  ढंकना तक मुश्किल हो जाएगा। इसके साथ ही छोटे कारोबारियों का कारोबार पूरी  तरह से चौपट हो जाएगा और इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के सामने  बेरोजगारी की विकराल समस्या खड़ी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का यह  कदम इस इंडस्ट्री को चौपट करने जैसा है और विदेशी कंपनियों को देश में  कारोबार फैलाने के लिए आमंत्रित करने वाला है। उन्होंने कहाकि हम किसी भी  हालत में इस क्षेत्र में कार्यरत दो करोड़ लोगों के सामने भूखों मरने की  नौबत नहीं आने देंगे। इसके लिए हम वित्त मंत्री से मिलेंगे और उसके बाद भी  एक्साइज डय़ूटी सरकार वापस नहीं लेती है तो पूरे देश में अपना आंदोलन जारी  रखेंगे। उन्होंने कहाकि इस उद्योग के बंद होने से सबसे ज्यादा बेरोजगार  महिलाएं होगी। क्योंकि अंडर गारमेंट निर्माण में महिलाएं सबसे ज्यादा हैं।  एक साल में 130 फीसद महंगा हुआ कॉटन आईएएआई के अनुसार पिछले तीस वर्षो से  कॉटन के निर्यात पर रोक लगी हुई थी जिससे कॉटन इन तीस वर्षो में इसकी  कीमतों में केवल 30 फीसद की बढ़ोतरी हुई थी लेकिन एक साल पहले जब कॉटन  निर्यात करने की सरकार ने इजाजत दी तब से अब तक कॉटन की कीमतों में 130  फीसद की बढ़ोतरी हुई है। आईएएआई के अनुसार इससे पहले कॉटन की कीमतों में  बढ़ोतरी नहीं होने से कॉटन की जगह उससे बना उत्पाद निर्यात होता था लेकिन  अब कच्चा कॉटन ही निर्यात होने लगा है। इससे देश में कॉटन की कमी पैदा हुई  है और इसकी कीमतों में इजाफा होता गया। सरकार किसे रेडीमेड गारमेंट मानती  है जो उत्पाद डिब्बे में पैक हो और उसके ऊपर लेबल लगा हो। इसके अलावा वह  रजिस्र्टड हो। देश में गारमेंट का बाजार 35-40 हजार करोड़ का है। रेडीमेट  गारमेंट के काम में दो करोड़ लोग लगे हैं जिनमें से 50 फीसद हिस्सा महिलाओं  का है।&lt;/p&gt;&lt;p class="haedlinesstory"&gt; &lt;span style="font-size:180%;"&gt;&lt;span style="color: rgb(153, 0, 0);"&gt;सोमवार को बंद रहेंगे शोरूम&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;  नई दिल्ली। पेंटालूंस, शापर्स स्टाप, वेस्टसाइड, लाइफस्टाइल व मदुरा  गारमेंट्स सहित तमाम बड़ी परिधान कंपनियों के शोरूम सोमवार को बंद रहेंगे।  इन कंपनियों ने ब्रांडेड परिधानों पर 10 फीसद उत्पाद शुल्क लगाने के सरकार  के फैसले के विरोध में इस एकदिनी हड़ताल की घोषणा की। रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ  इंडिया के सीईओ कुमार राजगोपालन ने पीटीआई को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा  कि सभी बड़े रिटेलरों ने 4,000 छोटे रिटेलरों के साथ सोमवार को अपने शोरूम  बंद रखने का फैसला किया है। सरकार ने आम बजट में ब्रांडेड परिधानों पर दस  फीसद उत्पाद शुल्क लगाने का प्रस्ताव किया है। उन्होंने कहा कि भारत में  लगभग 50,000 परिधान ब्रांड हैं जिन पर इस घोषणा का असर होगा। सोमवार को  देशभर में इस तरह के लगभग 10,000 शोरूम बंद रहेंगे। राजगोपालन ने कहा कि  भारत में परिधानों का सलाना कारोबार 1,00,000 करोड़ रुपए का है जिसमें से  60,000 करोड़ रुपए ब्रांडेड परिधानों से आते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार पर  अपने फैसले पर पुनर्विचार के लिए दबाव डालने के लिए यह पहल की गई है। यूचर  ग्रुप के निदेशक एवं सीईओ राकेश बियाणी ने कहा कि उत्पाद शुल्क न केवल  कंपनियों के लिए, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा झटका है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class="haedlinesstory"&gt; &lt;span style="color: rgb(255, 102, 0);font-size:180%;" &gt;कन्फेडरेशन ने भी किया विरोध&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;  नई दिल्ली । कन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स ने सरकार द्वारा  रेडीमेड गारमेंट पर एक्साइज डय़ूटी लगाने का विरोध कर रहे संगठनों का समर्थन  करते हुए केन्द्र सरकार से इसे वापस लिए जाने की मांग की है। कन्फेडरेशन  के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतीया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन  खण्डेलवाल ने कहा कि वित्त मंत्री ने अपने बजट में 2012 से देशभर में  जीएसटी लागू किए जाने की घोषणा है ऐसे में रेडीमेड गारमेंट पर एक्साइज  डय़ूटी लगाया जाना सही नहीं है। खण्डेलवाल ने कहा कि इससे छोटे कारोबारियों  का कारोबार पूरी तरह से चौपट हो जाएगा और देश में विदेशी कंपनियों के  उत्पादों की भरमार हो जाएगी। कनफेडरेशन ने केन्द्रीय वित्त मंत्री, कपड़ा  मंत्री व लोकसभा एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेताओं को ज्ञापन भेजकर इस  मामले पर अपनी चिंता जताई है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;  &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-9178950395268004355?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/9178950395268004355/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/03/blog-post_05.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/9178950395268004355'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/9178950395268004355'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/03/blog-post_05.html' title='एक्साइज डय़ूटी के विरोध में कारोबारियों का धरना-प्रदर्शन'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-z4CMzLM_NJM/TXIMLiMCmrI/AAAAAAAAAGk/iWcTg30v0rU/s72-c/2.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-1376677238199238101</id><published>2011-03-04T03:51:00.000-08:00</published><updated>2011-03-04T03:52:57.221-08:00</updated><title type='text'>अनचाही कॉल्स से मुक्ति के लिए दो लाख उपभोक्ताओं ने कराया रजिस्ट्रेशन</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/-4BwW6gS8oLE/TXDSgMlF5nI/AAAAAAAAAGc/rWyEJEBzQGI/s1600/11.jpg"&gt;&lt;img style="float: left; margin: 0pt 10px 10px 0pt; cursor: pointer; width: 111px; height: 102px;" src="http://4.bp.blogspot.com/-4BwW6gS8oLE/TXDSgMlF5nI/AAAAAAAAAGc/rWyEJEBzQGI/s320/11.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5580191388886492786" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;नई दिल्ली।(३/३/११) पर्सनल लोन, कार लोन, होम लोन, बीमा कराने, डिमेट एकाउंट खोलने  जैसी अनचाही फोन कॉल्स से परेशान राजधानी के दो लाख से भी अधिक मोबाइल फोन  उपभोक्तओं ने अभी तक â€˜डू नॉट डिस्टर्बâ€™ सेवा के तहत अपना रजिस्ट्रेशन  कराया है। रजिस्ट्रेशन के बाद भी अभी तक इन उपभोक्ताओं को अनचाही कॉल्स से  पूरी तरह निजात नहीं मिली है लेकिन पहले की तुलना में अब उनके पास लोन,  बीमा, एकाउंट खोलने या अन्य ऐसे कॉल्स के आने का सिलसिला कम जरूर हुआ है।  ट्राई ने ऐसे अनचाही कॉल्स को पूरी तरह से बंद किये जाने के लिए एक मार्च  तक का समय मोबाइल कंपनियों को दिया था, लेकिन ट्राई ने अब इसे बढ़ाकर 21  मार्च तक कर दिया है। सूत्रों के अनुसार एयरटेल, बोडाफोन, एमटीएनएल,  रिलायंस, आइडिया, एयरसेल समेत अन्य मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों के  उपभोक्ताओं ने â€˜डू नॉट कॉलâ€™ के लिए राष्ट्रीय नम्बर 1909 पर एसएमएस कर  ऐसे फोन से छुटकारा पाने के लिए अपने रजिस्ट्रेशन कराए हैं। इसके अलावा  बड़ी संख्या में लोगों ने इंटरनेट के माध्यम से भी अपने लैंड लाइन और  मोबाइल फोन पर इस तरह के व्यवसायिक फोन र्काल्स स्वीकार न किये जाने के लिए  रजिस्ट्रेशन कराए हैं। सूत्रों के अनुसार एमटीएनएल के पास अब तक अनचाही  फोन से निजात पाने के लिए 20-25 हजार से अधिक एसएमएस आये हैं, जबकि एयरटेल  और बोडाफोन के पास आये एसएमएस की संख्या इससे दोगुने ज्यादा है। रिलांयस और  आइडिया के पास भी करीब-करीब इतने ही एसएमएस आये हैं। एमटीएनएल के एक  अधिकारी के अनुसार ट्राई ने अनचाही कॉल्स पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए  एक मार्च तक का समय सभी मोबाइल फोन सेवा प्रदाता कंपनियों को दिया था। उसके  हिसाब से हमने अपनी तैयारी भी कर ली है पर अब ट्राई ने अनचाही काल्स पर  रोक लगाये जाने की समय सीमा को 21 मार्च तक बढ़ा दिया है। इसलिए उपभोक्ताओं  के पास अभी ऐसे व्यवसायिक फोन काल्स जा रहें होंगे लेकिन 21 मार्च के बाद  ऐसे फोन पूरी तरह से बंद हो जाएंगे। एमटीएनएल सूत्रों के अनुसार दिल्ली के  उपभोक्ता सबसे ज्यादा व्यवसायिक फोन काल्स से परेशान हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-1376677238199238101?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/1376677238199238101/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/03/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/1376677238199238101'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/1376677238199238101'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/03/blog-post.html' title='अनचाही कॉल्स से मुक्ति के लिए दो लाख उपभोक्ताओं ने कराया रजिस्ट्रेशन'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-4BwW6gS8oLE/TXDSgMlF5nI/AAAAAAAAAGc/rWyEJEBzQGI/s72-c/11.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-7701238949925705589</id><published>2011-02-21T03:53:00.000-08:00</published><updated>2011-02-21T03:54:30.747-08:00</updated><title type='text'>मुहब्बत के लिए बाजार भी तैयार</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/-YPaDG3JkX9E/TWJSbDOtXxI/AAAAAAAAAGU/gvKyI__dkFM/s1600/3.jpg"&gt;&lt;img style="float: left; margin: 0pt 10px 10px 0pt; cursor: pointer; width: 68px; height: 58px;" src="http://2.bp.blogspot.com/-YPaDG3JkX9E/TWJSbDOtXxI/AAAAAAAAAGU/gvKyI__dkFM/s320/3.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5576109913315041042" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;नई दिल्ली। इजहारे मोहब्बत का सप्ताह चल रहा है और जैसे-जैसे वेलेंटाइन डे  करीब आता जा रहा है वैसे-वैसे बाजार पर भी खुमारी छाती जा रही है। सोमवार  को वेलेंटाइन डे है और शुक्रवार को प्रोमिस डे है। इस दिन एक दूसरे को  उपहार देकर दोस्ती निभाने का वादा करते हैं। इसके लिए इस वक्त बाजार में  तरह-तरह की चीजों की भरमार है। जिनकी कीमत 99 रुपये से लेकर 10 हजार तक है।  सप्ताह भर चलने वाले वेलेंटाइन वीक का समापन आगामी सोमवार को वेलेंटाइन डे  के साथ होगा। वेलेंटाइन-डे को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह युवाओं में होता है  और इस मौके पर अपनी महिला/पुरुष दोस्त को रिझाने के लिए तरह-तरह के उपहार  भी देते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए कंपनियों ने एक दूसरे को उपहार देने  के लिए टेडी बियर से लेकर खिलौने, फोटो फ्रेम, मग, ज्वेलरी बाक्स, खुशबू  वाला कैंडल, मेटल कैंडल, पेन होल्डर, क्रिस्टल, ज्वेलरी, रेडिमेड कपड़े,  हेयर ज्वेलरी, रेड स्लीपर, लेडिज शू आदि को वेलेंटाइन स्पेशल के नाम से  उतारा है। जिनके कीमतों की शुरुआत 99 रुपये से लेकर दस हजार तक है।  वेलेंटाइन डे पर लड़कियों को देने के लिए तो बाजार में बहुत कुछ होता है  लेकिन पुरुषों को उपहार में देने के लिए कुछ खास नहीं होता है। इसलिए इस  बार पहली बार जानीमानी फैशन डिजाइनर जोडी भरत और रेशमा ने पुरुषों के लिए  रेडिमेट सूट डिजाइन किये हैं। वेलेंटाइन स्पेशन इन सूटों की कीमत 50 हजार  से शुरू होती है जो एक लाख के ऊपर तक जाती है। पुरुषों के अलावा महिलाओं के  लिए भी रेडिमेट सूट की एक पूरी रेंज मौजूद है। इसी तरह महिलाओं के  सौन्दर्य प्रसाधन बनाने वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनी एलेक्जेन्ट्रा डी पेरिस  वेलेंटाइन स्पेशल हेयर एसेसरी को बाजार में उतारा है जिसकी कीमत 1825 से  लेकर 2299 रुपये के बीच है। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय चप्पल निर्माता कंपनी  क्रोक्स ने महिलाओं के लिए विशेष तौर पर वेलेंटाइन रेड स्पेशल स्लीपर और शू  बाजार में उतारा है। सूर्ख लाल रंग के इन चप्पलों और जूतों की कीमत 1195  से लेकर 3295 रुपये के बीच में है। इस बार वेलेंटाइ डे पर कुछ एक होटलों ने  विशेष पैकेज तैयार किये हैं। जिसमें जेपी ग्रुप ने रोमांटिक गेटवे, स्पा  सेन्सेशन पैकेज तैयार किये हैं। जिसके तहत एक जोड़े को कम से कम 6000  (टैक्स छोड़कर) खर्च करने होंगे। इनके अलावा बाजार में गिफ्ट के लिए कई ऐसे  उपहार हैं जो खास कर युवाओं को ध्यान में रख कर तैयार किए गए हैं। म्यूजिक  कंपनियों ने लव सांग्स वाले ओडियो और वीडियो कैसेट व सीडी के सेट को  वेलेंटाइन स्पेशल के नाम से बाजार में उतारा है। इनमें जहां एक ओर नये  गानों को शामिल किया हैं वहीं दूसरी ओर पुरानी पीढ़ी के लोगों के पसंद को  ध्यान में रखते हुए पुराने गानों का भी संग्रह पेश किया गया है। जिसमें 70  और 80 के दशक के प्रेम गीतों को शामिल किया गया है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-7701238949925705589?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/7701238949925705589/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/02/blog-post_9612.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/7701238949925705589'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/7701238949925705589'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/02/blog-post_9612.html' title='मुहब्बत के लिए बाजार भी तैयार'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-YPaDG3JkX9E/TWJSbDOtXxI/AAAAAAAAAGU/gvKyI__dkFM/s72-c/3.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-7636228554251378188</id><published>2011-02-21T03:46:00.001-08:00</published><updated>2011-02-21T03:46:34.530-08:00</updated><title type='text'>वेलेंटाइन-डे : होटलों व ब्यूटी पार्लरों में विशेष पैकेज</title><content type='html'>नई दिल्ली (१३/२/11)। वेलेंटाइन डे को लेकर राजधानी के होटलों और रेस्त्रा  में विशेष इंजाम किए गए हैं। राजधानी के पंचसितारा होटालों ने अपने यहां  वेलेंटाइन डे स्पेशल पैकेज और रेस्त्रा में विशेष व्यंजन की व्यवस्था की  है। जेपी होटल ने युगलों के लिए रोमांटिक गेटवे, स्पा सेन्सेशन, वेलेंटाइन  डे स्पेशल आदि पैकेज जारी किए हैं। यही नहीं इस दिन खूबसूरत दिखने के लिए  ब्यूटी पार्लरों ने भी विशेष वेलेंटाइन पैकेज जारी किए हैं। जेपी होटल ने  वेलेंटाइन डे स्पेशल पैकेज के तहत युगलों को कॉफी आयल मसाज, वीद चॉकलेट  कीमरूट स्क्रब व चॉकलेट पैक देने की घोषणा की है। इसके लिए वह प्रति युगल  6000 रुपए (टैक्स अतिरिक्त) लेगा। इसी तरह रोमांटिक गेटवे के लिए भी प्रति  युगल छह हजार चुकाने होंगे। इस दिन को यादगार बनाने के लिए अनेक ब्यूटी  पार्लरों ने भी वेलेंटाइन स्पेशल पैकेज की घोषणा की है। लक्मे पार्लर की  आरती ठकरियाल ने कहा कि वेलेंटाइन डे के पहले के दिन पार्लर के लिए काफी  भीड़ रहती है। इस बार वेलेंटाइन डे से एक दिन पहले रविवार है, इसलिए इस दिन  तो सांस लेने की भी फुर्सत नहीं होगी। अभी से ही हमारे पास इतनी बुकिंग हो  चुकी है कि नए कस्टमर को अटेंड ही नहीं कर पाएंगे। मेडेन व्यूटी पार्लर की  प्रमुख ललीता ने कहा कि जिस तरह से लड़कियां या औरतें शादियों में जाने या  किसी समारोह में जाने के लिए सजती संवरती हैं , ठीक उसी तरह से अब  वेलेंटाइन डे पर सजने के लिए पार्लरों में आती है। खनका ब्यूटी पार्लर की  प्रमुख भावना ने कहा कि वेलेंटाइन डे अब एक उत्सव की तरह हो गया है। हर कोई  सुंदर दिखना चाहता है इसीलिए अब इस अवसर पर महिलाएं अपनी सुंदरता को लेकर  ज्यादा जागरूक हो गई हैं। रमजान हेयर ब्यूटी पार्लर की अंजलि ने कहा कि  हमारे यहां इस समय सजने संवरने के लिए आने वाले लोगों में महिलाओं और  पुरुषों दोनों की संख्या अच्छी है। उन्होंने बताया कि वेलेंटाइन डे के पहले  हमारे यहां फेशियल, मैनी क्योर और पेडी क्योर करवाने आने वाली लड़कियों की  संख्या और हमारा काम काफी बढ़ जाता है। यहां के पुरुष विंग को चलाने वाले  राजू थापा ने कहा कि महिलाओं को सजने संवरने के लिए तो हमेशा अवसर मिल जाता  है , लेकिन पुरुषों के लिए तो ऐसा अवसर कम ही मिलता है। अब पुरुषों में  सुंदरता को लेकर जागरूकता बढ़ी है, यही वजह है किस इस साल वेलेंटाइन वीक  में हमारे पास सबसे ज्यादा युवा सजने संवरने के लिए आए हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-7636228554251378188?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/7636228554251378188/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/02/blog-post_98.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/7636228554251378188'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/7636228554251378188'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/02/blog-post_98.html' title='वेलेंटाइन-डे : होटलों व ब्यूटी पार्लरों में विशेष पैकेज'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-2506389486570081298</id><published>2011-02-21T03:45:00.001-08:00</published><updated>2011-02-21T03:45:52.013-08:00</updated><title type='text'>रेलवे देगा एक लाख 70 हजार नौकरियां</title><content type='html'>नई दिल्ली (१३/२/11)। रेलवे इस साल एक लाख 70 हजार युवाओं को नौकरी देगा।  इससे न केवल बेरोजगारी कम होगी बल्कि रेल यात्रा पहले की तुलना में और  ज्यादा सुरक्षित होगी। इसकी वजह 1.70 लाख नौकरियों में से करीब 90 हजार  नौकरी सिर्फ सेफ्टी रेलवे मेन्स को दी जाएगी। इस वक्त खाली पड़े 1 लाख 90  हजार पदों में से एक लाख 70 हजार पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई  है और 30 अप्रैल तक इसे पूरा कर लिया जाएगा। इस बात की जानकारी शनिवार को  यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवे  (एनएफआईआर) के महामंत्री एम. रघुवइया ने दी। रघुवईया ने कहा कि हर साल  रेलवे में नौ हजार कर्मचारियों की मौत होती है, जबकि औसतन एक साल में 70  हजार पद रिक्त होते हैं। उन्होंने कहा कि रिक्त पदों को भरने की मांग रेलवे  यूनियनों द्वारा लंबे समय से की जा रही थी और अब जाकर इन्हें भरने की  प्रक्रिया शुरू हुई है। उन्होंने कहा कि 30 अप्रैल तक इन सभी पदों को भरने  की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-2506389486570081298?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/2506389486570081298/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/02/70.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/2506389486570081298'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/2506389486570081298'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/02/70.html' title='रेलवे देगा एक लाख 70 हजार नौकरियां'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-8205403703178552601</id><published>2011-02-21T03:39:00.000-08:00</published><updated>2011-02-21T03:42:41.179-08:00</updated><title type='text'>रेल मुसाफिरों को सुविधाओं का ग्रीन सिग्नल</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/-4U_zOl_nRps/TWJPqWlxHuI/AAAAAAAAAGM/dIXkslb6VAQ/s1600/2.jpg"&gt;&lt;img style="float: left; margin: 0pt 10px 10px 0pt; cursor: pointer; width: 318px; height: 252px;" src="http://3.bp.blogspot.com/-4U_zOl_nRps/TWJPqWlxHuI/AAAAAAAAAGM/dIXkslb6VAQ/s320/2.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5576106877675183842" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;नई दिल्ली। आने वाले दिनों में आनंद विहार स्टेशन पर फॉरेन एक्सचेंज,  एयरपोर्ट की तरह वाटर वेंडिंग मशीन, एटीएम, फूड प्लाजा, कोच गाइड सिस्टम और  इंडिकेशन बोर्ड और टच स्क्रीन इंक्वारी सिस्टम जैसी र्वल्ड क्लास सुविधाएं  जल्द शुरू होने वाली हैं। उत्तर रेलवे के प्रवक्ता ने बताया कि इन चीजों  पर काम चल रहा है और जल्द ये सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उत्तर रेलवे के  प्रवक्ता के अनुसार आनंद विहार देश का पहला ऐसा स्टेशन है, जिसे पूरी तरह  से हैंडीकेप्ट फ्रेंडली (विकलांगों के अनुकूल) बनाया गया है। इस स्टेशन पर  फिलहाल रिजव्रेशन, कंप्यूटराइज्ड एनाउंसमेंट सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक र्बड,  ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग मशीन जैसी सुविधाओं के अलावा पानी, शेल्टर,वॉटरकूलर,  वेटिंग हॉल, क्लाक रूम जैसी बेसिक सुविधाएं यात्रियों को मिल रही हैं।  प्रवक्ता के अनुसार निर्माण कार्य इस तरह से किया जा रहा है कि यात्रियों  को इससे किसी भी तरह की कोई परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि पूर्व की ओर  जाने वाली ट्रेनों के लिए यात्रियों को किसी भी तरह की कोई समस्या न हो  इसके लिए स्पेस मैनजमेंट का पूरा ख्याल रखा गया है। करीब 6000 वर्गमीटर में  फैले करीब 85 करोड़ की लागत से बने स्टेशन में आने और जाने के लिए शुरुआत  से ही अलग-अलग गेट की व्यवस्था की गई है। यहां आने-जाने वाली ट्रेनों की  संख्या में भी लगातार इजाफा होता जा रहा है। फिलहाल यहां से लंबी दूरी की  चार गरीब रथ समेत एक दर्जन एक्सप्रेस-सुपरफास्ट ट्रेनें चल रही हैं। इनमें  से तीन ट्रेनें नॉर्थ-ईस्ट, पटना-जय नगर गरीब रथ को इसी सप्ताह 8 व 9 फरवरी  को यहां शिफ्ट किया गया है1&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-8205403703178552601?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/8205403703178552601/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/02/blog-post_9901.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/8205403703178552601'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/8205403703178552601'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/02/blog-post_9901.html' title='रेल मुसाफिरों को सुविधाओं का ग्रीन सिग्नल'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-4U_zOl_nRps/TWJPqWlxHuI/AAAAAAAAAGM/dIXkslb6VAQ/s72-c/2.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-3623681067376868522</id><published>2011-02-21T03:36:00.000-08:00</published><updated>2011-02-21T03:37:44.306-08:00</updated><title type='text'>भरतनाट्यम देख दर्शक हुए भाव विभोर</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/-J8qsC6TJUww/TWJOghzRVxI/AAAAAAAAAF8/Ltyex8MX2aQ/s1600/1.jpg"&gt;&lt;img style="float: left; margin: 0pt 10px 10px 0pt; cursor: pointer; width: 237px; height: 110px;" src="http://4.bp.blogspot.com/-J8qsC6TJUww/TWJOghzRVxI/AAAAAAAAAF8/Ltyex8MX2aQ/s320/1.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5576105609374291730" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;नई दिल्ली (१०/२/11)। सांस्कृतिक संस्था ‘कलईकुड्डूम’ की ओर से सत्य साई  सभागार में शास्त्रीय नृत्य संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जानी-मानी  भरतनाट्यम नृत्यांगना कोमला वरदन की देखरेख में आयोजित नृत्य के इस  कार्यक्रम में गौतम बुद्ध व श्रीकृष्ण लीला पर आधारित कार्यक्रम पेश किया  गया। कार्यक्रम की शुरुआत सात वर्षीय अनन्या के गणोश वंदना से हुई। इसके  बाद भगवान शिव को समर्पित ‘पुष्पांजलि’ में कलाकारों ने भगवान शिव के  विभिन्न रूपों को साकार किया। कोमला वरदन ने भगवान गौतम बुद्ध के जन्म से  पहले की एक घटाना को अपने नृत्य के माध्यम से साकार किया। उन्होंने अपने  नृत्य के माध्यम से यह बताने की कोशिश की कि गौतम बुद्ध के जन्म से पहले  किस तरह से एक राक्षस प्रतिदिन एक मृग को अपना भोजन बनाता था और जब एक दिन  एक गर्भवती मृग का नंबर आता है तो मृगों का राजा उसकी जगह खुद राक्षस के  पास चला जाता है। एकल नृत्य के माध्यस से जिस तरह से कोमला वरदन इस पूरी  कहानी को मंच पर नृत्य के माध्यम से साकार किया, उसे देखकर दर्शकों ने  दांतों तले उंगुली दबा ली। उम्र के इस पड़ाव पर नृत्य में इतनी ऊर्जा का  होना दर्शकों को हतप्रभ करने वाला था। कार्यक्रम का सामापन भगवान राम की  आरती के साथ हुआ। करीब डेढ़ घंटे तक चले इस कार्यक्रम में अनन्या, रंजीता,  दिव्यांस आदि कलाकारों ने नृत्य पेश किये।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-3623681067376868522?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/3623681067376868522/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/02/blog-post_8043.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' 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width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-5214038891306970235</id><published>2011-02-21T03:30:00.000-08:00</published><updated>2011-02-21T03:31:57.100-08:00</updated><title type='text'>नई दिल्ली का पानी बुझाएगा पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन की प्यास</title><content type='html'>नई दिल्ली। पिछले तीन वर्षो से गर्मियों में पीने के पानी की किल्लत झेल  रहे पुरानी दिल्ली स्टेशन को इस वर्ष गर्मियों में पानी के लिए तरसना नहीं  पड़ेगा। यात्रियों की प्यास बुझाने और ट्रेनों की साफ-सफाई के लिए यहां नई  दिल्ली रेलवे स्टेशन से पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए  नई दिल्ली से 3।7 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाने का काम चल रहा है जिसे हर  हाल में मार्च के आखिर तक पूरा कर लिया जाएगा। इस पाइप लाइन के बिछ जाने  के बाद यहां की पानी की समस्या लभगभ खत्म हो जाएगी। उत्तर रेलवे के  महाप्रबंधक एस। के। बुधलाकोटी ने बताया कि पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के  यात्रियों की प्यास बुझाने के लिए इस वक्त पाइप बिछाने का काम चल रहा है और  अब तक एक किलोमीटर पाइप बिछाई जा चुकी है। शेष 2।7 किलोमीटर पाइप लाइन  मार्च तक बिछा दी जाएगी और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से पानी की आपूर्ति शुरू  हो जाएगी। उन्होंने बताया कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर जरूरत से ज्यादा  पानी उपलब्ध है इसलिए इस पानी को पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर डायर्वट  किये जाने से यहां के यात्रियों को किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी।  रेलवे अधिकारियों के अनुसार नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर यमुना रेनीवेल से  पानी की आपूर्ति होती है जो जरूरत से ज्यादा है। रेलवे अधिकारियों के  अनुसार पुरानी दिल्ली स्टेशन पर रोज करीब साढ़े तीन लाख यात्रियों की जरूरत  व ट्रेनों की साफ-सफाई के लिए रोज करीब 10 लाख लीटर पानी की आवश्यकता होती  है, जिसमें से करीब पांच लाख लीटर पानी की आपूर्ति टैंकरों से की जाती है  जबकि एक लाख लीटर पानी की आपूर्ति जल बोर्ड करता है। फिर भी करीब 4-5 लाख  लीटर पानी की कमी बनी ही रहती है। इस स्टेशन से जाने वाली करीब सौ यात्री  ट्रेनों में प्रतिदिन पानी भरा जाता है। इसके अलावा दर्जन भर से अधिक  ट्रेनों का मेंटेनेंस होता है। इस पाइप लाइन के बिछ जाने से बहुत हद तक  पानी की जरूरत पूरी हो जाएगी। फिलहाल स्थिति यह है कि अभी गर्मी शुरू भी  नहीं हुई है और पानी की कमी को लेकर 31 जनवरी को यहां पर मूरी एक्सप्रेस के  यात्रियों ने जम कर हंगामा काटा, जिसे शांत करने के लिए आला अधिकारियों को  मौके पर जाना पड़ा था।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-5214038891306970235?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/5214038891306970235/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/02/blog-post_8542.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/5214038891306970235'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/5214038891306970235'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/02/blog-post_8542.html' title='नई दिल्ली का पानी बुझाएगा पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन की प्यास'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-7082443442244895069</id><published>2011-02-21T03:05:00.000-08:00</published><updated>2011-02-21T03:06:07.710-08:00</updated><title type='text'>भारत-चीन सांस्कृतिक मैत्री के पुरोधा थे कुमारजीव : प्यारेलाल</title><content type='html'>नई दिल्ली (४/२/11)। बौद्ध दार्शनिक और ऋषि कुमारजीव भारत-चीन के बीच  सांस्कृतिक मैत्री के पुरोधा थे। जापान में 75 हजार बौद्ध मंदिर बने हैं  जिनमें से 62 हजार मंदिर कुमारजीव की ही देन हैं। माना जाता है कि भारत में  ह्वेनसांग के आने से पहले कुमारजीव चीन में बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार  कर चुके थे। लेकिन दुर्भाग्य से अभी तक कुमारजीव के योगदान को लेकर अपने  देश में बहुत कुछ नहीं किया गया है, जबकि उन्होंने संस्कृत के ग्रंथों का  चीनी भाषा में अनुवाद किया और वहां (चीन) के जनमानस तक पहुंचाया। यह बात  इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के संयुक्त सचिव बीबी प्यारेलाल ने  बृहस्पतिवार से शुरू हुए तीन दिवसीय सेमिनार के उद्घाटन अवसर पर कही। इस  मौके पर इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ इंडियन कल्चर के निदेशक प्रो. लोकेश चंद्रा,  आईजीएनसीए के अध्यक्ष चिन्मया आर. गोरेखान, सेमिनार की कोऑर्डिनेटर  प्रोफेसर शशिबाला व डॉ. अजय कुमार मिश्र के अलावा रॉयल एकेडमी ऑफ साइंस,  बेल्जियम के सदस्य प्रो. चार्ल्स विल्मेन समेत 13 देशों के प्रतिनिधि मौजूद  थे। इस मौके पर कुमारजीव पर आईजीसीएनए द्वारा प्रकाशित कैटलॉग भी जारी  किया गया। प्रोफेसर लोकेश चन्द्रा ने कहा कि जितना काम कुमारजीव पर होना  चाहिए था उतना काम हमारे यहां नहीं हुआ है, जबकि बौद्ध धर्म को भारत से  बाहर स्थापित करने में उनका योगदान अहम है। उन्होंने कहा कि पिछले 16 सौ  वर्षो में कुमारजीव के योगदान पर कोई काम ही नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि  कुमारजीव के संस्कृत में लिखे ग्रंथों के दो लाख से अधिक पन्ने चीन के  बौद्ध मंदिरों मे रखे हुए हैं। संस्कृत की उन रचनाओं पर काम भी हो रहा है।  शशिबाला ने कहा कि चीन के बौद्ध मंदिरों में ऐसे ग्रंथों के पन्ने रखे हुए  हैं जो अमू्ल्य हैं। कुछ ग्रंथ तो ऐसे हैं जो हमारे यहां मौजूद ही नहीं  हैं। डॉ. अजय कुमार मिश्र ने कहा कि कुमारजीव पर आयोजित इस सेमिनार और  प्रदर्शनी से लोगों को कुमारजीव के बारे में जानने और समझने का मौका  मिलेगा। इसके लिए उन्होंने सेमिनार के आयोजक आईजीएनसीए की सराहना की।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-7082443442244895069?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/7082443442244895069/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/02/blog-post_4147.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/7082443442244895069'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/7082443442244895069'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/02/blog-post_4147.html' title='भारत-चीन सांस्कृतिक मैत्री के पुरोधा थे कुमारजीव : प्यारेलाल'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-9006314882732600309</id><published>2011-02-21T03:03:00.001-08:00</published><updated>2011-02-21T03:03:57.366-08:00</updated><title type='text'>बॉलीवुड से उत्तर रेलवे को लाखों की कमाई</title><content type='html'>नई दिल्ली। (४/२/११) कोहरे और जन आंदोलन से उत्तर रेलवे को भले ही जोर का झटका लगा  हो, लेकिन इसकी भरपाई रेलवे ने बॉलीवुड से थोड़ी-बहुत जरूर कर ली है। एक  वर्ष के दौरान उत्तर रेलवे ने विभिन्न फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री फिल्मों की  शूटिंग से लाखों की कमाई की है। हालांकि, इस कमाई से कोहरे और आंदोलन के  चलते हुए घाटे को नहीं पाटा जा सकता, लेकिन थोड़ी- बहुत भरपाई जरूर की जा  सकती है। अप्रैल से अब तक उत्तर रेलवे के विभिन्न स्टेशनों पर तीन फिल्मों  की शूटिंग हुई है, जिनकी परमिशन फीस के रूप में ही उत्तर रेलवे को 10.75  लाख रुपए मिले हैं, जबकि ट्रेनों को फिल्मों में शूट किए जाने से जो किराया  मिला है, वह इससे कई गुना अधिक है। उत्तर रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के  मुताबिक चंडीगढ़, देहरादून व पंजाब के कुछ एक स्टेशनों पर इस साल तीन  फिल्मों की शूटिंग हुई है। इसमें कंगना राणावत की ‘तनू वेड्स मनू’ भी शामिल  है। इसके अलावा दो और अनाम फिल्में है, जिनकी शूटिंग देहरादून और पंजाब के  विभिन्न इलाकों में हुई है। उत्तर रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी राजेश खरे के  अनुसार ‘तनू वेड्स मनू’ की शूटिंग चंडीगढ़ में करीब एक सप्ताह हुई थी। इसी  तरह, एक अन्य फिल्म की शूटिंग देहरादून और दूसरी अन्य फिल्म की शूटिंग  राजधानी के आसपास में हुई है। उन्होंने कहा कि ट्रेनों के भीतर, स्टेशनों  पर खड़ी ट्रेनों के बाहर आदि की शूटिंग के लिए इस साल परमिशन फीस के रूप  में अप्रैल से अब तक उत्तर रेलवे को सिर्फ फीस के रूप में 10.75 लाख रुपए  मिले हैं, जबकि ट्रेनों के किराये के रूप में यह आंकड़ा कई गुना ज्यादा है।  उन्होंने बताया कि ए-श्रेणी के शहरों के स्टेशनों पर या ट्रेनों मे शूटिंग  करने के लिए परमिशन फीस एक लाख है जबकि बी-श्रेणी के लिए 50 हजार और  सी-श्रेणी के शहरों के लिए 25 हजार रुपये फीस तय है। खरे के अनुसार शूटिंग  के लिए ट्रेनों को किराये पर लेने पर फिल्म निर्माता से 9 लाख रुपये की  सिक्युरिटी ली जाती है। इसके अलावा निर्माता को पांच करोड़ रुपये का बीमा  भी करवाना होता है। उन्होंने बताया कि एक दिन की शूटिंग का खर्च 5-6 लाख से  अधिक ही बैठता है। उन्होंने कहा कि शूटिंग की अनुमति यहां से मिलती है  जबकि किराये की राशि जिस स्टेशन पर शूटिंग होनी होती है, वहां जमा होती है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-9006314882732600309?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/9006314882732600309/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/02/blog-post_3440.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/9006314882732600309'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/9006314882732600309'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/02/blog-post_3440.html' title='बॉलीवुड से उत्तर रेलवे को लाखों की कमाई'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-6588811005107869075</id><published>2011-02-21T02:52:00.000-08:00</published><updated>2011-02-21T02:53:26.761-08:00</updated><title type='text'>कैनवस के जरिये यौन शिक्षा</title><content type='html'>नई दिल्ली (२/२/11)। युवाओं में एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूकता लाने का  बीड़ा दो युवा कलाकारों ने उठाया है। ये दोनों कलाकार अपने चित्रों के  माध्यम से एक काल्पनिक सुपर हीरो ‘सुपरमैन’ के माध्यम से सुरक्षित यौन  संबंध बनाने का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। जीतेन ठकराल और सुमेर टागरा  द्वारा बनाये चित्रों की यह प्रदर्शनी ‘पुट इट ऑन अगेन’ शीर्षक से नेचर  मोत्रे गैलरी में चल रही है। प्रदर्शनी में कुल छह पेंटिंग को डिस्पले किया  गया है। जीतेन ठकराल ने कहा की हर लड़की का आदर्श पुरुष ‘सुपरमैन’ जैसा  होता है। सुपरमैन रबर की बनी पोशाक पहनता है और दुनिया को बचाता है। हमने  ने भी सुरक्षित यौन संबंधों के प्रचार प्रसार के लिए उसे एक उपमा के तौर पर  प्रयुक्त किया है। उन्होंने कहा कि हम इंटरनेट के दौर में रह रहे हैं जहां  हम अश्लील फिल्में तो देख सकते हैं लेकिन बड़ों के साथ सेक्स के बारे में  बात नहीं कर सकते। हमें लगता है कि यह समय कला के माध्यम से सेक्स के बारे  में हमारे व्यवहार का विश्लेषण करने का है। जीतेन ने कहा कि एचआईवी/एड्स पर  काम करना का आइडिया तब आया जब हम दोनों एक एड एजेंसी में काम कर रहे थे और  वहां एक सरकारी विभाग से एड्स पर कार्यक्रम बनाने का काम मिला। उस दौरान  हमने महसूस किया कि एड्स के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए जो भी  कार्यक्रम बनते हैं उनका असर किसी पर नहीं होता है। जीतेन और समीर अपनी कला  के माध्यम से उन स्थानों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं जहां एचआईवी के  खिलाफ परंपरागत अभियान नहीं पहुंच पाया है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-6588811005107869075?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/6588811005107869075/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/02/blog-post_21.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/6588811005107869075'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/6588811005107869075'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/02/blog-post_21.html' title='कैनवस के जरिये यौन शिक्षा'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-8734558208601554204</id><published>2011-02-21T02:47:00.000-08:00</published><updated>2011-02-21T02:52:31.238-08:00</updated><title type='text'>‘कल्पना चावला महिलाओं की उड़ान का प्रतीक’</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/-EBatXwbR6Ek/TWJD4C1WtZI/AAAAAAAAAF0/ZqCuzgWYiwk/s1600/E2EF205241532220113220163-large.jpg"&gt;&lt;img style="float: left; margin: 0pt 10px 10px 0pt; cursor: pointer; width: 208px; height: 129px;" src="http://3.bp.blogspot.com/-EBatXwbR6Ek/TWJD4C1WtZI/AAAAAAAAAF0/ZqCuzgWYiwk/s320/E2EF205241532220113220163-large.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5576093918750487954" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;नई दिल्ली (२/२/११)। अंतरिक्ष यात्री स्व. कल्पना चावला महिलाओं की उड़ान  की प्रतीक है। उन्होंने भारतीय महिलाओं की उड़ान को अंतरिक्ष तक पहुंचाया।  कल्पना चावला की पुण्य तिथि को महिला सशक्तिकरण दिवस के रूप में मनाया जाना  चाहिए। यह बात पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज ओल्ड ब्वॉयज एसोसिएशन (पिकोवा) के  महासचिव अमरजीत सिंह कोहली ने मंगलवार को यहां विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी  11 महिलाओं को सम्मानित करने के लिए आयोजित कल्पना चावला सम्मान समारोह में  कही। समारोह में स्व. कल्पना चावला के पिता बनवारी लाल चावला ने इन  महिलाओं को 8वां कल्पना चावला एक्सीलेंस अवार्ड प्रदान किया। कल्पना चावला  की स्मृति में पिकोवा की ओर से नेशनल साइंस एकेडमी में आयोजित इस समारोह  में संस्कृतिकर्मी पद्म विभूषण डा. कपिला वात्स्यायन, फैशन डिजाइनर रितु  बेरी, कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक विजेता कृष्णा पूनिया, नृत्यांगना  शोभना नारायण सहीत कुल 11 महिला हस्तियों को सम्मानित किया गया। पुरस्कार  पाने वाली हस्तियों में राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष डा. मोहिनी  गिरि, समाजसेविका नौरती, पेंटर नीता महिन्द्रा, दक्षिणी धुव्र विजेता रीना  कौशल, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी सोहिनी कुमारी, प्रसिद्ध लेखिका मनोरमा जफा व  आईपीएस अधिकारी कंवलजीत देओल शामिल हैं। पुरस्कार स्वरूप सभी को प्रशस्ति  पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान किये गए।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-8734558208601554204?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/8734558208601554204/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/02/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/8734558208601554204'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/8734558208601554204'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2011/02/blog-post.html' title='‘कल्पना चावला महिलाओं की उड़ान का प्रतीक’'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' 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जुड़ी दो दर्जन से अधिक महिलाओं को दूसरा ’आधी आबादी वूमेन्स एचीवर्स अवार्ड 2010‘ से सम्मानित किया। सम्मान पाने वाली महिलाओं में डा। काकोली घोष व अगास्था के। संगमा (एमपी), कविता सेठ (गायिका), शालू जिंदल (शास्त्रीय नृ्त्यांगना), गीताश्री व प्याली दासगुप्ता (महिला पत्रकार), उल्का गुप्ता (सीरियल ’झांसी की रानी‘ की नायिका), लवी रोहतगी, रीचा सोनी, दिप्ती भटनागर (अभिनेत्री), प्रेमलता गर्ग (शिक्षिका), वैशाली गर्ग (12वीं की टॉपर), सुशीला कुमारी (लेखिका), नीलम शर्मा (एंकर), शांता राय (उद्यमी), रीता बोरा (निर्माता), मधु गुज्जर (मेयर,मेरठ), राजबाला शर्मा (समाजसेवी), डा. पल्लवी मिश्रा (कवयित्री) के अलावा प्रीति कौर, रश्मि सिंह, शबनम कुमारी व बबली कुमार, कनिका ग्रोवर, डा. ग्रेस पिंटो आदि शामिल है। कार्यक्रम का आयोजन दिनेश टेलीफिल्म्स, दत्ता एंड दत्ता फिल्म्स व इनविक्टा मीडिया की ओर से किया गया था।&lt;br /&gt;महिलाओं को सम्मानित करने के बाद गिरिजा व्यास ने कहा कि आधी आबादी को सम्मानित किया जाना एक तरह से पूरी आबादी को सम्मानित करना है। क्योंकि मंिहला के बगैर समाज की कल्पना नहीं की जा सकती है और जिस समाज में महिलाओं को सम्मान और इज्जत दिया जाता है वह समाज हमेशा उन्नति करता है। इस मौके पर महिला एक्टिविस्ट रंजना कुमारी ने कहा कि आधी आबादी का आधार बनाए रखने की जरूरत है। यह आधार अगर टूटता है तो समाज का आधार टूट जाएगा। इस मौके पर नीदरलैड स्थित इंडिया हाउस की ओर से आयी वैजयंती माला जगबंधन ने वूमेन्स एचीवर्स अवार्ड समारोह नीदरलैड में आयोजित किए जाने का निमंत्रण दिया। सुश्री जगबंधन यह निमंत्रण इंडिया हाउस के सीएमडी राजकुमार जगबंधन की ओर से लेकर आयी थीं। कार्यक्रम में अभिनेत्री नम््राता थापा, पूजा थापा, विजया भारती ने नृत्य संगीत के कार्यक्रम पेश किए। समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं को मिला वूमेन्स एचीवर्स अवार्ड । इस मौके पर दिनेश टेलीफिल्म्स के निदेशक दिनेश के सिंह, दत्ता एंड दत्ता फिल्म्स के राजेश शर्मा व इनविक्टा मीडिया की निदेशक मीनू गुप्ता मौजूद थी । &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-3104705802655937778?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/3104705802655937778/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/11/blog-post_28.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/3104705802655937778'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/3104705802655937778'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/11/blog-post_28.html' title='महिलाओं को सम्मानित करना पूरी आबादी का सम्मान : व्यास'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' 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/&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों व नाटकों का कलाप्रेमी जमकर लुत्फ उठाएंगे। खेलों के दौरान प्रतिदिन औसतन छह और दस दिनों के भीतर लगभग पांच दर्जन लोकप्रिय नाटकों का मंचन किया जाएगा, जबकि गेम्स से पहले और बाद के नाटकों को मिलाकर यह आंकड़ा सौ से अधिक है। इनमें वैसे नाटकों को शामिल किया गया है जिनकी लोकप्रियता देश के अलावा कॉमनवेल्थ देशों में भी खूब रही है। नाटकों की लोकप्रियता को देखते हुए विदेशी मेहमानों को दिखाने के लिए दिल्ली सरकार ने इन्हें प्रायोजित करने की घोषणा की है। कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान दिल्ली श्रीराम भारतीय कला केन्द्र रामायण पर आधारित नृत्य नाटिका ’श्रीराम‘ के 10 विशेष शो आयोजित करेगा। यह विशेष शो दिल्ली सरकार द्वारा प्रायोजित होगा। ये शो 4-13 अक्टूबर के बीच श्रीराम भारतीय कला केन्द्र में होंगे। यह शो पूरी तरह से विदेशी मेहमानों के लिए होगा। वहीं दूसरी ओर कॉमनवेल्थ गेम्स को देखते हुए राष्ट्रीय नाट विद्यालय (एनएसडी) महीने भर के अंदर 37 नाटकों के 49 शो करेगा। एनएसडी के जनसंपर्क अधिकारी अनूप बरूआ के अनुसार 6 से 16 सितम्बर तक नार्थ ईस्ट थियेटर फेस्टिवल का आयोजन किया जाएगा। जिसमें असमी, गारो, मिजो, राभा, मणिपुरी व ब्राजवली आदि स्थानीय भाषाओं के 9 नाटकों का मंचन होगा। एनएसडी रंगमंडल दो नाटकों ’लिटिल बिग ट्रेजडीज‘ के सात शो व ’बेगम का तकिया‘ के पांच शो करेगा। गेम्स के समय 1से15 तक जश्ने-ए-बचपन का आयोजन किया जाएगा। जिसमें भारत समेत नेपाल, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और जर्मनी के कुल 26 नाटक मंचित होंगे। इसके अलावा इस दौरान देश भर से आये 600 बाल कलाकारों का दल एनएसडी द्वारा आयोजित बाल संगम नाट महोत्सव के तहत अपनी नाट कला का प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान संगीत नाटक अकादमी की ओर से 4 से 13 अक्टूबर के बीच श्रीराम सेंटर में नृत्य- संगीत के दर्जन भर कार्यक्रम आयोजित होगे। जबकि श्रीराम सेंटर गेम्स और खिलाड़ियों को वेलकम करने के लिए ’भूमि कन्या पिता‘ नाटक का तीन शो आयोजित करेगा। यह शो 28 से 30 सितम्बर के बीच श्रीराम पेक्षागृह में आयोजित किये जाएंगे। श्रीराम सेंटर द्वारा आयोजित नाटकों को छोड़कर अन्य सभी नाटकों में प्रवेश निमंत्रण पत्र पर होगी। गेम्स के दौरान दस दिनों में ले सकेंगे 60 नाटकों का लुत्फ सरकार प्रायोजित नाटकों में प्रवेश निशुल्क विदेशी दर्शकों के लिए होगा नृत्य नाटिका’श्रीराम‘ का विशेष प्रदर्शन कॉमनवेल्थ गेम्स के दोरान किया जायेगा .&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-4034170511976943450?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/4034170511976943450/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/09/blog-post_05.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/4034170511976943450'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/4034170511976943450'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/09/blog-post_05.html' title='खेलों के साथ नाटक व नृत्यों का भी चलेगा दौर'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TINralhOtTI/AAAAAAAAAFE/BqZkz6vXrR0/s72-c/untitled.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-7333148184626427073</id><published>2010-09-01T03:53:00.000-07:00</published><updated>2010-09-01T04:05:44.627-07:00</updated><title type='text'>पेंटिंग्स से होगा विदेशी मेहमानों का स्वागत</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TH4zOuS4hiI/AAAAAAAAAE8/ZKkly-FwMLI/s1600/mail.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5511899321986483746" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 102px; CURSOR: hand; HEIGHT: 166px" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TH4zOuS4hiI/AAAAAAAAAE8/ZKkly-FwMLI/s320/mail.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;कॉमनवेल्थ गेम्स का और विदेशी मेहमानों का स्वागत करने के लिए अब 22 राज्यों के चित्रकारों ने अपनी दिलचस्पी दिखाई है। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ये कलाकार (पेंटर) सितम्बर के तीसरे सप्ताह में राजधानी पहुंचेंगे और इनके द्वारा बनाई गई कलाकृतियों की एक भव्य प्रदर्शनी ललित कला अकादमी की गैलरी में लगाई जाएगी। ’कंटेम्पोरेरी कट‘ शीषर्क से आयोजित होने वाली इस प्रदर्शनी में 22 राज्यों के 50 कलाकारों की ढाई सौ कलाकृतियों को शामिल किया गया है।&lt;br /&gt;इस प्रदर्शनी के आयोजक कलाकार श्रीकांत पाण्डेय ने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है, और इसे लेकर हर किसी में जिज्ञासा है। हर कोई अपने तरीके से इस गेम्स का वेलकम करना चाहता है। उन्होंने बताया की 22 सितम्बर से शुरू होने वाली इस प्रदर्शनी में के.आर सुब्बना, अमिताभ भौमिक, राजेन्द्र प्रसाद, मिलन देसाई, ईश्वर दयाल, वेद नायर, प्रेम सिंह, शंकर घोष, प्रणाम सिंह, रघु नेवरे, सुरेश शर्मा जैसे जाने-माने कलाकार शामिल है। प्रदर्शनी में शामिल कलाकृतियों में महिला पात्रों के जीवन के अलग-अलग रंगों व भावों की अनुभूतियां कैनवास पर देखने को मिलेगी। इसके अलावा भारतीय ग्रामीण परिवेश, जनजातीय सभ्यता, संस्कृति, तीजत् यौहार व अन्य देसी पहलुओं को करीब से जानने का मौका प्राप्त हो सकेगा। सभी कलाकार देश की इज्जत से जुड़े कॉमनवेल्थ गेम्स का स्वागत अपने तरीके से खुद के खर्चे पर कर रहे है। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-7333148184626427073?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/7333148184626427073/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/09/blog-post.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/7333148184626427073'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/7333148184626427073'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/09/blog-post.html' title='पेंटिंग्स से होगा विदेशी मेहमानों का स्वागत'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TH4zOuS4hiI/AAAAAAAAAE8/ZKkly-FwMLI/s72-c/mail.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-7021338053457091765</id><published>2010-08-30T21:19:00.000-07:00</published><updated>2010-08-30T21:28:18.235-07:00</updated><title type='text'>इंसानी हवस</title><content type='html'>आदमी ही है&lt;br /&gt;जिसकी अनंत इच्छाएं&lt;br /&gt;कभी पूरी नहीं होती&lt;br /&gt;एक के बाद एक इच्छाएं&lt;br /&gt;अनंत इच्छाओं में तब्दील होती जाती हैं&lt;br /&gt;और आदमी जुट जाता है&lt;br /&gt;अपनी इच्छाओं को पूरा करने में&lt;br /&gt;फिर वह&lt;br /&gt;आदमी नहीं,&lt;br /&gt;आदमी से शैतान बन जाता है&lt;br /&gt;शैतान का पेट&lt;br /&gt;नहीं भर सकता रोटी-दाल से&lt;br /&gt;इसलिए वह पेट भरने के लिए&lt;br /&gt;खाने लगता है&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;ईंट-पत्थर और लोहा- सीमेंट&lt;br /&gt;फिर भी नहीं भरता उसका पेट&lt;br /&gt;बढती जाती है उसकी भूख&lt;br /&gt;लूट जाता है उसका चैन व आराम&lt;br /&gt;क्यूँ की वह&lt;br /&gt;आदमी से बन चुका है शैतान।&lt;br /&gt;और शैतान को चाहिए&lt;br /&gt;पेट की आग भुझाने को खून&lt;br /&gt;जो  नहीं बिकता बाज़ार - हाट में&lt;br /&gt;बाज़ार में बिकता है इंसानी गोस्त&lt;br /&gt;जिसकी हो सकती है&lt;br /&gt;खरीद फ़रोख्त&lt;br /&gt;इसलिए शैतान&lt;br /&gt;करने लगता है जिस्म की तिजारत&lt;br /&gt;बढती ही जाती है उसकी हसरत&lt;br /&gt;भरने लगती है&lt;br /&gt;तिजोरी &lt;br /&gt;बढ़ने लगता है बैंक बैलेंस&lt;br /&gt;चढ़ने लगता है पैसे का नशा&lt;br /&gt;भूल  जाता है वह&lt;br /&gt;रिश्तो को&lt;br /&gt;रिश्तो की परिभाषा&lt;br /&gt;और  एक दिन&lt;br /&gt;शैतान उसी शैतानियत के हाथों&lt;br /&gt;बिक&lt;br /&gt;सरे बाज़ार नीलाम हो जाती है&lt;br /&gt;उसकी अपनी ही&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-7021338053457091765?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/7021338053457091765/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/08/blog-post_30.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/7021338053457091765'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/7021338053457091765'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/08/blog-post_30.html' title='इंसानी हवस'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-985883715711474029</id><published>2010-08-25T01:21:00.000-07:00</published><updated>2010-08-25T01:26:32.928-07:00</updated><title type='text'>आनंद विहार के ‘वर्ल्ड क्लास स्टेशन’ बनने में अड़चनें</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/THTTjjJi2pI/AAAAAAAAAEs/rEm5azaM8Ik/s1600/untitled.bmp"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5509260851865115282" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 126px" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/THTTjjJi2pI/AAAAAAAAAEs/rEm5azaM8Ik/s320/untitled.bmp" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;दस महीने पहले शुरू हो चुके आनं द विहार रेलवे स्टेशन को ‘वर्ल्ड क्लास स्टेशन’ बनाए जाने की कवायद तक शुरू नही हो पाई है। इसकी वजह अभी तक इसके लिए कंसल्टें ट का चयन नही होना बताया जा रहा है। इतना ही नही दूसरे चरण के लिए अभी तक टेंडर भी फाइनल नही हुआ है, जिसकी वजह से इस स्टेशन को वर्ल्ड क्लास स्टेशन का खिताब मिलना दूर की कौड़ी नजर आ रही है। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पहुंचने वाले यात्रियों की भीड़ को कम करने के लिए आनंद विहार रेलवे स्टेशन की शुरुआत की गई थी। पिछले दस महीने से इस स्टेशन से नियमित रूप से आधा दर्जन से अधिक ट्रेनों का परिचालन हो रहा है। इसके अलावा यहां से स्पेशल ट्रेनें भी चलाई जा रही है, लेकिन अभी तक इस स्टेशन पर बुनियादी सुविधाएं तक नही हैं। इसकी वजह से यहां पहुंचने वाले यात्रियों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति तब है, जब इस स्टेशन को वर्ल्ड क्लास स्टेशन बनाया जाना है। लेकिन समस्या यह है कि वर्ल्ड क्लास स्टेशन कैसा होगा, इसके बारे में बताने के लिए कंसल्टेंट का चयन उत्तर रेलवे ने नही किया है, जिसकी वजह से दूसरे फेज का काम ठप पड़ा है। दूसरे फेज का काम ठप पड़ने की वजह निर्माण कार्य के लिए ठेकेदार नही मिलना बताया जा रहा है।&lt;br /&gt;उत्तर रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी एएस नेगी के अनुसार दूसरे चरण के लिए जून में टेंडर जारी किया गया था, जिसके बाद लगभग 14 एजेसियो ने ठेका हथियाने के लिए टेडर भरा है। अभी इनमें से किसी एक का चयन नही किया गया है, लेकिन बहुत जल्द चयन कर लिया जाएगा। आनं द विहार रेलवे स्टेशन नियमित ट्रेनो का संचालन होता है। इसके अलावा कई स्पेशल ट्रेनो का संचालन भी इन्ही तीन प्लेटफामो से किया जा रहा है। शेष चार प्लेटफामो का निर्माण दूसरे फेज मे किया जाना था। पहले चरण के निर्माण मे रेलवे ने 85 करोड़ रुपए खर्च किए थे, जबकि दूसरे चरण में 145 करोड़ खर्च किया जाना है। सूत्रों के अनुसार अगर दूसरे चरण का काम शुरू भी हो जाता है, तो यह कौन बताएगा कि वर्ल्ड क्लास स्टेशन के लिए यहां कैसी सुविधा होनी चाहिए। इसलिए सबसे पहले तो कंसल्टेंट का चयन किया जाना है। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-985883715711474029?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/985883715711474029/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/08/blog-post_25.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/985883715711474029'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/985883715711474029'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/08/blog-post_25.html' title='आनंद विहार के ‘वर्ल्ड क्लास स्टेशन’ बनने में अड़चनें'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/THTTjjJi2pI/AAAAAAAAAEs/rEm5azaM8Ik/s72-c/untitled.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-5997215119241989057</id><published>2010-08-04T05:40:00.000-07:00</published><updated>2010-08-04T05:49:18.854-07:00</updated><title type='text'>गांधी के शांति संदेशों पर शोध को लगा ग्रहण</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TFlhoDrDnYI/AAAAAAAAAEc/gRj2xAT9NDY/s1600/untitled.bmp"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5501535760618331522" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 125px; CURSOR: hand; HEIGHT: 168px" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TFlhoDrDnYI/AAAAAAAAAEc/gRj2xAT9NDY/s320/untitled.bmp" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा दिए गए सत्य, अहिंसा और शांति के संदेशों पर शोध कराने की यूनेस्को व एमएचआरडी की मंशा पर ग्रहण लगता दिखायी पड़ रहा है। गांधी जयंती के अवसर पर गांधी दर्शन परिसर में महात्मा गांधी इंस्टीच्यूट फॉर एजुकेशन, पीस एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट (एमजीआईईपीएसडी) की स्थापना के अंतिम चरण में ऐन वक्त पर फंसे इस पेंच के कारण बड़ी धनराशि खर्च कर बनी योजना भी अधर में लटकती दिखाई पड़ रही है। दरअसल गांधी दर्शन ने इस प्रोजेक्ट के लिए अपने परिसर में जगह देने से मना कर दिया है। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस संस्थान की स्थापना का मामला अब प्रधानमंत्री कर्यालय के रुख पर ही निर्भर करता है। सूत्रों के अनुसार हाल ही में गांधी दर्शन समिति की हुई बैठक में उपाध्यक्ष व बापू की पौत्री तारा भट्टाचार्य ने एमजीआईईपीएसडी की स्थापना पर कुछ आपत्तियां जतायी थी। गांधी दर्शन में होने वाले किसी भी कार्यक्रम के लिए उपाध्यक्ष की सहमति आवश्यक होने के कारण उक्त संस्थान की स्थापना अब कठिन प्रतीत हो रही है। बताया जाता है कि तीन घंटे तक चली इस बैठक में गांधीवादियों के प्रतिनिधि व जानेमाने गांधीवादी डॉ. एसएन सुब्बाराव समेत इस प्रोजेक्ट से जुड़े लोग शामिल थे। सूत्रों के अनुसार लोगों के बार-बार समझाने के बाद भी वह इस प्रोजेक्ट को अपने यहां शुरू होने देने से मना करतीं रहीं। इस मामले को सुलझाने के लिए आईसीसीआर के चेयरमैन व एमजीआईईपीएसडी के एग्जिक्यूटिव मेम्बर डॉ. कर्ण सिंह कुछ दिन पहले व्यक्तिगत तौर पर तारा भट्टाचार्य से मिले थे, लेकिन वह भी उन्हें मनाने में नकाम रहे थे। सूत्रों के अनुसार तारा भट्टाचार्य को मनाने की कोशिश एचआरडी की सचिव विभा पूरी दास भी कर चुकी हैं। सूत्रों के अनुसार तारा भट्टाचार्य की अनुमति गांधी दर्शन की उपाध्यक्ष होने के नाते जरूरी है। लेकिन इस मामले में अंतिम फैसला प्रधानमंत्री को ही लेना होगा। क्योंकि वह इस संस्थान के अध्यक्ष हैं। अब संस्थान के समर्थक प्रधानमंत्री से गुहार लगाने का मन बना रहे हैं। बैठक में संस्थान की स्थापना पर सहमति न बन पाने की पुष्टि करते हुए जानेमाने गांधीवादी डॉ. एसएन सुब्बाराव ने राष्ट्रीय सहारा से विशेष बातचीत में कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गांधी के विचारों के प्रसार के उदे्श्य से स्थापित होने वाले इस संस्थान के निर्माण पर अड़चन आना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि इस मामले को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-5997215119241989057?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/5997215119241989057/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/08/blog-post_04.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/5997215119241989057'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/5997215119241989057'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/08/blog-post_04.html' title='गांधी के शांति संदेशों पर शोध को लगा ग्रहण'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TFlhoDrDnYI/AAAAAAAAAEc/gRj2xAT9NDY/s72-c/untitled.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-1275474751025557248</id><published>2010-08-01T00:03:00.000-07:00</published><updated>2010-08-01T00:09:18.127-07:00</updated><title type='text'>समय के पथ पर</title><content type='html'>समय के पथ पर/&lt;br /&gt;नीम का पेड़ भी सुख जाता है/&lt;br /&gt;शहर की हर गली बदल जाती है/&lt;br /&gt;समय के पथ पर/&lt;br /&gt;गाँव शहर में तब्दील हो जाता है/&lt;br /&gt;दिन महीने और महीने साल में बदल जाते है/&lt;br /&gt;समय के पथ पर/&lt;br /&gt;चेहरे की पहचान बदल जाती है/&lt;br /&gt;कहने का अंदाज बदल जाता है/&lt;br /&gt;समय के पथ पर/&lt;br /&gt;हम तुम बदल जाते है/&lt;br /&gt;रिश्तों के नाम बदल जाते है/&lt;br /&gt;समय के पथ पर/&lt;br /&gt;जीवन की सच्चाई समझ आ जाती है/&lt;br /&gt;हर बात पुरानी हो जाती है/&lt;br /&gt;समय के पथ पर/&lt;br /&gt;पल भर में सयाने हो जाते है/&lt;br /&gt;रिश्तों की बात समझ में आ जाती है/&lt;br /&gt;समय के पथ पर/&lt;br /&gt;हम तुम बदल जाते हैं/&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-1275474751025557248?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/1275474751025557248/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/08/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/1275474751025557248'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/1275474751025557248'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/08/blog-post.html' title='समय के पथ पर'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-9092707940341981587</id><published>2010-07-31T23:48:00.000-07:00</published><updated>2010-08-03T03:44:29.259-07:00</updated><title type='text'>माँ नहीं मरती</title><content type='html'>माँ तो कभी मरती ही नहीं है/&lt;br /&gt;वह जिन्दा रहती है/&lt;br /&gt;सांसो में/&lt;br /&gt;नशों में दौड़ती लहू में/&lt;br /&gt;उठती-झुकती पलकों में/&lt;br /&gt;हवाओ से खेलती लटो में/&lt;br /&gt;माँ जिन्दा रहती है/&lt;br /&gt;शब्दों में/&lt;br /&gt;हमारी भावनाओं में/&lt;br /&gt;दीवारों पर टंगी तस्वीरों में/&lt;br /&gt;पैंट में लगे पैबंद में/&lt;br /&gt;शर्ट के टूटे बटन में/&lt;br /&gt;माँ जिन्दा रहती है/&lt;br /&gt;उजाले में/&lt;br /&gt;शाम और रात के अँधेरे में/&lt;br /&gt;आती-जाती हवाओं में/&lt;br /&gt;आँगन में खिले फूलों में/&lt;br /&gt;तुलसी के पत्तो में/&lt;br /&gt;माँ जिन्दा रहती है/&lt;br /&gt;सांसों में/&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-9092707940341981587?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/9092707940341981587/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/07/blog-post_31.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/9092707940341981587'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/9092707940341981587'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/07/blog-post_31.html' title='माँ नहीं मरती'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-4231149524002234328</id><published>2010-07-27T01:35:00.000-07:00</published><updated>2010-07-27T01:41:35.727-07:00</updated><title type='text'>विदेशी आएंगे देश, हम जाएंगे परदेस</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TE6bptYUlQI/AAAAAAAAAEU/s8NCXJRn9uk/s1600/untitled.bmp"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5498503335924503810" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 96px; CURSOR: hand; HEIGHT: 320px" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TE6bptYUlQI/AAAAAAAAAEU/s8NCXJRn9uk/s320/untitled.bmp" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;जिस वक्त राजधानी में कॉमनवेल्थ गेम्स हो रहे होंगे उसी वक्त यहां के लोग विदेशों की सैर पर होंगे। लोगों ने टूर ऑपरेटरों से प्रोग्राम की बुकिंग भी करवानी शुरू कर दी है। यही नही अब तो आलम यह है कि थाईलैंड, मकाऊ व हांगकांग की सीटें अब लगभग फुल होने की स्थिति में है। दरअसल यह सब कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान एक साथ लगातार दो सप्ताह तक पड़ने वाली छुट्टियों के कारण हो रहा है। कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान राजधानी के लगभग सभी सरकारी व गैर सरकारी स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे। इसके अलावा सरकारी और गैर सरकारी महकमों में भी अवकाश रहने वाला है, जिसे देखते हुए टूर ऑपरेटरों के पास अभी से विदेश घूमने वालों ने बुकिंग करवानी शुरू कर दी है। डोमेस्टिक टूर ऑपरेटर के अध्यक्ष राकेश लाम्बा के अनुसार कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान एक साथ दो सप्ताह की छुट्टियां पड़ रही हैं, जिसमें लोग बाहर घूमने जाना चाहते है। लाम्बा के अनुसार डोमेस्टिक टूर महंगा होने से लोग अब विदेश जाना ज्यादा पसंद कर रहे है। इससे घरेलू पर्यटन को नुकसान तो है लेकिन यहां हवाई फेयर और होटलों का किराया इतना महंगा है कि लोग विदेश घूमना ही ज्यादा पसंद कर रहे है। लाम्बा के अनुसार खेल के दौरान विदेश जाने के लिए लोगों ने बुकिं ग शुरू करा दी है। इसके लिए टूर ऑपरेटरों ने पैकेज देना भी शुरू कर दिया है, जिसमें 20-25 हजार में एक व्यक्ति थाईलड में पांच रात और छह दिन घूम सकता है। इतना ही नही इसी कीमत में वह वहां खाना भी खा सकता है और साईट सीन भी देख सकता है। वही अगर कोई पां च दिनों के लिए गोवा घूमने जाना चाहता है तो उसे सिर्फ आने-जाने के लिए ही हवाई किराए के लिए 10 हजार रुपए चुकाने होंगे। इसके बाद पांच सितारा होटल में ठहरने के लिए अलग से 15-20 हजार रुपए देने होंगे। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-4231149524002234328?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/4231149524002234328/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/07/blog-post_27.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/4231149524002234328'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/4231149524002234328'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/07/blog-post_27.html' title='विदेशी आएंगे देश, हम जाएंगे परदेस'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TE6bptYUlQI/AAAAAAAAAEU/s8NCXJRn9uk/s72-c/untitled.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-27144836106458205</id><published>2010-07-20T21:24:00.000-07:00</published><updated>2010-07-20T21:26:05.891-07:00</updated><title type='text'>वेटिंग की ई-टिकट थमा देते है, कंफर्म नहीं होने पर पैसा भी नहीं वापस करते</title><content type='html'>रेल यात्रियों को एजेंट ई-टिकट (वेटिंग) की आड़ में चपत लगा रहे हैं। इन एजेंटो का मुख्य जोर प्रतीक्षा की ई-टिकट दिल्ली के बाहर के लोगों के हाथ बेचने की होती है जिससे कि टिकट के कन्फर्म नहीं होने की स्थिति में जरूरतमंद यात्रियों को पैसा वापस न करना पड़े। नई दिल्ली व पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन स्थित रिजेर्वेशन काउंटर पर हर वक्त टिकट बुक कराने वालों की लगने वाली भीड़ ने एजेंटों के लिए कमाई के द्वार खोल दिए हैं। घंटों कतार में खड़े होने से बचने के लिए दूसरे शहरों से आने वाले ये यात्री एजेंटों के पास पहुंचते है और उनके हाथों लूटने को मजबूर हो रहे हैं। यात्रियों को खुलेआम लूटने का यह धंधा नई दिल्ली व पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशनों के पास अवैध रूप से इंटरनेट के माध्यम से ई-टिकट बेचने वाले एजेंट कर रहे हंै।&lt;br /&gt;एजेंटो द्वारा यात्रियों को लूटने का तरीका ऊपरी तौर पर तो पूरी तरह से कानूनी लगता है लेकिन है यह गैर कानूनी। सूत्रों के अनुसार एजेंटों के पास जैसे ही कोई यात्री ई-टिकट के लिए आता है तो वह उनसे उसकी आईडी (पहचान पत्र) मांगते है और उसमें जब यात्री का पता राजधानी से सैकड़ों किलोमीटर दूर का लिखा होता है तो उससे वह दिल्ली आने जाने के बारे में जानकारी लेते है। जब एजेंट इस बारे में पूरी तरह से आश्वस्त हो जाता है कि वेटिंग ई- टिकट लेने वाला यात्री महीने भर में फिर दोबारा नही आने वाला है तो ऐसे यात्रियों को वह वेटिंग का ई-टिकट थमा देते है। जबकि नियमों के अनुसार इंटरनेट के माध्यम से लिया गया वेटिंग के ई-टिकट पर यात्रा नही किया जा सकता है। वहीं दूसरी ओर टिकट के कन्फर्म नही होने की स्थिति में आईआरसीटीसी की ओर से एजेंट के खाते में टिकट का पैसा वापस आ जाता है। जबकि दूसरे शहर में जा चुका यात्री न तो उस पैसे को पाने के लिए एजेंट के पास आता है और न ही उसकी शिकायत ही वह कही कर पाता है। जबकि आईआरसीटीसी का कहना है कि ऐसे एजेंटो की शिकायत के लिए बकायदा एक शिकायत प्रकोष्ठबना हुआ है। जिसमें यात्री शिकायत कर सकते हैं। इसके अलावा वह 139 पर भी फोन कर के अपनी शिकायत दर्ज करा सकते है और उनकी शिकायत पर फौरन कार्रवाई होती है। लेकिन उनके पास इस बात का कोई जवाब नही है कि ऐसे एजेंटों से बचने के लिए आईआरसीटीसी या रेलवे ने कभी कोई जागरूकता अभियान चलाया हो।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-27144836106458205?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/27144836106458205/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/07/blog-post_5507.html#comment-form' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/27144836106458205'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/27144836106458205'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/07/blog-post_5507.html' title='वेटिंग की ई-टिकट थमा देते है, कंफर्म नहीं होने पर पैसा भी नहीं वापस करते'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-1840778104391902596</id><published>2010-07-20T21:10:00.000-07:00</published><updated>2010-07-20T21:16:52.020-07:00</updated><title type='text'>ताजमहल का दीदार कराएगी कॉमनवेल्थ गेम्स एक्सप्रेस</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TEZ0nmaeznI/AAAAAAAAAEM/CCzqFQ2Qt28/s1600/untitled.bmp"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5496208618927607410" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 159px; CURSOR: hand; HEIGHT: 116px" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TEZ0nmaeznI/AAAAAAAAAEM/CCzqFQ2Qt28/s320/untitled.bmp" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;विदेशियों में ताज के प्रति क्रेज को देखते हुए भारतीय रेलवे ने इसे भुनाने की योजना बनायी है। योजना के मुताबिक कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान राजधानी में जुटने वाले विदेशी पर्यटकों को प्रेम के प्रतीक ताज के दीदार कराने के लिए विशेष ट्रेन चलायी जाएगी। पैलेस ऑन व्हील्स की तर्ज पर यह विशेष ट्रेन विदेशियों को दिल्ली से आगरा व आगरा से दिल्ली की सैर कराएगी। ट्रेन के किराए में आने-जाने का किराया व अन्य खर्च शामिल होगा। उत्तर रेलवे के एक वरिष्ठअधिकारी के अनुसार कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान (3 अक्टूबर से 14 अक्टूबर के बीच) यह विशेष ट्रेन चलायी जायेगी। इसके लिए उत्तर रेलवे उत्तर प्रदेश सरकार के साथ बातचीत कर रही है। जानकारी के अनुसार दिल्ली आने वाले 90 फीसद विदेशी मेहमानों की हसरत प्रेम का प्रतीक ताजमहल देखने की होती है और उनकी इस हसरत को पूरा करने के लिए नई दिल्ली से अगरा के बीच एक विशेष ट्रेन चलाये जाने की योजना है। &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;इंटरसिटी की तर्ज पर चलायी जाने वाली यह ट्रेन पूरी तरह से शताब्दी जैसी सुविधा से युक्त होगी। यह ट्रेन तड़के सुबह नई दिल्ली से आगरा के लिए चलेगी और उसी दिन देर शाम को आगरा से नई दिल्ली वापस पहुंचेगी। ट्रेन का किराया और उसके चलने और वापसी का समय अभी तय नही हुआ है। यह ट्रेन केवल खिलाड़ियों तथा खेल प्रतिनिधियों के लिए होगा। इस ट्रेन में इनके अलावा किसी अन्य के सफर करने की अनुमति नही होगी। इस विशेष ट्रेन में खिलाड़ियों और प्रतिनिधियों के लिए विशेष सुरक्षा के भी इंतजाम होंगे। जानकारी के अनुसार उत्तर रेलवे की योजना खेल के दौरान इस ट्रेन को नई दिल्ली और अगरा के बीच 10-11 फेरे चलाने की है। उत्तर रेलवे ने इस विशेष ट्रेन को चलाये जाने की मंजूरी का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड के पास भेजा है। उत्तर रेलवे के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी मनीष तिवारी ने कहा कि हां हमारी योजना नई दिल्ली और आगरा के बीच इस विशेष ट्रेन को चलाने की है और हमें उम्मीद है कि हम इसमें कामयाब होंगे &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-1840778104391902596?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/1840778104391902596/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/07/blog-post_20.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/1840778104391902596'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/1840778104391902596'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/07/blog-post_20.html' title='ताजमहल का दीदार कराएगी कॉमनवेल्थ गेम्स एक्सप्रेस'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TEZ0nmaeznI/AAAAAAAAAEM/CCzqFQ2Qt28/s72-c/untitled.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-5017665739395052430</id><published>2010-07-10T04:46:00.000-07:00</published><updated>2010-07-10T04:47:11.292-07:00</updated><title type='text'>600 करोड़ का नुकसान</title><content type='html'>महंगाई के विरोध में भाजपा और वाम दलों द्वारा आहूत भारत बंद का असर राजधानी के सभी थोक व खुदरा बाजारों पर देखने को मिला। थोक बाजारों के बंद होने से कम से कम छह सौ करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित हुआ जबकि इससे सरकार को लभगभ 65 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। राजधानी में पहली बार ऐसा हुआ है कि बंद में यहां के सभी छोटेबड़ े बाजारों की दुकानें पूरी तरह से बंद रही। यहां पर लगभग 300 छोटे-बड़े बाजार है जिनमें दुकानदारों की संख्या हजारों में है। थोक बाजारों के एसोसिएशनों के अनुसार सोमवार के बंद से व्यापारियों को लगभग 600 करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित हुआ है, जबकि सरकार को टैक्स के रूप में लाखों रुपए नुकसान उठाना पड़ा है। बंद में शामिल होने वाले थोक बाजारों के एसोसिएशनों में स्टील चैम्बर्स एसोसिएशन, पेपर मर्चेन्ट एसोसिएशन, ग्रेन मर्चेन्ट एसोसिएशन, हिन्दुस्तानी मार्केन्टाइल एसोसिएशन, दिल्ली इलेक्ट्रिकल एसोसिएशन, केमिकल मर्चेन्ट एसोसिएशन तथा खारी बावली किराना कमेटी से जुड़े कारोबारी शामिल थे। बाजार एसोसिएशनों के अनुसार राजधानी में प्रतिदिन लभगभ 600 करोड़ रुपए का कारोबार होता है जो बंद की वजह से पूरी तरह से ठप रहा। कारोबार ठप होने से सरकार को भी लाखों रुपए का नुकसान हुआ जो उसे टैक्स के रूप में मिलता है। पूरी तरह से बंद रहने वाले थोक बाजारों में चावड़ी बाजार, खारी बावली, नई सड़क, नया बाजार, चांदनी चौक, भागीरथ पैलेस, लाजपत राय मार्केट, तिलक बाजार, सदर बाजार, सरोजनी नगर, साउथ एक्स, लक्ष्मी नगर, तिलक नगर, कनाट प्लेस, शंकर मार्केट, कमला मार्केट, श्रद्धानंद मार्केट, ऑटो पार्ट्स मार्केट कश्मीरी गेट आदि पूरी तरह से बंद रहे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-5017665739395052430?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/5017665739395052430/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/07/600.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/5017665739395052430'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/5017665739395052430'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/07/600.html' title='600 करोड़ का नुकसान'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-8778589010438464328</id><published>2010-07-04T02:44:00.000-07:00</published><updated>2010-07-04T02:47:46.088-07:00</updated><title type='text'>मेरा पति नक्सली नहीं था’</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TDBYq78IirI/AAAAAAAAAEE/BwMYNcJTuV0/s1600/4720106380625-large%5B1%5D.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5489985440432294578" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 300px; CURSOR: hand; HEIGHT: 236px" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TDBYq78IirI/AAAAAAAAAEE/BwMYNcJTuV0/s320/4720106380625-large%5B1%5D.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;आं प्रदेश के आदिलाबाद में जिन दो नक्सलियों को पुलिस ने मारा है उनमें से एक की पहचान बबीता पाण्डेय ने अपने पति हेमचन्द्र पाण्डेय के रूप में की है। उन्होंने कहा कि आं पुलिस दावा कर रही है कि उसने नक्सली सहदेव को मारा है जबकि वहां के अखबारों में जो फोटो छपा है वह उनके पति हेमचन्द्र पाण्डेय की है। बबीता का दावा है कि हेमचन्द्र राजधानी में रह कर कुछ एक अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकारिता करते थे, लेकिन वह यह नही बता सकी कि हेमचन्द्र राजधानी में कहां रहते थे। उन्होंने कहा कि वह स्वयं हल्द्ववानी में रहती है। बबीता ने शनिवार को यहां प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में यह दावा किया। इस मौके पर बबीता का चचेरा भाई विजय वर्धन उप्रेती, समाजसेवी व दिल्ली विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के शिक्षक जीएन साईबाबा, राजीव लोचव शाह, आजादी बचाओ आंदोलन के नेता प्रोफेसर बनवारीलाल शर्मा आदि मौजूद थे। &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;अपने पति को एक ईमानदार स्वतंत्र पत्रकार बताते हुए बबीता ने कहा कि पुलिस ने आजाद के साथ मारे गए जिस व्यक्ति को सहदेव बता रही है वह दरअसल उसका पति हेमचन्द्र पाण्डेय है, जिसे पुलिस ने कहीं और मार कर अब मुठभेड़ का रूप दे रही है। बबीता ने कहा कि उसके पति दिल्ली में रहते थे और उन्होंने 30 जून को फोन करके कहा था कि वह दो दिनों के लिए नागपुर जा रहे हैं और 2 जुलाई की सुबह तक लौट आएंगे। 2 जुलाई को दो बजे तक उनका फोन नहीं आया तो उनके मोबाइल पर फोन किया लेकिन फोन स्विच ऑफ था। यह सिलसिला चार बजे तक चलता रहा। हम लोग चिंतित हो गए। लेकिन शनिवार (3 जुलाई) को इनाडू अखबार के पहले पेज पर आजाद के साथ जिस व्यक्ति की फोटो सहदेव के रूप में छपी है वह दरअसल सहदेव की न हो कर हेमचन्द्र पाण्डेय की है। उन्होंने कहा कि हेमचन्द्र को मारने वालों के खिलाफ कानून का सहारा लेंगे। &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;विजय वर्धन उप्रेती ने कहा कि पुलिस जिसे सहदेव बता रही है वह हेमचन्द्र पाण्डेय ही है। उन्होंने कहा कि हेमचन्द्र राजनीतिक आंदोलन से जुड़े थे और उनकी सहानुभूति समाज के प्रति थी। लेकिन विजय ने इस बात से इनकार किया कि उनका हेमचन्द्र से पिछले दो ढाई वषरे कोई संपर्क था। उन्होंने कहा कि पुलिस नक्सलवाद के नाम पर पत्रकारों और सामाजिक आंदोलनों से जुड़े लोगों को निशाना बना रही है। बनवारीलाल ने कहा कि हमें ऐसा लगता है कि हेमचन्द्र आजाद का साक्षात्कार लेना चाहते थे और इसी सिलसिले में वह आं प्रदेश गए होंगे। लेकिन यह जांच का विषय हो सकता है&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-8778589010438464328?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/8778589010438464328/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/07/blog-post_04.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/8778589010438464328'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/8778589010438464328'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/07/blog-post_04.html' title='मेरा पति नक्सली नहीं था’'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TDBYq78IirI/AAAAAAAAAEE/BwMYNcJTuV0/s72-c/4720106380625-large%5B1%5D.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-2154106006120608729</id><published>2010-07-03T03:42:00.000-07:00</published><updated>2010-07-03T03:47:36.904-07:00</updated><title type='text'>अब विदेशों में भी बात सिर्फ एक रुपए में</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TC8U4sQ7q1I/AAAAAAAAADU/Epwv-dNajuc/s1600/1120076590625-large%5B1%5D.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 138px; height: 228px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TC8U4sQ7q1I/AAAAAAAAADU/Epwv-dNajuc/s320/1120076590625-large%5B1%5D.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5489629434975333202" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;एमटीएनएल के उपभोक्ता दुनिया के छह प्रमुख देशों में एक रुपए प्रतिमिनट की दर से अपने परिचितों से बातचीत कर सकेंगे। इसके अलावा उपभोक्ताओं को सात देशों में बात करने के लिए तीन रुपए और 13 अन्य देशों में 5 रुपए प्रतिमिनट खर्च करने होंगे। घटी हुई दरें एक जुलाई से लागू हो जाएंगी। यह सुविधा तीन माह तक के लिए है इसके बाद उपभोक्ताओं की मांग के अनुसार इसमें बदलाव किया जाएगा। इस बात की जानकारी एक संवाददाता सम्मेलन में एमटीएनएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कुलदीप सिंह ने दी। इस मौके पर दिल्ली सर्किल के ईडी मनजीत सिंह, अनिता सोनी (निदेशक वित्त), एके भार्गव (सीजीएम, डब्ल्यूएस) आदि मौजूद थे। कुलदीप सिंह ने कहा कि एमटीएनएल के 25 वर्ष पूरा करने पर अपने जीएसएम/2जी व 3जी मोबाइल उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय कॉलें महज एक से पांच रुपए में करने की सौगात दे रहे है। उन्होंने बताया कि एक रुपए प्रतिमिनट में एमटीएनएल मोबाइल उपभोक्ता कनाडा, यूएसए, चीन, थाइलड, हांगकांग एवं सिंगापुर में बात कर सकेंगे। जबकि अर्जेंटीना, बहरीन, साइप्रस, जार्डन, दक्षिण कोरिया, मलेशिया तथा स्वीडन बात करने के लिए उसे प्रतिमिनट तीन रुपए देने हों गे। आस्ट्रेलिया, आस्ट्रिया, बांग्लादेश, कोलम्बिया, इंडोनेशिया, ईराक, रूस, ताइवान, उजबेकिस्तान तथा वियतनाम आदि देशों में बात करने के लिए उपभोक्ताओं को प्रतिमिनट 5 रुपए चुकाने होंगे। श्री सिंह ने कहा कि जिन 26 देशों के साथ बातचीत करने के शुल्क में कमी की गई है अब से पहले वहां बात करने के लिए उपभोक्ताओं के प्रतिमिनट 18 रुपए लगते थे। उन्होंने बताया कि हमने इस योजना को तीन माह के लिए लागू किया है बाद में उपभोक्ताओं की मांग के अनुसार इसमें बदलाव किया जाएगा। दिल्ली सर्किल के ईडी मनजीत सिंह ने कहा कि दिल्ली व एनसीआर के इंटरनेट उपभोक्ताओं के लिए बहुत जल्द 1799 रुपए में 3जी डाटा कार्ड जारी किया जाएगा। कार्ड से प्रतिमाह 10 जीबी डाटा डाउनलोड कर सकेंगे लेकिन यह सुविधा केवल दो माह के लिए होगी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-2154106006120608729?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/2154106006120608729/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/07/blog-post_1854.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/2154106006120608729'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/2154106006120608729'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/07/blog-post_1854.html' title='अब विदेशों में भी बात सिर्फ एक रुपए में'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TC8U4sQ7q1I/AAAAAAAAADU/Epwv-dNajuc/s72-c/1120076590625-large%5B1%5D.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-2144188511244394536</id><published>2010-07-03T03:37:00.000-07:00</published><updated>2010-07-03T04:08:01.765-07:00</updated><title type='text'>एमटीएनएल लैडलाइन नेटवर्क पर होंगी फ्री बातें</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TC8Z5Q0jrDI/AAAAAAAAADk/fWvAqifha8c/s1600/k1377050%5B1%5D.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 170px; height: 128px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TC8Z5Q0jrDI/AAAAAAAAADk/fWvAqifha8c/s320/k1377050%5B1%5D.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5489634942346570802" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;महंगाई की मार से हलकान दिल्लीवासियों को एमटीएनएल के लडलाइन फोन से 60 रुपए के अतिरिक्त शुल्क में एमटीएनएल से एमटीएनएल बेसिक व मोबाइल पर अनलिमिटेड बात करने की सौगात देगा। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो उपभोक्ताओं को यह सुविधा इसी माह से मिलने लगेगी। प्रयोग के तौर पर अभी यह योजना कश्मीरी गेट स्थित आटो पार्ट्स दुकानदारों के बीच चल रही है। एमटीएनएल द्वारा इस सुधिवा के शुरू होने से राजधानी में स्थित उसके 15 लाख लडलाइन उपभोक्ता को फायदा होगा। इस सुविधा को शुरू किए जाने की पुष्टि एमटीएनएल के ईडी मनजीत सिंह ने दी है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में लोग लैंडलाइन से बहुत कम फोन कर रहे हैं। ऐसे में लोगों को अब घर में रखा फोन बेकार लग रहा है। इसलिए हम अब ऐसे फोन धारकों को फोन का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने के लिए महज 60 रुपए अतिरिक्त में दिल्लीभर में स्थित अपने लडलाइन व मोबाइल फोन पर असिमित बात करने की सुविधा देने की योजना बना रहे हैं। इस सुविधा के शुरू होने से न केवल लोग लडलाइन का इस्तेमाल ज्यादा करेंगे बल्कि वह अन्य नेटर्वकों पर भी लडलाइन से बात करेंगे। ऐसे में फायदा हमें ही होगा। उन्होंने कहा कि इस सेवा को बहुत जल्द शुरू किया जाएगा। राजधानी में एमटीएनएल के कुल उपभोक्ताओं की संख्या 23 लाख के आसपास है.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-2144188511244394536?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/2144188511244394536/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/07/blog-post_03.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/2144188511244394536'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/2144188511244394536'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/07/blog-post_03.html' title='एमटीएनएल लैडलाइन नेटवर्क पर होंगी फ्री बातें'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TC8Z5Q0jrDI/AAAAAAAAADk/fWvAqifha8c/s72-c/k1377050%5B1%5D.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-6132537845028087784</id><published>2010-07-03T03:19:00.000-07:00</published><updated>2010-07-03T03:58:10.015-07:00</updated><title type='text'>अमूल दूध कल से महंगा</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TC8Xn5TSayI/AAAAAAAAADc/BNBF2105BBo/s1600/27201017290140-large%5B1%5D.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 106px; height: 97px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TC8Xn5TSayI/AAAAAAAAADc/BNBF2105BBo/s320/27201017290140-large%5B1%5D.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5489632444951980834" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;राजधानी में रविवार (4/7/10) से अमूल गोल्ड (फुल क्रीम) दूध दो रुपये प्रतिलीटर महंगा हो जाएगा। दूध की कीमतों में यह बढ़ोतरी पिछले छह महीने में दूसरी बार हुई है। इससे पहले अमूल ने इस साल फरवरी में दूध की कीमतों में एक से दो रुपये तक की बढ़ोतरी की थी। अमूल ने फिलहाल यह बढ़ोतरी सिर्फ फुलक्रीम दूध में की है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में टोंड दूध की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। बढ़ोतरी के बाद रविवार से अमूल गोल्ड दूध 32 रुपये प्रति लीटर हो जाएगा। रविवार से दिल्लीवासियों को अपने बच्चों को दूध पिलाने के लिए भी सोचना पड़ेगा। अभी पिछले सप्ताह ही पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने लोगों का बजट बिगाड़ कर रख दिया है। अब रही सही कसर दूध की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने पूरी कर दी है। अमूल ने शुक्रवार को रविवार से अपने गोल्ड ब्रांड दूध की कीमतों में प्रतिलीटर दो रुपये बढ़ोतरी किए जाने की घोषणा की। राजधानी में अमूल दूध की खपत लगभग 10 लाख लीटर प्रतिदिन है। जबकि पहले स्थान पर मदर डेयरी और दूसरे स्थान डीएमएस का दूध है। अमूल द्वारा दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद माना जा रहा है कि अगले दो एक दिनों में मदर डेयरी और डीएमएस भी अपने दूध की कीमतों में इजाफा किए जाने की घोषणा कर सकते हैं, क्योंकि अब तक अमूल दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद ही यह दोनों दूध आपूर्तिकर्ता अपनी कीमतें बढ़ाते रहे है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-6132537845028087784?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/6132537845028087784/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/07/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/6132537845028087784'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/6132537845028087784'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/07/blog-post.html' title='अमूल दूध कल से महंगा'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TC8Xn5TSayI/AAAAAAAAADc/BNBF2105BBo/s72-c/27201017290140-large%5B1%5D.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-7397589384236004251</id><published>2010-06-25T03:49:00.000-07:00</published><updated>2010-06-25T04:00:07.262-07:00</updated><title type='text'>कॉमनवेल्थ गेम्स : बनने थे 60 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन, बने सिर्फ 13</title><content type='html'>कॉमनवेल्थ गेम्स तक मौसम विभाग को राजधानी के मौसम पर रखने के लिए गेम्स से पहले 60 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (ए डब्ल्यूए स) स्थापित करने थे लेकिन फंड की कमी के कारण अभी तक केवल 13 डब्ल्यूए स ही स्थापित किए गए हैं। जबकि गेम्स में महज सौ दिन दिन बचे हैं, और इतने कम समय में किसी भी हालत में 47 ए डब्ल्यूए स स्थापित नहीं किया जा सकता है। ए ेसे में अगर खेल के दौरान मौसम ‘विलेन’ बन जाए तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। गेम्स के दौरार मौसम की वजह से खेल में कोई खलल न पड़े इसके लिए मौसम विभाग ने राजधानी व ए नसीआर में 60 आटोमेटिक वेदर स्टेशन (ए डब्ल्यूए स) स्थापित किये जाना था, लेकिन फंड की कमी की वजह से इसमें से अभी तक सिर्फ 13 ए डब्ल्यूए स ही स्थापित किये जा सके हैं। मौसम विभाग ने कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान मौसम की सटिक और पल-पल की जानकारी देने के लिए सालभर पहले दिल्ली और आसपास के इलाके में कुछ 60 ए डब्ल्यूए स स्थापित किये जाने की योजना तैयार की थी। इसके लिए उसने तैयारी भी शुरू कर दी थी। लेकिन उसकी रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खेल होने में महज सौ दिन बचे है आंैर उसने अभी तक 60 में से केवल 13 ए डब्ल्यूए स ही दिल्ली और ए नसीआर में स्थापित किये है। इतने कम ए डब्ल्यूए स के सहारे वह मौसम की सटिक जानकारी गेम्स आयोजन समिति और विदेशी मेहमानों को कैसे मुहैया करा पायेगी यह न तो मौसम वैज्ञानिकों को समझ में आ रहा है और न ही विभाग के अधिकारियों को ही। मौसम विभाग के डायरेक्टर जेनरल वीपी वर्मा के अनुसार योजना तो 60 ए डब्ल्यूए स लगाने की थी और हमने अभी तक 13 ए डब्ल्यूए स लगाये है। जिनमें से 10 दिल्ली में और 2 ए नसीआर में लगाये गए है। ए क पहले से लगा हुआ है। इसके अलावा मौसम की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिख पालम में ए क ए स बैंड का रडार लगाया गया है। इसके अलावा पश्चिमी विक्षोभ पर नजर रखने के लिए जयपुर में सी बैंठ का ए क रडार लगाया जायेगा। इस रडार से राजस्थान की आ॓र से आने वाली हवाओं पर नजर रखी जाए गी। क्योंकि उस आ॓र से होकर आने वाली हवाए दिल्ली की फिजा को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। मौसम विभाग के वैज्ञानिकों के अनुसार राजधानी अलग-अलग इलाके का तापमान अलग-अलग होता है। कई बार तो राजधानी के कुछ ए क इलाके में झमाझम बारिश हो जाती है और मौसम विभाग को इसकी भनक तक नही होती है। इसकी वजह यह होती है कि उस इलाके में मौसम विभाग का मौसम मापक यंत्र नहीं होता है या है भी तो मैन्यूल होने की वजह से वहां की जानकारी तुरंत मुख्यालय तक नहीं पहुंच पाती है। अगर यहीं स्थिति कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान बनती है तो यकीनन फजीहत होनी तय है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-7397589384236004251?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/7397589384236004251/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/06/60-13.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/7397589384236004251'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/7397589384236004251'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/06/60-13.html' title='कॉमनवेल्थ गेम्स : बनने थे 60 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन, बने सिर्फ 13'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-7179339458023288551</id><published>2010-06-25T03:47:00.000-07:00</published><updated>2010-06-25T03:48:32.665-07:00</updated><title type='text'>कॉमनवेल्थ गेम्स 100 दिन शेष कब शुरू होगी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रिहर्सल</title><content type='html'>कॉमनवेल्थ गेम्स शुरू होने में महज सौ दिन बचे हैं और कई ए ेसे कार्यक्रम हैं, जिनकी शुरूआत तक अभी नही हुई है। इन कार्यक्रमों में उस दौरान राजधानी में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शामिल हैं। इनमें लोक नृत्य-संगीत के अलावा भारतीय शास्त्रीय नृत्य-संगीत, थिए टर, फाइन आटर्स व क्राफ्ट् आदि से लेकर फिल्म शो तक के कार्यक्रम आयोजित होने हैं। इनमें सबसे ज्यादा रिहर्सल वैसे कार्यक्रमों को चाहिए , जिनमें कलाकारों का ग्रुप शामिल है। जानकारी के अनुसार गेम्स के दौरान राजधानी पहुंचने वाले विदेशी मेहमानों को भारतीय कला-संस्कृति से रूबरू कराने के लिए दर्जन भर सांस्कृतिक कार्यक्रम किये जाने हैं। इनका आयोजन दिल्ली सरकार विभिन्न अकादमियों के सहयोग से करेगी, जिनमें हिन्दी, पंजाबी, उर्दू, मैथिली भोजपुरी, सिंधी अकादमियों के अलावा साहित्य कला परिषद आदि शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार गेम्स के दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा कागजों में तो तैयार हो चुकी है लेकिन हकीकत से अभी यह कोसों दूर है। गेम्स के दौरान अंग्रेजों से लेकर देश के आजाद होने तक की कहानी को बयां करने वाले नाटक का रिहर्सल तक अभी शुरू नहीं हुई है, जबकि इस तरह के नाटकों को तैयार करने में तीन महीने से भी अधिक का वक्त लगता है। अब तक यह भी तय नहीं हुआ है कि राजधानी के किस हिस्से में कौन सा कार्यक्रम और किस दिन आयोजित किया जाए गा। कार्यक्रमों के आयोजन की जिम्मेदारी निभाने वाली लभगभ सभी अकादमियों के प्रमुखों की ए क ही जबाव है कि अभी वह कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं है। यही स्थिति सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन से जुड़े अन्य अधिकारियों की भी है। वही दूसरी आ॓र सूत्र बताते है कि कुछ ए क अकादमियों ने तो अभी तक उन कलाकारों का चयन तक नहीं किया है जिन्हें गेम्स के दौरान कार्यक्रम पेश करना है। कला और संस्कृति से जुड़े कुछ वरिष्ठ कलाकारों का कहना है कि अगर सरकार विदेशी मेहमानों के सामने भारतीय कला और संस्कृति को सही तरीके और प्रभावशाली ढ़ंग से पेश करना चाहती है तो उसे इसकी तैयारी (रिहर्सल) अभी से शुरू कर देनी चाहिए । क्योंकि कई कार्यक्रम ए ेसे होते हैं जिनमें दो तीन से ज्यादा कलाकार होते है। ए ेसे कार्यक्रमों की सफलता ज्यादा से ज्यादा रिहर्सल पर ही टिकी होती है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-7179339458023288551?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/7179339458023288551/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/06/100.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/7179339458023288551'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/7179339458023288551'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/06/100.html' title='कॉमनवेल्थ गेम्स 100 दिन शेष कब शुरू होगी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रिहर्सल'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-2252277183546955340</id><published>2010-05-27T08:27:00.001-07:00</published><updated>2010-05-27T08:27:58.066-07:00</updated><title type='text'>कॉमनवेल्थ गेम्स में साहित्य का तड़का</title><content type='html'>नई दिल्ली। यदि भाषा वाध्यता के चलते आपने नाईजिरियाई सिमांडा अडिची की ‘द थिंग अराउंड योर नेक’, घाना की लेखिका आयशा हारूना अट्टा की ‘हरमैटन रेन’, सामोवा के लेखक अल्बर्ट वेंडि्ट की ‘द एडवेंचर ऑफ वेला’ के पढ़ने का आनंद नही ले पाए हैं तो अब परेशान होने की जरूरत नही है। आपकी इस समस्या का समाधान करने के लिए हिन्दी अकादमी सामने आयी है। अकादमी कॉमनवेल्थ देशों के साहित्यकारों व उनकी रचनाओं को हिन्दी में प्रकाशित करने की तैयारियों में जुट गयी है। इस योजना के पीछे अकादमी का उद्देश्य सभी सदस्य देशों को साहित्यिक रूप से एक दूसरे के निकट लाना है। कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान हिन्दी अकादमी अपनी त्रैमासिक पत्रिका ‘इंद्रप्रस्थ भारती’ का एक विशेष अंक प्रकाशित करने वाली है। इस विशेष अंक में कॉमनवेल्थ देशों के लोकप्रिय (मैग्सेसे, बुकर, नोवेल व उन देशों के राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित) लेखकों की कृतियों व उनके साक्षात्कार हिन्दी में प्रकाशित किए जाएंगे। इसके अलावा भारतीय साहित्य व साहित्यकारों से विशेष जुड़ाव रखने व अपनी भाषा में इन्हें बढ़ावा देने वाले विदेशी रचनाकारों को भी इस अंक में शामिल किया जाएगा। अकादमी के सचिव रवीन्द्र नाथ श्रीवास्तव ने बताया कि कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान प्रकाशित होने वाले इस विशेष अंक में उन विदेशी साहित्यकारों को भी शामिल किया जाएगा जिन्होंने साहित्य के विकास में सैद्धांतिक योगदान दिया है। इसके अलावा उन साहित्यकारों को भी शामिल किया जाएगा जिन्होंने किसी सांस्कृतिक सिद्धांत का प्रतिपादन किया हो या इसमें सहयोग दिया हो। रवीन्द्र नाथ श्रीवास्तव ने कहा कि उन देशों में जहां भारतीय भाषाएं बोलचाल में तो प्रयोग की जाती है लेकिन लिपी के रूप में किसी अन्य भाषा का प्रयोग किया जाता है, उन्हें भी वास्तविक पहचान दिलाने की पहल इस पत्रिका के माध्मय से की जाएगी। पत्रिका का उद्देश्य ऐसे साहित्यकारों को ढूंढकर भारतीय भाषाओं में साहित्य रचने के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि नोवेल पुरस्कार विजेता वीएस नायपाल के साक्षात्कार के साथ-साथ उनके जैसे अन्य साहित्यकारों को इस विशेष अंक में विशेष स्थान दिया जाएगा। इसके लिए विदेशी भाषाओं के विशेषज्ञों की टीम बनायी गयी है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-2252277183546955340?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/2252277183546955340/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/05/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/2252277183546955340'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/2252277183546955340'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/05/blog-post.html' title='कॉमनवेल्थ गेम्स में साहित्य का तड़का'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-9027157785300324263</id><published>2010-04-07T00:33:00.000-07:00</published><updated>2010-04-07T00:35:03.307-07:00</updated><title type='text'>57 फीसद ब्याज वसूलने की जानकारी रिजर्व बैंक को नहीं</title><content type='html'>आम आदमी को साहूकारों के चंगुल से बचाने के लिए सरकार बैंकों से लोन लेने की बात करती है लेकिन उसे यह नहीं मालूम कि निजी बैंक साहूकारों से दो कदम आगे निकल चुके हैं। निजी बैंक दिए गए लोन पर सलाना 58 फीसद तक ब्याज वसूल रहे हैं। इसकी जानकारी न तो रिजर्व बैंक को है और न ही प्रधानमंत्री कार्यालय और वित्त मंत्रालय को। इस बात का खुलासा एक आरटीआई में हुआ है। कन्हैया लाल नामक शख्स ने आईसीआईसीआई से 2006 में 35 हजार 900 रूपए का लोन लिया था, जिस पर बैंक ने 48.1 फीसद की दर से ब्याज वसूला। इसके बाद उन्होंने इंडिया बुल्स बैंक से 18 हजार का लोन लिया, जिस पर बैंक ने 57.22 फीसद ब्याज मांगा, जिसे उन्होंने देने से मना कर दिया। इस मामले में उन्होंने आरटीआई दायर कर रिजर्व बैंक से यह जानकारी मांगी कि कोई बैंक कितना ब्याज वसूल सकता है। कन्हैया लाल ने दिसम्बर 2007 को आरटीआई दायर कर प्रधानमंत्री कार्यालय से भी यही जानकारी मांगी। पीएमआ॓ ने श्रीलाल को जानकारी मुहैया कराने के लिए आरबीआई को पत्र लिखा। आरबीआई ने पत्र संख्या आरआई 5736/07.05.01/2007-08 (दिनांक 04/02/08) के माध्यम से कहा की पर्सनल लोन पर आईसीआईसीआई बैंक द्वारा वसूले जा रहे ब्याज के बारे में उसके पास कोई जानकारी नहीं है। कन्हैया लाल ने आरबीआई से यह भी जानना चाहा है कि जब उसने 16 नवम्बर 2006 के अपने पत्र में कहा कि ग्राहकों के शोषण के मामले प्राइवेट बैंक आगे हैं, यदि यह सही है तो फिर आईसीआईसीआई बैंक के सीईआ॓ केवी कामत को पद्मश्री पुरस्कार देने का निर्णय किसने लिया? उन्होंने यह भी जानना चाहा कि आईसीआईसीआई और इंडिया बुल्स बैंक सरकार को कितना आयकर चुकाते हैं। इन दोनों सवालों के जवाब में भी आरबीआई ने चुप्पी साध ली। कन्हैया लाल ने मनमानी ब्याज वसूलने के बारे में प्रधानमंत्री कार्यालय में भी आरटीआई दायर कर जबाव मांगा, जिसे प्रधानंमत्री कार्यालय ने पत्र संख्या आरटीआई/925/2007-पीएमए के माध्यम से भारत सरकार के वित्त सेवा विभाग को प्रेषित कर दिया। कन्हैया लाल ने इन दोनों बैंकों द्वारा उपभोक्ताओं से बेतहाशा ब्याज वसूले जाने की शिकायत राष्ट्रपति के अलावा उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, वित्त मंत्रालय, रिजर्व बैंक, बैंकिंग लोकपाल समेत लगभग तीन दर्जन से अधिक विभागों और अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं लेकिन पिछले लगभग चार वर्षो में उन्हें कहीं से संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। कन्हैया लाल ने हार नहीं मानी है और पूरे मामले को कोर्ट में ले जाने का मन बनाया है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-9027157785300324263?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/9027157785300324263/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/04/57.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/9027157785300324263'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/9027157785300324263'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/04/57.html' title='57 फीसद ब्याज वसूलने की जानकारी रिजर्व बैंक को नहीं'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-6854392860318873624</id><published>2010-03-23T08:28:00.000-07:00</published><updated>2010-04-20T01:51:46.535-07:00</updated><title type='text'>लड़की होने का दर्द</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/S81rBaw2qYI/AAAAAAAAADM/_CbmN_CQKsc/s1600/1613332%5B1%5D.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 219px; height: 320px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/S81rBaw2qYI/AAAAAAAAADM/_CbmN_CQKsc/s320/1613332%5B1%5D.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5462139595178551682" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;अपनी इच्छाओं और सपनों को ध्वस्त होते मैं देखती रही थी, मूक दर्शक की तरह। यौवन की दहलीज पर कदम रखते ही हरेक लड़कियों की तरह मेरे भी कुछ अरमान दिल में हिलोरे लेने लगे थे। मैने भी अपने जीवन साथी की ए क धुंधली से तस्वीर अपने मन-मंदिर में बिठायी थी। ए कांत में अक्सर उस सपने के राजकुमार के ख्यालों में खो जाती थी। और जब सपना टूटता तो सोचती काश यह सपने सच होते। पर सपने तो सपने होते हैं, वो तो आंख खोलते ही पानी की बूंद के बुलबुले की तरह खत्म हो जाते हैं। मेरी अधिकतर सखियों की शादी हो चुकी थी शेष चंदा और रूपा ही बची थी, उनकी भी शादी तय हो चुकी थी। सभी सखियों का ससुराल अच्छा मिला था और उनके सपने का राजकुमार हकीकत के राजकुमार से अधिक मिलता जुलता हुआ था। वहीं मेरे सारे सपने आज टूट गये हैं। ए क कांच के घर की तरह जो समय की आंधी को भी नहीं सह सका और धूल में मिल गया। अपनी शादी की बात सुनकर मै कितनी खुश हुई थी। लगा था जैसे मेरा सपना अब सच होने वाला है। पर यह खुशी कु़छ ही पलों की थी। लोगों के मुंह से अपने होने वाले जीवन साथी के बारे में इस तरह(?) की बातें सुनकर। सारे सपने ए क वर्फ के टुकड़े की तरह सच्चाई की गर्मी से पिघल गये और शेष रह गया जमीन पर कीचड़ ही कीचड़। लगा जैसे मैं अपने ही परिवार के ऊपर आज तक बोझ थी और मेरी मां उस बोझ को उतार फेंकना चाहती थी और आज शायद वह अपने इस बोझ को उतार फेंकने में कामयाब भी हो गयी थीं। उसके इस कार्य में अस्पष्ट रूप से मेरे प्रिय भाई बबलू का भी पूरा-पूरा सहयोग था। मैं अच्छी तरह जानती थी कि अगर मेरा भाई चाहेगा ता उस जगह मेरी शादी नहीं होगी, पर वह भी शायद मुझे मेरी मां की तरह अपने घर से निकाल फेंकना चाहता था कूड़े करकट की तरह। इसका जिम्मेदार मैं बबलू को नहीं मानती, क्योंकि जब जननी ही मुझे अपने घर में शरण देना नही चाहती तो वह तो भाई था। अब सोचतीं हूं तो आंखों से आंसू नहीं थमते। पापा जब जिन्दा थे तो मेरी ए क मांग को पूरा करने के लिए क्या से क्या नहीं कर देते थे। मुझे अब भी अच्छी तरह याद है, मै अक्सर रूठ जाया करती थी तब पापा अपनी गोद में उठाकर मुझे मनाते थे, और घर के सभी लोगों को डांटते थे की कोई मेरे बेटे को कुछ नहंी कहेगा। पापा मुझे पूना बेटा कहकर बुलाते थे। पूना इसलिए की मेरा जन्म पूना शहर में हुआ था। जब तक पापा जिन्दा थे तब तक कभी भी मुझे किसी भी तरह की तकलीफ न होने दी और न ही कभी ए क पल भी उदास होने दिया। मेरी हर अच्छी बुरी मांगों को पापा ने पूरा किया। मेरी मां शुरू से ही मुझसे कुछ उखड़ी-उखड़ी सी रहती थी। जैसे मैं उनकी बेटी ही नहीं हूं। मै मम्मी के इस नाराजगी का कारण जानने की बहुत कोशिश करती रही पर कभी सफल न हो सकी। पापा के रहते हुए यह मेरी पहली असफलता थी। जिसकों मै चाह कर भी नहीं जान पायी थी। पापा को गुजरे आज पूरे पांच वर्ष बीत चुके हैं। इन पांच वर्षाे में अपने पापा की लाडली पूनम (पूना) अपने ही भाई-बहनों और मां की आंख की किरकिरी बन गई है। मां की तरह ही मेरा भाई बबलू मुझे ए क बकरी की तरह शादी के बहाने दूल्हे रूपी कसाई के हाथों बेंच देना चाहता था। कभी-कभी इच्छा होती कि अपने भाई से कहूं कि क्या तुम मेरे राखी का यही बदला चुका रहे हो? पर शर्मे के मारे चुप रह जाती थी। तब लगता था कि ए क लड़की कितनी बेवस होती है। उसकी इच्छाए ं कोई मायने नहीं रखती। न ही पिता के घर में न ही पति के घर में। दोनो ही घरों में वह केवल ए क काम करने वाली नौकरानी के रूप में ही इस्तेमाल होती रहती है। मेरी सहेली रूना की शादी इस साल होने वाली है। उसके लिए कितने ही लड़कों को देखा गया पर रूना हर लड़के में कोई न कोई खामी निकाल कर उसे नापसंद कर देती थी। हम सखियां जब उससे इस तरह से हर लड़के को नापसंद करने का कारण पूछती थी तो वह कितना ढिठाई से कहती ती कि जीवन तो मुझे गुजारना है उस लड़के के साथ और अगर मेरे मनपसंद का लड़का नहीं होगा तो मै कैसे उसके साथ अपनी जिन्दगी गुजारूगीं? रूना की इस तरह की बातों पर उसे कितना भला-बुरा हम सभी सखियां कहती थी। मेरी तो शर्म के मारे बुरा हाल हो जाता। रूना के इस तरह की बातें करने पर गांव वाले भी उसे संदेह की नजरों से देखते थे। गांव की बूढ़ी औरतें तो यह भी कहती थी कि यह फला लड़के से फंसी है और इस तरह की न जाने कितनी ही बातें रूना के बारे में आये दिन सुनने को मिलती थी। लेकिन ए क दिन रूना की शादी ए क अच्छे पढ़े-लिखे लड़के के साथ हुई, जिसके साथ वह मजे से जीवन गुजार रही है। आज जब अपने साथ होते हुए इस अन्याय को देखती हूं तो सोचती हू कि क्यों नही मै भी रूना की तरह हुई। क्यों नहीं मैं भी बेशर्म हो गई। अगर उस समय मै रूना की तरह बेशर्म हो गयी होती तो आज इस तरह से घुट-घुट कर जीना तो नहीं पड़ता। मै बचपन से ही जिद्दी किस्म की लड़की थी और मेरी सारी जिद को पापा ने पूरा किया था। आज इस शादी के शुभ अवसर पर पापा की याद आती है। मन करता है कि उड़कर पापा के पास जली जाऊं और उनकी गोद में छुप कर पूछूं कि क्या पापा आपकी बेटी इस लड़के के साथ सुखी जीवन गुजार सकती है? क्या आपने मुझे इसी दिन के लिए इतना बडा किया था? क्यों नहीं आपने मुझे मेरे पैदा होते ही गला घोंट कर मार दिया। अगर उस समय मेरी जीवन लीला समाप्त कर दिये होते तो आज आपकी लाडली बेटी को यह दिन नहीं देखना पड़ता और मैं फूट-फूटकर रोने लगी थी। बहुत देर तक रोती रही न जाने कब तक। आंख खुली तो सुबह की रोशनी चारों तरफ फैल चुकी थी। रोशनी में आंख खोला नहीं जा रहा था, लगता था जैेसे यह आंखे अंधेरे को सहने की आदी हो गयी हैं। मेरे पैदा होने के बाद मेरे घर में बहुत मन्नतों के बाद बबलू का जन्म हुआ था। उसके जन्म पर पापा ने पैसे को पानी की तरह बहा दिया था। हम चार बहनों के बाद बबलू पैदा हुआ था। पापा ने गांव में अष्टजाम करवाया था। गांव में धूम मच गयी थी। दादी ने मेरी पीठ पर लड्डू फोड़ी थी। सभी का मानना था कि मेरे पैदा होने से ही बबलू का जन्म हुआ है। उस समय परिवार के लिए लक्की थी, जिसके कारण मेरी हर अच्छी-बुरी इच्छाओं को पापा और दादी पूरा किया करते थे। लेकिन मां मुझसे नाराज रहती थी। लगता था जैसे मैने उनकी उच्छाओं के विपरीत उनके घर में जन्म ले लिया हो। जबकि मेरी इसमें कोई गलती नहीं थी। पापा के मरने के बाद मै ए क दम से अनाथ सी हो गयी। दादी पहले ही स्वर्ग सिधार चुकी थी। मै मां की उपेक्षाओं और ए क उम्मीद के साथ जीती रही थी कि मेरा भाई बबलू बडा होगा तो वह मेरी भावनाओं और इच्छाओं को अहमियत देगा। वही बबलू आज मेरे जीवन का सौदा करके आया है। वैसे मैने महसूस किया है कि बबलू भी इस रिश्ते से बहुत खुश नहीं है। लगता है जैसे उसे भी मेरी खुशियों का आभास है, पर पैसा खर्च न करना पड़े इसलिए वह मेरा रिश्ता तय कर आया है। मां और मेरी बड़ी बहन आरती के पति कृष्णा जीजा जी इस रिश्ते से बहुत खुश थे। जीजाजी नहीं चाहते थे कि मै उनके ससुराल में रहूं। क्योंकि मैने कभी उनकी शारीरिक भूख को शांत नहीं किया था। वह जब भी हमारे घर आते तो मुझसे अधिक मेरे शरीर से खेलना चाहते थे और अपनी हवश की आग को मेरे शरीर से शांत करना चाहते थे। जीजाजी के इस काम में मां भी थोड़ा बहुत सहयोग करती थी। जब जीजा जी की इस हरकत की शिकायत मां से करती तो वह कहती कि वह तुम्हारे जीजा जी ही तो हैं उनका इस तरह करने का हक है। वह मजाक में ए ेसा वैसा कुछ कर भी देते हैं तो क्या अंतर पड़ता है। वह तुम्हारी बहने के पति है तुमसे उनका हंसी मजाक का रिश्ता है। ए ेसा तो चलता ही रहता है। मां की इन बातों को सुनकर मैं सन्न रह जाती। सोचती जब बाड़ ही खेत को खाने लगे तो औरों से क्या शिकायत करना। मै चुपचाप अपने कमरे में आकर रोने लगती, बहुत देर तक रोती रहती। सोचती अब मै अपने ही घर में बेगानी हूं। मेरी बातों को सुनने वाला कोई नहीं है। अपने साथ होते इस व्यवहार को सहती रही कभी ऊफ तक नही की। फिर भी मां मुझसे सीधे मुंह बात नहीं करती थी। हरदम गाली से ही बात शुरू करती थी। मुझसे दो बहनें सुमन और निशा छोटी थी पर कभी भी मां या बबलू उन दोनों से कुछ भी नही कहते थे। मै ही सारा काम करती थी। खाना बनाने से लेकर सभी का कपड़ा धोना और घर की साफ-सफाई तक करना मेरे ही जिम्मे था। घर का सारा काम मै ही करती थी ए क नौकरानी की तरह फिर भी मां मेरी शिकायत गांव के लोगों से करती रहती थी कि पूनम घर का कोई काम नहीं करती, सारा दिन सोती रहती है। मां के इस झूठ को सुनकर मै अवाक सी रह जाती। मेरा भाई भी इस बात पर मुझे ही भला बुरा कहता, कभी-कभी मार भी देता था। बबलू मुझसे छोटा था फिर भी मै उसके थप्पड़ या बात का कोई प्रत्युत्तर नही देती और अपनी किस्मत की बात सोचकर चुप रह जाती। भाई-बहनों और मां के इस व्यवहार को देख-सुनकर सोचती थी कि शादी के बाद मेरे किस्मत के दरवाजे खुलेंगे। तब शायद मै सुख-चैन से जी सकूंगी। लेकिन यह मेरा बहम था। मैने तो केवल सपनों में ही जीना सीखा था। हकीकत के रास्ते तो कांटों से भरे थे। मैं ए क नरक से निकलकर दूसरे नरक में धकेली जा रही थी पर ए क लड़की होने के कारण सब कुछ सहने को मजबूर थी। आश्चर्य भी हुआ कि जिस मां ने मेरे साथ इस तरह का व्यवहार किया उसका साथ मेरा भाई भी दे रहा है। बबलू ने तो दुनिया देखी है, फिर क्यों मेरी मां के इरादे को पूरा होने दे रहा है? इसलिए कि इस शादी से उसे कुछ पैसे बच जायेंगे। क्या मैंने उसकी कलाई में इसी दिन के लिए राखियां बांधती रही थी कि वहीं हाथ मुझे कसाई के खूंटे से बांध दें। तभी किसी ने मुझे झकझोरा। मैं जैसे सोते से जागी, पलटकर देखा तो दांत निपोरे तारकेश्वर खड़ा था। उसने शराब पी रखी थी। ए ेसे क्या देख रही है। जा कुछ खाने को ला। मैं चुपचाप खाना लाने रसोई में चली गयी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-6854392860318873624?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/6854392860318873624/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/03/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/6854392860318873624'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/6854392860318873624'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/03/blog-post.html' title='लड़की होने का दर्द'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/S81rBaw2qYI/AAAAAAAAADM/_CbmN_CQKsc/s72-c/1613332%5B1%5D.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-3670728693581596250</id><published>2010-02-06T02:01:00.000-08:00</published><updated>2010-02-06T02:02:59.512-08:00</updated><title type='text'>सात सौ की साइकिल मेंटीनेंस साढ़े आठ लाख</title><content type='html'>कौन कहता है कि साइकिल गरीबों की सवारी है। राजधानी में एक साइकिल ऐसी भी है, जिसके रखरखाव पर साल में साढ़े आठ लाख से अधिक रूपये खर्च किए जाते हैं। मजे की बात यह है कि यह मोटी रकम उस साइकिल पर खर्च की गयी है, जिसकी मूल कीमत करीब 700 रूपये थी और अब उसकी मौजूदा कीमत लगभग साढ़े तीन हजार आंकी गयी है। मामला ललित कला आकदमी का है, जिसने इतनी बड़ी रकम वर्ष 2009 में खर्च की है। इसका खुलासा अकादमी के विभागीय ऑडिट में हुआ है। इतनी बड़ी राशि एक साइकिल के रखरखाव पर खर्च किये जाने का मुद्दा पिछले वर्ष दिसम्बर (एक दिसम्बर 2009) में ही कौंसिल मेम्बरों की बैठक में भी उठ चुका है। एक साइकिल के रखरखाव पर बेतहाशा पैसा खर्च किये जाने का यह मामला कोई नया नहीं है। वर्ष 2009 में जहां अकादमी ने इस साइकिल के रखखराव पर 858,669 रूपये खर्च किये तो वर्ष 2008 में भी उसने इसी एक साइकिल के रखरखाव पर 453,578 रूपये खर्च कर दिये। आश्चर्य की बात तो यह है कि यह साइकिल है भी या नहीं, इसके बारे में अकादमी के किसी अधिकारी को कुछ भी पता नहीं है। सूत्रों के अनुसार जब इस साइकिल को खरीदा गया था तो उस वक्त इसकी कीमत लगभग 700 रूपये थी और अब अकादमी ने उसकी कीमत 3440 रूपये लगायी है। ऑडिट रिपोर्ट में 858669 रूपये की राशि व्हीकल मेन्टेंनेस के नाम पर दर्ज की गयी है। वहीं दूसरी और अकादमी के पास जो अचल संपत्ति के रूप में रिपोर्ट पेश की गई है, उसमें व्हीकल के नाम पर सिर्फ साइकिल का ही उल्लेख है। सूत्रों के अनुसार अकादमी के पास दो गाड़ियां थी जो वर्ष 2005 में बिक चुकी हैं और उसके बाद से अकादमी ने कोई भी गाड़ी नहीं खरीदी है। सूत्रों के अनुसार एक साइकिल जरूर हुआ करती थी लेकिन अब वह कहां है किसी को पता नहीं है, लेकिन व्हीकल मेंटेंनेस के नाम पर इतनी रकम कैसे खर्च हो रही है किसी को पता नहीं है। ऑडिट रिपोर्ट पर चार्टर्ड एकाउंटेंट कंपनी के प्रोपराइटर के अलावा ललित कला अकादमी के एकाउंट आफिसर, डिप्टी सेक्रेटरी (एडमिस्ट्रेशन) व अकादमी के सचिव के हस्ताक्षर हैं। एक दिसम्बर को हुई बैठक में कौंसिल के सदस्यों ने जब साइकिल के रखरखाव पर इतनी बड़ी राशि खर्च किये जाने को लेकर सवाल पूछे थे तो सचिव ने इसे टाइपिंग मिस्टेक बताया, लेकिन जब उससे पहले (वर्ष 2008) में साढ़े चार लाख से अधिक की राशि इसी मद में खर्च किये जाने के बारे में कौंसिल सदस्यों ने जानना चाहा तो सचिव जबाव नहीं दे सके थे। टैक्स के रूप में मिलने वाले आदमी के पैसे को इस तरह से पानी की तरह बहाने के बारे में जब ललित कला अकादमी के सचिव सुधाकर शर्मा से जानने की कोशिश की गयी तो पहले वे धमकाते हुए मोबाइल नम्बर कैसे मिला यह जानने की कोशिश करते रहे, बाद में कहा कि सरकारी अधिकारी से बात करने के लिए पहले से समय लो फिर बात करो। पूछे जाने पर कि कब बात करें तो उन्होंने कहा कि सप्ताह भर पहले समय लें, उसके बाद बात करने के बारे में बताएंगे। &lt;br /&gt;--------------------------------------------------------------------------------&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ईमेंल  प्रिंट   Comments......&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-3670728693581596250?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/3670728693581596250/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/02/blog-post.html#comment-form' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/3670728693581596250'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/3670728693581596250'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/02/blog-post.html' title='सात सौ की साइकिल मेंटीनेंस साढ़े आठ लाख'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-3154795118729097175</id><published>2010-01-27T10:12:00.000-08:00</published><updated>2010-01-27T10:14:46.499-08:00</updated><title type='text'>पाठकों की कमी के अंदेशे से प्रकाशक परेशान</title><content type='html'>महीने के आखिरी में शुरू होने वाले विश्व पुस्तक मेले को लेकर अभी से विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। इस विरोध की वजह मेला आयोजकों द्वारा बुक स्टालों के किराये में बढ़ोतरी किये जाने के साथ-साथ मेले में ंआने वाले दर्शकों पर 20 रूपये का टिकट लगाया जाना है। प्रकाशकों का आरोप है कि पुस्तक मेले के आयोजन के पीछे सरकार की मंशा आम आदमी में पढ़ने की प्रवृति पैदा करना है। जबकि आयोजकों की मंशा सरकार के उद्देश्यों को दरकिनार कर इसे एक भव्य कारपोरेट मेले का शक्ल देना है। तीस जनवरी से राजधानी के प्रगति मैदान में शुरू होने जा रहे 19वें विश्व पुस्तक मेला में शामिल होने के लिए भारतीय प्रकाशकों को पिछले मेले की तुलना में चार हजार और 17वें विश्व पुस्तक मेले की तुलना में लगभग 9000 रूपये (नौ हजार) ज्यादा किराया देना पड़ रहा है। पिछले पुस्तक मेले में टिकट शुल्क 10 रूपये था और उससे पहले मेला प्रवेश निशुल्क होता था। डायमंड पाकेट बुक्स के चेयरमैन नरेन्द्र कुमार वर्मा ने कहा कि जब मेला आयोजक एनबीटी हमसे अधिक रूपये ले रहा है तो फिर दर्शकों पर 20 रूपये का टिकट क्यूं लगाया जा रहा है। सामयिक प्रकाशन के प्रमुख महेश भारद्वाज ने कहा कि सरकार का मकसद पुस्तक मेले के आयोजन के माध्यम से लोगों में पढ़ने की प्रवृति को जगाना है। लेकिन आयोजकों ने टिकट लगा कर मेला शुरू होने से पहले ही इसे फ्लाप कर दिया है। आयोजकों के इस कदम से यहां लाखों खर्च कर स्टाल लगाने वाले प्रकाशकों को घाटा उठाने के साथ-साथ पाठकों की कमी से भी जूझना होगा। प्रकाशकों ने कहा कि भारतीय प्रकाशन उघोग पहले ही पाठकों की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में जब मेले में आने के लिए उनसे किराया लिया जाने लगेगा तो वह हमारी आ॓र देखना भी छोड़ देंगे। सरकार की मंशा हमेशा इस मेले के माध्यम से एक बड़ा पाठक वर्ग तैयार करने की रही है लेकिन आयोजक प्रगति मैदान में लगने वाले कॉरपोरेट मेलों से इस कदर प्रभावित है कि वह पुस्तक मेले को भी कॉरपोरेट मेला बनाने पर तुले हुए हैं। महेश भारद्वाज ने कहा कि इंदिरा गांधी के समय में हिन्दी प्रकशाकों को इतना सम्मान मिला हुआ था कि उन्हें हॉल नम्बर 6 में स्टाल लगाने की जगह दी जाती थी। इस हॉल को ‘हॉल आफ नेशन’ नाम दिया गया था। लेकिन धीरे-धीरे हिन्दी प्रकाशकों को एक कोने में फेंक दिया गया। हिन्दी के कई ऐसे प्रकाशक भी हैं जो इस बार स्टाल का किराया बढ़ाये जाने की वजह से मेले में शामिल नहीं हो रहा है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-3154795118729097175?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/3154795118729097175/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/01/blog-post_27.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/3154795118729097175'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/3154795118729097175'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/01/blog-post_27.html' title='पाठकों की कमी के अंदेशे से प्रकाशक परेशान'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-1821579943325757014</id><published>2010-01-26T22:47:00.000-08:00</published><updated>2010-01-26T22:49:10.356-08:00</updated><title type='text'>लोगों में दिखा समारोह देखने का जुजून</title><content type='html'>गणतंत्र दिवस समारोह को देखने की ललक आम लोगों में किस कदर है, इसका नजारा मंगलवार को देखने को मिला। पूरा शहर घने कोहरे की गिरफ्त में था, सुरक्षाकर्मियों ने बैरिकेड्स लगाकर तमाम रास्तों को रोक दिया था, लेकिन इन सबके बावजूद लोग एक-दो नहीं, बल्कि 7-8 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर राजपथ समारोह देखने पहुंचे। पैदल पहुंचने वाले लोगों में ऐसे लोगों की संख्या ज्यादा थी, जो दफ्तरों में निचले स्तर का काम करते हैं। इन्होंने अपने अधिकारियों से गणतंत्र दिवस समारोह के पास हासिल किये थे। राधेश्याम अपने परिवार के साथ गीता कॉलोनी से पैदल ही राजपथ पहुंचे। वह इस बात से नाराज दिखे कि बड़े साहब और अधिकारियों को गाड़ियां पुलिसवाले ले जाने दे रहे हैं, लेकिन आटो और बसों को नहीं जाने दे रहे हैं। हम लोग साहब से ‘पास’ तो मांग लेते हैं, लेकिन गाड़ी नहीं होने के कारण पैदल आना पड़ा है। गाड़ी का भी पास है, लेकिन पुलिस कहती है यह कार, स्कूटर व मोटरसाइकिल के लिए है। आटो पर नहीं चलेगा। राधेश्याम की तरह, सुबोध भी अपने बुजुर्ग मां-बाप के साथ मंडावली से पैदल ही आए।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-1821579943325757014?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/1821579943325757014/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/01/blog-post_7312.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/1821579943325757014'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/1821579943325757014'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/01/blog-post_7312.html' title='लोगों में दिखा समारोह देखने का जुजून'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-7734385573417410836</id><published>2010-01-26T22:46:00.000-08:00</published><updated>2010-01-26T22:47:36.663-08:00</updated><title type='text'>राष्ट्रीय पर्व पर गर्व से दिल गदगद</title><content type='html'>‘सुन मेरे बंधु रे, सुन मेरे मितवा, सुन मेरे साथी रे ...’ सन् 1959 में विमल राय द्वारा निर्देशित और एसडी बर्मन द्वारा गाया और संगीतबद्ध किया हुआ यह गीत जब राजपथ की फिजाओं में बिखरा, तो ऐसा लगा जैसे राजपथ से गीत और संगीत की अविरल धारा बह निकली हो। शास्त्रीय संगीत पर आधारित इस गीत के जरिये जिस तरह से त्रिपुरा ने अपने प्रांत में जन्मे संगीतकार व गायक स्व. सचिन देव बर्मन को सम्मान दिया, वह काबिलेतारीफ है। अब तक राजपथ पर राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाली झांकियों में उस राज्य की कला-संस्कृति, तीज-त्योहार व उसकी किसी उपलब्धि को ही दिखाया जाता रहा है, लेकिन त्रिपुरा ने मंगलवार को अपनी झांकी के जरिए एक अलग परंपरा की शुरूआत कर दी। कला को मिला यह एक ऐसा सम्मान है, जिसके आगे हर सम्मान छोटा पड़ जाएगा। एक अक्टूबर 1906 में त्रिपुरा के एक शाही परिवार में जन्मे सचिन दा ने 89 हिन्दी और 31 बांग्ला फिल्मों में संगीत दिया है। उन्हें ‘नाविक गीतों’ (जिसे बंगाली में भटियाली कहा जाता है) को गाने और उनका संगीत तैयार करने में महारत हासिल थी। यही वजह है कि इस तरह के गीतों को सबसे ज्यादा संगीतबद्ध उन्होंने ही किया है। ‘अराधना’ का गीत ‘मेरे सपनों की रानी कब आयेगी तू, आयी रूत मस्तानी कब आयेगी तू, बीती जाए जिन्दगानी कब आयेगी तू, चली आ तू चली आ... और ‘एक घर बनाऊंगा, दुनिया बसाऊंगा तेरे घर के सामने..., जैसे कुछ एक ऐसे गीत हैं, जिनकी धुनें युवाओं को आज भी रोमांचित करती हैं। ऐसे एवरग्रीन संगीतकार और गायक को राजपथ पर त्रिपुरा की आ॓र से मिले सम्मान ने निस्संदेह फिल्म इंडस्ट्री को गरिमा का अहसास कराया है। हो सकता है भविष्य में राजपथ पर ऐसी और झांकियां देखने को मिले।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-7734385573417410836?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/7734385573417410836/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/01/blog-post_26.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/7734385573417410836'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/7734385573417410836'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/01/blog-post_26.html' title='राष्ट्रीय पर्व पर गर्व से दिल गदगद'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-774889715261361775</id><published>2010-01-22T01:33:00.000-08:00</published><updated>2010-01-22T01:41:47.700-08:00</updated><title type='text'>तैयार रहिए! बढ़ेंगी दूध पाउडर की कीमतें</title><content type='html'>महंगाई की मार से दो चार हो रहे आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। दूधियों ने कच्चे दूध की कीमतों में प्रति लीटर 5-7 रूपए तक की बढ़ोतरी करने का अल्टीमेटम दूध पाउडर कंपनियों को दे दिया है। इस बढ़ोतरी के बाद स्कीम्ड पाउडर (दूध पाउडर) की कीमतों में 5 या 10 रूपए की नहीं बल्कि 35-40 रूपए तक की बढ़ोतरी किये जाने के संकेत डेयरी प्रोडक्ट्स ट्रेडर एसोसिएशन ने दिया है। एसोसिएशन के अनुसार दूध की कीमतों में बढ़ोतरी की मुख्य वजह सरकार द्वारा स्कीम्ड पाउडर और ‘केसिन’ (चीज) का एक्पोर्ट किया जाना बताया और पशु चारे की कीमतों में बढ़ोतरी होना है। डेयरी प्रोडक्ट्स ट्रेडर एसोसिएशन के महामंत्री अनिल गुप्ता के अनुसार दूधियों ने कच्चे दूध की कीमतों में बढ़ोतरी करने का संकेत दे दिया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि महंगाई की वजह से जानवरों का चारा महंगा हुआ और इसी के साथ दूध की मांग में भी बढ़ोतरी हुई है जबकि उत्पादन कम हुआ है। ऐसे में दूधियों ने 24-25 रूपए प्रतिलीटर वाले कच्चे दूध को 30-32 रूपए में देने की बात करने लगे हैं। गुप्ता के अनुसार दूध पाउडर और चीज का निर्यात बढ़ता जा रहा है, जिससे घरेलू बाजार में दूध पाउडर कम हो रहा है। यह बात दूधियों को भी पता है और इसी का फायदा वह उठाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अगर कच्चा दूध महंगा होने पर दूध पाउडर की कीमतों में लगभग 35-40 रूपए की बढ़ोतरी होगी। गुप्ता ने कहा कि कच्चे दूध की सप्लाई करने वाले दूधियों ने दूध पाउडर बनाने वाली कंपनियों को कह दिया है कि वह अगले माह से 30-32 रूपए से कम में दूध नहीं दे सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो हमें न चाहते हुए भी दूध पाउडर की कीमतों में कम से कम 35-40 रूपए प्रतिकिलो तक की बढ़ोतरी करनी पड़ेगी। इस वक्त थोक बाजार में दूध पाउडर 135-140 रूपए में बिक रहा है। वहीं दूसरी आ॓र पारस मिल्क के एमडी राजेन्द्र सिंह ने भी कहा कि नार्थ इंडिया में दूध का उत्पादन कम हुआ है, लेकिन अभी ऐसी नौबत नहीं आई है कि तुरंत पॉलीपैक दूध की कीमतों में इजाफा किया जाए लेकिन यह तय है कि बहुत दिनों तक दूध की कीमतें स्थायी नहीं रहेगी। सूत्रों के अनुसार प्रतिवर्ष 60 हजार टन मिल्क पाउडर का निर्यात किया जाता है। दूध की कीमतों में बढ़ोतरी होने और देश में दूध का उत्पादन कम होने से सरकार ने 2008 में छह माह के लिए दूध पाउडर के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन फिर छह माह बाद जैसे ही निर्यात से प्रतिबंध हटा तो दूध की कीमतें बढ़नी शुरू हो गईं। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt;--------------------------------------------------------------------------------&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ईमेंल  प्रिंट   Comments......  &lt;br /&gt;   &lt;br /&gt;7 पीछॆ&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-774889715261361775?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/774889715261361775/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/01/blog-post_6559.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/774889715261361775'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/774889715261361775'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/01/blog-post_6559.html' title='तैयार रहिए! बढ़ेंगी दूध पाउडर की कीमतें'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-6373021863560412963</id><published>2010-01-22T01:28:00.000-08:00</published><updated>2010-01-22T01:29:09.597-08:00</updated><title type='text'>मीडिया के खिलाफ नहीं ‘रण’ : अमिताभ बच्चन</title><content type='html'>अभिनेता अमिताभ बच्चन ने कहा कि फिल्म ‘रण’ न्यूज चैनल के खिलाफ नहीं है। इसे देखने के बाद ही मीडिया राय बनाए तो बेतहर होगा। उन्होंने कहा कि यह फिल्म मीडिया के पक्ष में है। श्री बच्चन ने यह बात मंगलवार को फिल्म के प्रमोशन के लिए आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कही। इस मौके पर निर्देशक राम गोपाल वर्मा, अभिनेता रितेश देशमुख और अभिनेत्री गुलपनाग आदि मौजूद थे। प्रेस कांफ्रेंस की शुरूआत ही तीखे नोक झोंक के साथ हुई। रामगोपाल वर्मा ने आते ही फिल्म का प्रोमो और उसके बाद ब्रेकिंग न्यूज के नाम पर दर्शकों की निगेटिव प्रतिक्रिया दिखाकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को और नाराज कर दिया। दर्शकों की प्रतिक्रिया देखने के बाद पूरी मीडिया को लगा कि उसे ही टारगेट किया जा रहा है और सभी ने एकसाथ सवालों की झड़ी लगा दी। जिसपर अमिताभ बच्चन को कहना पड़ा कि यह फिल्म न्यूज चैनल के खिलाफ नहीं बल्कि उसके हक में है। जबकि रामगोपाल वर्मा ने अपना बचाव यह कह कर किया कि एक जिस तरह से एक फिल्म के फ्लाप होने से पूरी फिल्म इंडस्ट्री को फ्लाप फिल्मों की इंडस्ट्री नहीं कह सकते उसी तरह से न्यूज चैनलों के बारे में यह नहीं कहा जा सकता है कि सभी इस माध्यम का इस्तेमाल स्वार्थ के लिए करते हैं। अमिताभ ने कहा कि न्यूज चैनल अजगर की तरह है और उसे हर चौबीसों घंटे खाना (खबरें) चाहिए। इसकी व्यवस्था करना कम मुश्किल काम नहीं है। फिल्म में न्यूज चैनल की मुखिया की भूमिका निभाने वाले बच्चन के कहा कि मैने महसूस किया है कि एक पत्रकार को वही करना पड़ता है जो उसका ‘बॉस’ चाहता है। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt;--------------------------------------------------------------------------------&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ईमेंल  प्रिंट&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-6373021863560412963?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/6373021863560412963/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/01/blog-post_3774.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/6373021863560412963'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/6373021863560412963'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/01/blog-post_3774.html' title='मीडिया के खिलाफ नहीं ‘रण’ : अमिताभ बच्चन'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-6432657286841247878</id><published>2010-01-22T01:24:00.000-08:00</published><updated>2010-07-03T04:29:11.867-07:00</updated><title type='text'>पीरियड फिल्म बनाना सबसे मुश्किल काम : सलमान</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TC8e_sjykFI/AAAAAAAAAD0/rufQp-NQ0ZU/s1600/images%5B6%5D.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 150px; height: 113px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/TC8e_sjykFI/AAAAAAAAAD0/rufQp-NQ0ZU/s320/images%5B6%5D.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5489640550429790290" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;पीरियड फिल्म बनाना सबसे मुश्किल काम है। इसका बजट सामान्य फिल्मों से 10 गुणा तक अधिक होता है। साथ ही ऐसी फिल्मों में कलाकार से लेकर निर्देशक तक को काफी मेहनत करनी पड़ती है। पीरियड फिल्में बहुत कम बनने का यही कारण भी है। यह बात अभिनेता सलमान खान ने राजधानी में मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कही। वह अपनी आने वाली पीरियड फिल्म ‘वीर’ के प्रमोशन के लिए राजधानी आये थे। फिल्म 22 जनवरी को रिलीज हो रही है। फिल्म की कहानी खुद सलमान खान ने लिखी है। सलमान ने बताया कि शूंिटंग शुरू होने के दो सप्ताह पहले तक उनके पास नायिका नहीं थी और वह काफी परेशान थे लेकिन जब उन्होंने फिल्म सिटी में जरीन को एक एड की शूटिंग करते हुए देखा तो उसे तुरंत साइन कर लिया। उन्होंने कहा कि अभी तक हमारे यहां जितनी भी पीरियड फिल्में बनी हंै, उसमें हीरो को इस तरह से दिखाया गया है जैसे उनके अंदर भावनाएं होती ही नहीं हैं। वह सिर्फ तलवार लेकर लड़ाई के लिए तैयार रहता है लेकिन ऐसा नहीं है। उस जमाने में भी पुरूष प्रेम करते थे और उसे भी पीरियड फिल्मों मे दिखाया जाना चाहिए। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि आजकल की हीरोइनों का ढांचा (फिगर) पुराने जमाने की हीरोइनों की तरह नहीं रह गया है। ू ‘वीर ब्रेवरी अवार्ड’ : आतंकवादी हमलों में मारे गए लोगों के परिजनों को मंगलवार को फिक्की सभागार में आयोजित एक समारोह में अभिनेता सलमान खान और अखिल भारतीय आतंकवाद विरोधी मोर्चा के अध्यक्ष एमएस बिट्टा ने संयुक्त रूप से ‘वीर ब्रेबरी अवार्ड’ से सम्मानित किया। सम्मान स्वरूप प्रतीक चिह्न प्रदान किया गया। पुरस्कार पाने वालों में माइकल सिमरन, इशिका संत, परवीन, प्रिया वष्टि, सोनू, शीतल, रूचि सूरी, अनुराधा गौतम, सुनीता सूरी, सुपर्णा भाटिया, कुलदीप सिंह तथा जम्मू कश्मीर की रहने वाली रूखसाना भाई अजाज अहमद प्रमुख हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-6432657286841247878?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/6432657286841247878/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/01/blog-post_22.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/6432657286841247878'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/6432657286841247878'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/01/blog-post_22.html' title='पीरियड फिल्म बनाना सबसे मुश्किल काम : सलमान'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' 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करेंगे। महासंघ के महासचिव अरूण गुप्ता ने कहा कि एक आ॓र सरकार कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान आने वाले विदेशी मेहमानों को ठहराने के लिए पंचसितारा होटलों के रिनोवेशन पर 140 करोड़ रूपए पानी की तरह बहा रही है और हमारे पास 40-45 हजार बजट कमरे हैं तो उसके लिए उसके पास कोई योजना होने की बात तो दूर हमें लाली पॉप थमाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी मांगों में सभी बजट होटलों को पक्के लाइसेंस दिया जाना प्रमुख है। इसके अलावा दलालों पर अंकुश लगाने के लिए बना टाउट टैक्स’ लागू किया जाए, एक टूरिस्ट बोर्ड बनाया जाए जिसमें महासंघ को भी शामिल किया जाए। इसके अलावा कनवर्जन चार्ज और प्रॉपर्टी टैक्स की जगह किसी एक को लिया जाए। साथ ही लम्बे समय से 500 रूपए पर लगने वाले लग्जरी टैक्स की सीमा को बढ़ाकर 15 सौ रूपए की जाए। उन्होंने कहाकि हम खुद नहीं चाहते है कि ऐसे कदम उठाएं लेकिन क्या करें। मजबूरी में हमें ऐसे कठोर निर्णय लेने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली आने वाले अधिकतर मेहमानों को बजट होटल में ही आश्रय मिलता है लेकिन सरकार उनकी आ॓र ध्यान ही नहीं देती है। उन्होंने कहाकि पूरी दिल्ली में 14 सौ बजट होटल हैं जिनमें से सिर्फ पहाड़गंज में ही 600-650 बजट होटल हैं जिनके पास 15 हजार से अधिक कमरे हैं। जिनके किराए पांच सितारा होटलों की तुलना में बहुत ही मामूली है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;--------------------------------------------------------------------------------&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ईमेंल  प्रिंट&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-1219543602956596691?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/1219543602956596691/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/01/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/1219543602956596691'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/1219543602956596691'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2010/01/blog-post.html' title='विदेशी अतिथियों के सत्कार से इनकार'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-1777735252968016824</id><published>2009-12-28T00:13:00.000-08:00</published><updated>2009-12-28T00:14:58.527-08:00</updated><title type='text'>आपके आईएमईआई नंबर की क्लोनिंग तो नहीं हुइ!</title><content type='html'>वैध आईएमईआई नम्बर वाले मोबाइल फोन वाले उपभोक्ता सावधान हो जाएं। क्योंकि हो सकता है उनके नम्बर से कई अवैध चाइनीज मोबाइल फोन चल रहे हों और इसकी जानकारी तक उन्हें न हो। जी हां! यह बिल्कुल सही है क्योंकि देश में मौजूद डेढ़ करोड़ से अधिक चाइनीज मोबाइल फोन अवैध आईएमईआई नम्बरों से चल रहे हैं और इन्हें यह नम्बर क्लोनिंग के माध्यम से मिला है। भारतीय दूरसंचार विभाग (डीआ॓टी) सूत्रों के अनुसार देश में इस वक्त डेढ़ करोड़ से ज्यादा चाइनीज मोबाइल हैंडसेट काम कर रहे हैं जिनमें दुकानदारों ने किसी वैध उपभोक्ता के आईएमईआई नम्बर का क्लोन डाल कर चालू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार क्लोनिंग का काम सबसे ज्यादा देश की राजधानी में ही हो रहा है। जब कोई उपभोक्ता अपना मोबाइल ठीक करने अवैध दुकानदारों को बनाने के लिए देता है तो वह उसके आईएमईआई नम्बरों की क्लोनिंग कर लेते हैं और उस नबंर को हजारों चाइनीज मोबाइल में डाल कर उसे चालू कर देते हैं। जिससे एक ही आईएमईआई नम्बर कई-कई हैंडसेटों में चलते रहते हैं। क्लोन आईएमईआई नम्बरों को चाइनीज हैंडसेटों में डालने के लिए दुकानदार सिंगल सिम के लिए 200-300 और डबल सिम के लिए 500-600 रूपए तक वसूलते हैं। एयरफोन के निदेशक विशाल चितकारा के अनुसार किसी भी फोन के आईएमईआई नम्बरों की क्लोनिंग करनी बहुत मुश्किल नहीं है। उन्होंने बताया कि इंटरनेट पर क्लोनिंग करने वाला साफ्टवेयर मौजूद है जिससे कोई भी बहुत ही आसानी से किसी भी फोन के आईएमईआई नम्बरों की क्लोनिंग कर सकता है। उन्होंने बताया इंडियन सेलुलर एसोसिएशन (आईसीए) के अनुसार चाइनीज मोबाइल हैंडसेट ही अवैध नहीं है बल्कि उन्होंने उन हैंडसेटों को भी अवैध बताया है जिनमें दो सिम लगते हैं लेकिन उनमें एक ही आईएमईआई नम्बर मौजूद है। ऐसे हैंडसेट भी अवैध हैंडसेट के श्रेणी में आते हैं। गफ्फार मार्केट के एक दुकानदार ने बताया कि क्लोन आईएमईआई ठीक होने के लिए आने वाले वैध मोबाइल हैंडसेटों से लिए जाते हैं और आगे उसे चाइनीज मोबाइल हैंडसेटों में प्रति सिम 200-300 रूपए पर डाल दिए जाते हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-1777735252968016824?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/1777735252968016824/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2009/12/blog-post_28.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/1777735252968016824'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/1777735252968016824'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2009/12/blog-post_28.html' title='आपके आईएमईआई नंबर की क्लोनिंग तो नहीं हुइ!'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-7061357997546916925</id><published>2009-12-15T01:00:00.000-08:00</published><updated>2009-12-15T01:03:59.189-08:00</updated><title type='text'>पेंटिंग में भी हो रहा है निवेश</title><content type='html'>पेंटिंग अब सिर्फ दीवारों पर टंगने के लिए नहीं रह गई हैं। अब इनकी पहचान कला के ऐसे हीरे के रूप में हुई है जिसमें अब इंवेस्टमेंट होने लगा है। लोगों के सामने अभी तक इंवेस्टमेंट के लिए जमीन-जायदाद और सोने-चांदी की खरीदारी हुआ करते थे, लेकिन अब उनके सामने पैसा इंवेस्ट करने के लिए नया द्वार पेंटिंग का खुल गया है। इससे जहां एक आ॓र नये कलाकारों को काम मिल रहा है वहीं दूसरी आ॓र उन्हें उनकी कला की कीमत भी मिल रही है। इसे मैं भारतीय कला के लिए अच्छा संकेत मानता हूं। यह बात जानेमाने पेंटर सूर्य प्रकाश ने राष्ट्रीय सहारा के साथ एक विशेष बातचीत में कही। श्री प्रकाश की बनाई पेंटिग की प्रदर्शनी आजकल राजधानी की नव्या गैलरी में चल रही है। प्रदर्शनी में प्रकाश द्वारा पिछले पांच दशकों के दौरान बनाई गई बेहतरीन पेंटिंग में से 20 पेंटिंग को प्रदर्शित किया गया है। सूर्य प्रकाश ने कहा कि आज कला का बाजार बढ़ गया है। अब तक इसके कद्रदानों की संख्या बहुत कम थी जिसकी वजह से कभी किसी जानेमाने कलाकार की कृति ही लाखों में बिकती थी लेकिन आज ऐसा नहीं है। आज स्थिति बदल गयी है। एक नये कलाकार की कृति भी कई लाख में बिकती हैं। जबकि जो स्थापित कलाकार हैं उनकी कलाकृतियों की कीमत करोड़ों में पहुंच गयी हैं। उन्होंने कहा कि अब लोग नये कलाकारों की कृतियों को इस उम्मीद के साथ खरीद रहे हैं कि कल हो सकता है उसका नाम हो जाए और फिर उस समय हजारों की कीमत वाली कृति करोड़ों में बिकेगी। श्री प्रकाश ने इस चलन को अच्छा बताते हुए कहा कि इससे आज के कलाकारों को काम तो मिल रहा है। साथ ही ढेर सारी गैलरियों के खुलने से उन्हें उनके काम की अच्छी कीमत भी मिल रही है। उन्होंने भारतीय कला को खास आदमी की ड्राईंग रूम से आम आदमी के घरों तक पहुंुचने के लिए इंटरनेट और मीडिया की सराहना की जिसने अपने कार्यक्रमों द्वारा इस कला (पेंटिंग) को प्रमोट किया है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-7061357997546916925?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/7061357997546916925/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2009/12/blog-post_15.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/7061357997546916925'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/7061357997546916925'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2009/12/blog-post_15.html' title='पेंटिंग में भी हो रहा है निवेश'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-8741954267113830320</id><published>2009-12-12T03:38:00.000-08:00</published><updated>2009-12-12T03:44:01.124-08:00</updated><title type='text'>खादी का नया अर्थशास्त्र</title><content type='html'>खादी खास हो गई है। वह महीन से महीन होकर महंगी और आकर्षक होकर फैशन परेड तक में शामिल हो गई है। इस तरह से उसने आत्मनिर्भरता का एक नया अर्थशास्त्र गढ़ा है। एक उत्पाद की दरकार व्यापक बाजार तलाशने, मांग के मौके बढ़ाने और फिर पूर्ति के रूप में अपने को खपा देने की होती है। इस अर्थ में खादी की उपलब्धि पर संतोष के साथ देश गर्वित भी हो सकता है। आजादी से पहले बापू के आह्वान पर ‘भूखे-नंगे भारत’ का अपनी खरखराहट से ही तन ढंकने आगे आई खादी का मकसद और सरोकार आम था। उसके महंगेपन में आज ‘वस्त्र नहीं विचार’ की बुनियाद कहीं कमजोर पड़ती दिख रही है। सस्ती दर पर सर्वजन सुलभता के जरिए गांधी ने तब वर्गभेद का दुर्गभेदन कर दिया था लेकिन अब खादी यहां से खिसक गई है और उसने अपने दाम बाजार से भी ऊंचे रखे हैं। मौजूदा महंगाई की मार में पिस रही जनता के लिए वहां से राहत की कोई उम्मीद नहीं है। एक तरफ सरकार सस्ती दरों पर रोजमर्रा की आवश्यकताएं जुटाने में हलकान हो रही है तो खादी का इसमें असहयोगी रवैया आड़े ही आ रहा है। उससे आटा-दाल खरीदने वालों को वाकई आटा-दाल के भाव याद आ रहे हैं। कोई भी सामान खरीदने जाइए, वह खादी ग्रामोघोग भवन की मुहर लगने भर से आसमान छूने लगा है। लोगों को लगता है कि यह बापू के सपने का टूटना है क्योंकि खराब समय में आम आदमी के साथ खड़े होने का उसका मिशन नहीं रहा। उसकी मुहर धनाढ्यों की हैसियत की रैंकिंग तय करती लगती है, जिनके लिए दौलत की कभी कमी नहीं रही। यह विडम्बना है कि जिस खादी ने वर्गविहीन बाजार रचने का ऐतिहासिक दायित्व निभाया था, उसने ‘क्लास’ पैदा कर दिया है। यह बात उसकी दुकानों पर जा रहे लोगों से जाहिर होती है। तब जबकि उसका माल तैयार करने में आज मशीनी नहीं, मानव श्रम लगता है जो अब भी काफी सस्ता है। देखा जाए तो उसके बाजार के क्लासिक होने का फायदा सूत कातने या बुनने वालों को नहीं पहुंचा है। सरकार खादी ग्रामोघोग को एक निश्चित राशि सब्सिडी के रूप में देती है। इसके बावजूद वह महंगी बनी हुई है तो उन कारणों की छानबीन की जानी चाहिए। खादी के विदेशों तक में पांव जमाने से हो रहे मुनाफे के बरअक्स घरेलू स्तर पर उसकी महंगे होने में वाकई कोई संगति है भी। यह काम इसलिए भी जरूरी है कि उस तक आम आदमी की पहुंच बनी रहनी चाहिए।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-8741954267113830320?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/8741954267113830320/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2009/12/blog-post_12.html#comment-form' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/8741954267113830320'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/8741954267113830320'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2009/12/blog-post_12.html' title='खादी का नया अर्थशास्त्र'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' 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प्रमोट करने के लिए दिया जाने वाला नवोदित लेखक पुरस्कार, गैर स्कूली/कालेजों छात्रों को दिया जाने वाला आंशुलेखन पुरस्कार और हिन्दी के उत्कृष्ट शिक्षकों को दिये जाने वाले शिक्षक पुरस्कारों पर भी रोक लगा दी गई है। सूत्रों की माने तो हिन्दी अकादमी की अध्यक्ष मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने इन पुरस्कारों पर यह कहते हुए रोक लगा दी है कि यह अर्थहीन हैं और इन पर पैसा बर्बाद करना कोई होशियारी नहीं है। इतना ही नहीं उन्होंने अकादमी की आ॓र से दिये जाने वाले कुछ प्रतििष्ठत पुरस्कारों पर भी कैंची चलाने की बात कही है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने न केवल हिन्दी अकादमी बल्कि दिल्ली सरकार के तहत आने वाले उर्दू, पंजाबी और सिंधी अकादमियों से भी पुरस्कारों की संख्या पर रोक लगाते हुए इनकी संख्या अधिकतम पांच तक किये जाने का फरमान सुनाया है। हिन्दी अकादमी द्वारा प्रति वर्ष छात्र पुरस्कार के तहत लगभग सात हजार छात्रों को सम्मानित किया जाता था जो अकादमी द्वारा राजधानी के 16 केन्द्रों पर राज्य स्तर पर आयोजित प्रतियोगिता में शामिल होने वाले छात्रों के बीच से चुने जाते थे। इस प्रतियोगिता में 10 हजार से अधिक छात्र शामिल होते थे और अकादमी की आ॓र से दिए गए विषय पर निबंध लिखते थे। तीन वर्गाे में आयोजित होने वाले इस प्रतियोगिता में 6 वर्ष से 35 वर्ष के छात्र और गैर स्कूली छात्र शामिल होते थे। इन्हें अकादमी की आ॓र से सम्मान के रूप में तीन सौ रूपये से 31 रूपये तक की नकद राशि और पुस्तकें दी जाती थी। इसी तरह नये युवा लेखकों के मनोबल को बढ़ाने के लिए दिया जाने वाला नवोदित लेखक पुरस्कारों को भी बंद कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार सरकार की मंशा है दो या तीन प्रतििष्ठत लेखकों को ही सम्मानित करने की है। इस बारे में हिन्दी अकादमी के सचिव डॉ. रविन्द्र नाथ श्रीवास्तव ने कहा कि मुझे नही पता कि सरकार ने पुरस्कारों को क्यों कर रोका या बंद किया है। लेकिन इतना जरूर कह सकता हूं कि अभी तक इन सभी पुरस्कारों के वितरण का आदेश उन्हें नहीं मिला है। लेकिन उन्होंने माना कि सरकार ने पुरस्कारों के औचित्य पर न केवल सवाल खड़े किए है बल्कि इनकी संख्या कम किये जाने की बात भी कही है। अकादमी के उपाध्यक्ष व जानेमाने हास्य कवि प्रो. अशोक चक्रधर ने कहा कि मेरे आने के बाद संचालन समिति की मीटिंग नहीं हुई है इसलिए इस बारे में मै कुछ नहीं कह सकता।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-5578068248207563462?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/5578068248207563462/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2009/12/blog-post_10.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/5578068248207563462'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/5578068248207563462'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2009/12/blog-post_10.html' title='हिन्दी पुरस्कारों पर दिल्ली सरकार को ऐतराज'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-3634160172955827145</id><published>2009-12-07T23:57:00.000-08:00</published><updated>2009-12-07T23:59:28.380-08:00</updated><title type='text'>क्या खादी व उसके उत्पाद केवल रईसों के लिए!</title><content type='html'>जिस आम आदमी के बल पर बापू ने अंग्रेजों की गुलामी से देश को मुक्त करवाया था, आज उसी आम आदमी की पहुंच से खादी ग्रामोघोग स्टोर में बेची जाने वाली वस्तुएं व कपड़े बहुत दूर हैं। आजादी के छह दशकों के बाद भी आम आदमी खादी के कपड़े खरीदने की बात सपने में ही सोचता है। उसे बापू का खादी एक ब्रांड की तरह लगता है जो मल्टीनेशनल ब्रांडों से कहीं ज्यादा महंगा और स्टेटस वाला है। यहां बेची जाने वाली चीजों की कीमतों के बारे में सुनकर ही लगता है जैसे महंगाई की दस्तक सबसे पहले यहीं (खादी ग्रामोघोग भवन) पर पड़ती है। जिस तरह से महंगाई की मार का असर सबसे ज्यादा आम आदमी पर पड़ा है ठीक उसी तरह गुलामी के दिनों में भी सबसे ज्यादा दबा-कुचला आम आदमी (गरीब) ही था। लेकिन जब बापू ने विदेशी कपड़े के विरोध के लिए खादी पहनने का आह्वान किया तो लगा जैसे आम आदमी के नंगे बदन को खादी के कपड़े ढकेंगे लेकिन हुआ ठीक इसका उल्टा। खादी इतनी महंगी हो गई है कि आज यह आम नहीं खास की पसंद बन गई है। खादी का एक कुर्ता बनवाने में इतना खर्च बैठता है कि उतने में विदेशों ने आने वाला कपड़ा पूरे परिवार के तन को ढक सकते हैं। इसी तरह यहां बिकने वाला आटा अभी से 22 रूपये किलो पहुंच गया है, जबकि मल्टीनेशनल कंपनियों द्वारा भारतीय गेहूं से तैयार आटा 20 रूपये किलो तो कुछेक मॉल में तो यह 20 रूपये से भी कम में बेचा जा रहा है। आटे के साथ-साथ आम आदमी के हाथों से खादी भवन के लिए तैयार किया गया दलिया भी मल्टीनेशनल ब्रांडेड दलिया से दोगुने तक महंगा। यहां दलिया 80 रूपये किलो है। वहीं खाने का जायका बढ़ाने वाला अचार इतना महंगा है कि इतने में लगभग दो किलो मल्टीनेशनल कंपनियों के अचार आ जाए। खादी ब्रांड के तहत बेचे जाने वाले अचार की कीमत 130 रूपये प्रतिकिलो है, जबकि पेड़ों से निकाला गया शुद्ध शहद 230 रूपये किलो है। इसी तरह खुदरा बाजार में 24 रूयपे प्रतिकिलो बिकने वाला पोहा (चिउरा) यहां पहुंचते ही 44 रूपये प्रतिकिलो हो जाता है। जैम भी यहां 66 रूपये (500 ग्राम) का है, जबकि खुदरा और मॉल में यही जाम 50-55 रूपये के बीच मिल रहा है। खादी ब्रांड के तहत बेचा जाने वाला नहाने का साबुन 45 रूपये प्रति पीस बिक रहा है। मसालों की कीमतें भी यहां मल्टीनेशनल कंपनियों द्वारा बेचे जा रहे मसालों की तुलना में बहुत ज्यादा है। खादी भवन का जीरा 50 रूपये में 200 ग्राम है तो मल्टीनेशनल कंपनियां इतने ही वजन के लिए 30 रूपये वसूलती हैं। सौंफ भी यहां 20 रूपये में सौ ग्राम मिलती है, जो बाजार में 15-16 रूपये के बीच है। इसी तरह खादी ब्रांड के तहत बेचे जाने वाले सामानों की कीमतें मल्टीनेशनल कंपनियों के सामानों से किसी भी मामले में बहुत ज्यादा है। ऐसे में आदमी खादी का कपड़ा और यहां बिकने वाली खाने-पीने की चीजों को कैसे खरीदेगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-3634160172955827145?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/3634160172955827145/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2009/12/blog-post_8885.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/3634160172955827145'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/3634160172955827145'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2009/12/blog-post_8885.html' title='क्या खादी व उसके उत्पाद केवल रईसों के लिए!'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-5243515978679006075</id><published>2009-12-07T07:52:00.000-08:00</published><updated>2009-12-07T07:56:48.645-08:00</updated><title type='text'>प्यार में अक्सर ऐसा होता है</title><content type='html'>प्यार में अक्सर ऐसा ही कुछ होता है&lt;br /&gt;हर बात मीठी लगती है&lt;br /&gt;हर बात सच्ची लगती है&lt;br /&gt;हर आहट पर दिल धड़क जाता है&lt;br /&gt;हर झोके से सिहरन होती है&lt;br /&gt;हर पाती से खुशबु आती है&lt;br /&gt;हर शाम सुहानी लगती है&lt;br /&gt;हर रात सितारों से बातें होती है&lt;br /&gt;प्यार  में अक्सर ऐसा ही कुछ होता है&lt;br /&gt;कभी यू ही दीवारों से बातें होती है&lt;br /&gt;कभी यूँ ही रोना आता है&lt;br /&gt;कभी यूँ ही हँसना होता है&lt;br /&gt;कभी यूँ ही गुमशुम बैठना भाता है&lt;br /&gt;कभी यूँ ही सजना-संवारना भाता है&lt;br /&gt;कभी यूँ ही राह तकना होता है&lt;br /&gt;कभी यूँ ही इंतजार करना होता है&lt;br /&gt;प्यार में अक्सर ऐसा ही कुछ होता है&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-5243515978679006075?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/5243515978679006075/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2009/12/blog-post_07.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/5243515978679006075'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/5243515978679006075'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2009/12/blog-post_07.html' title='प्यार में अक्सर ऐसा होता है'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-2461274238462205920</id><published>2009-10-02T02:19:00.000-07:00</published><updated>2010-07-03T04:32:24.341-07:00</updated><title type='text'>इंतजार</title><content type='html'>इंतजार ! इंतजार !! इंतजार !!!&lt;br /&gt;यह शब्द अपने आप में&lt;br /&gt;कितने ही दर्द और&lt;br /&gt;सुख की अनुभूतियों को छुपाये हुए है&lt;br /&gt;इसे तुच्छ मनुष्य नहीं जानता&lt;br /&gt;अगर जानने की कभी&lt;br /&gt;कोशिश करता है तो&lt;br /&gt;अपने जीवन के&lt;br /&gt;तमाम सुखों को&lt;br /&gt;गवां बैठता है&lt;br /&gt;और तब हाथ आता है हमारे&lt;br /&gt;एक न भूलने&lt;br /&gt;वाली निराशा&lt;br /&gt;और केवल निराशा !...!!&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-2461274238462205920?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/2461274238462205920/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2009/10/blog-post_02.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/2461274238462205920'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/2461274238462205920'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2009/10/blog-post_02.html' title='इंतजार'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-5737190817171426811</id><published>2009-10-02T01:47:00.000-07:00</published><updated>2009-10-02T02:18:53.451-07:00</updated><title type='text'>देहगंध</title><content type='html'>तेरे गंध की महक&lt;br /&gt;आज वषों के बाद फिर आयी है&lt;br /&gt;कही ये मेरा भ्रम तो नहीं&lt;br /&gt;या कहीं फिर से तुम भूले से&lt;br /&gt;मेरे आस पास आ गए हो&lt;br /&gt;या यूं ही मैंने देहगंध&lt;br /&gt;की महक को महसूस किया है&lt;br /&gt;वर्षो पहले जिस देहगंध को&lt;br /&gt;भूल चुकी थी&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;आज वही देहगंध मेरी दिशा को&lt;br /&gt;दिग्भ्रमित कर रही है&lt;br /&gt;अब तो मुझे और न तड़पाओ&lt;br /&gt;ओ मेरे प्रियतम&lt;br /&gt;कहीं से आकर मेरी&lt;br /&gt;चाहत के पंछी को&lt;br /&gt;अपने देहगंध की&lt;br /&gt;छावं में ठावं दे दो &lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;मैं पलपल की मौत से &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;एक बार तुम्हारे &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;देहगंध को पाकर &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;अपने प्राण पखेरू को &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;ब्रह्माण्ड में ठावं दे दूँ .&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-5737190817171426811?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/5737190817171426811/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2009/10/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/5737190817171426811'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/5737190817171426811'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2009/10/blog-post.html' title='देहगंध'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' 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rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-4383003274108357950</id><published>2009-07-23T02:36:00.000-07:00</published><updated>2010-07-03T04:36:10.607-07:00</updated><title type='text'>मृगनयनी स्पर्श तुम्हारे ...</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/Smg1t83cnwI/AAAAAAAAABA/A8MsSVopH3M/s1600-h/images%5B2%5D.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5361594419933650690" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 143px; CURSOR: hand; HEIGHT: 107px" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/Smg1t83cnwI/AAAAAAAAABA/A8MsSVopH3M/s320/images%5B2%5D.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;नयन नयन के &lt;/div&gt;&lt;div&gt;मौन मिलन &lt;span class=""&gt;ने,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;मधु संबंध &lt;span class=""&gt;रचाए। &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span class=""&gt;अधर&lt;/span&gt;-&lt;/span&gt;अधर की&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span class=""&gt;मधुर &lt;span class=""&gt;छुअन &lt;/span&gt;ने&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;मीठे छंद &lt;span class=""&gt;रचाए। &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;मृग नयनी &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;स्पर्श तुम्हारे &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;तन में यूँ उतरे &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;अनब्याही &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;पनिहारन जैसे &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;पनघट &lt;span class=""&gt;पावं &lt;/span&gt;धरे।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span class=""&gt;रह-&lt;/span&gt;रह ठुमक रही &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;तरुनाई,&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;केसर गंध रचाए &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span class=""&gt;लम्हा-&lt;/span&gt;लम्हा &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;संगमरमरी &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span class=""&gt;रेशम-&lt;/span&gt;रेशम साँस &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;हर सिंगार &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;झरे &lt;span class=""&gt;अंगो &lt;/span&gt;में &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;हर धड़कन मधुमास।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;कल्पनाओं ने &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;प्रीत भरे &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;अल्लहड़ अनुबंध रचाए।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;शहदीले &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;सपनों ने गुंथा &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;एक सतरंगी गीत।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span class=""&gt;खट्टी-&lt;/span&gt;मीठी &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;मनुहारों के &lt;span class=""&gt;संग,&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;गई चाँदनी बीत।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;रत मीत ने &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;मन कागज &lt;span class=""&gt;पे,&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;नेह निबंध &lt;span class=""&gt;रचाये। &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-4383003274108357950?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/4383003274108357950/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2009/07/blog-post_23.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/4383003274108357950'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/4383003274108357950'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2009/07/blog-post_23.html' title='मृगनयनी स्पर्श तुम्हारे ...'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/Smg1t83cnwI/AAAAAAAAABA/A8MsSVopH3M/s72-c/images%5B2%5D.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-8677569368342126263</id><published>2009-07-22T02:56:00.000-07:00</published><updated>2009-07-22T03:23:23.864-07:00</updated><title type='text'>पराये से हो गए दिन ...</title><content type='html'>याद आती है हमें&lt;br /&gt;उन दिनों की&lt;br /&gt;जब तुम अपनी थी&lt;br /&gt;ये दिन भी अपना था&lt;br /&gt;तुम्हारे बिन इन्हें क्या हुआ&lt;br /&gt;पराये से हो गए दिन।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;काटे कटते नहीं ये दिन &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;तुम्हारे बिन महकते नहीं ये दिन &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;किसे सुनाऊ अब मैं &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;span class=""&gt;अपने हाल ये गम दिल का &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;आज कितने उदास से हैं ये दिन &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;पराये से हो दिन। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;तुम्हारे बिन क्या हुआ इन दिनों को &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;समझ नहीं आता हैं मुझे &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;बर्बाद सा मैं हो गया &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;यादों के उलझन में उलझा कर मुझे &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;आज  जाने कहां खो से गए ये दिन &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;पराये से हो गए दिन। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-8677569368342126263?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/8677569368342126263/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2009/07/blog-post_22.html#comment-form' title='6 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/8677569368342126263'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/8677569368342126263'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2009/07/blog-post_22.html' title='पराये से हो गए दिन ...'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' 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&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;हर औरत एक नदी होती है &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;और पुरूष उसका मांझी &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;जो औरत रूपी नदी में साहिल की तलाश में &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;अपने जीवन को दाव पर लगा देता है &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;फिर भी किनारा उसकी नजरों से दूर रहता है। &lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-7015393196413183401?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/7015393196413183401/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2009/07/blog-post_21.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/7015393196413183401'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/7015393196413183401'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2009/07/blog-post_21.html' title='औरत नदी है...'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_Q50wqECb7x4/SmGhz-qqaLI/AAAAAAAAAAM/C9zZf2iqxz8/S220/Copy_of_amit_bhai_-_1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4518198162576089446.post-43082209377776947</id><published>2009-07-20T02:44:00.000-07:00</published><updated>2009-07-20T03:00:48.508-07:00</updated><title type='text'>लौट आना...</title><content type='html'>दे रहे भींगे नयन सौगंध तुमको,&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;हम अकेले हैं, परवासी लौट आना`&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;शोर है हर ओ़र&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;पर आपना नहीं,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;बंद पलकों में &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;कोई सपना नहीं&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;अधर चुप हैं कह रहा व्याकुल ह्र्दय&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;हम अकेले हैं, परवासी लौट आना। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;आंसुओं का मोल &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;कैसे खो गया, &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;प्यार कब कैसे &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;पुराना हो गया। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;जिंदगी के रास्तों की भीड़ में,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;हम अकेले हैं, परवासी लौट आना। &lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-43082209377776947?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/43082209377776947/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2009/07/blog-post_20.html#comment-form' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/43082209377776947'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4518198162576089446/posts/default/43082209377776947'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khabrikalam.blogspot.com/2009/07/blog-post_20.html' title='लौट आना...'/><author><name>amit kumar</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13031613113379009188</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image 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का स्नेह-स्पर्श दे गया। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;कौन आकर दर्द से व्याकुल मन को ,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;अपनी पलकों की छाँव दे गया। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;कौन आकर सपनों के पंछी को,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;अंतहीन गगन में ठाँव दे गया। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4518198162576089446-1829740440836691514?l=khabrikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://khabrikalam.blogspot.com/feeds/1829740440836691514/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' 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