Wednesday, July 10, 2013


राष्ट्रपिता पर भारतीय भाषाओं में लिखी रचनाएं होंगी प्रकाशित


 नई दिल्ली। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बारे में विभिन्न भारतीय भाषाओं में बहुत कुछ लिखा गया है, जिनमें बहुत सी रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं पर अभी भी ढेर सारी ऐसी रचनाएं हैं, जिनका प्रकाशन होना है। प्रकाशित और अप्रकाशित रचनाओं, लेख और अखबारों की कतरनों को साहित्य अकादमी किताब के रूप में प्रकाशित करेगा। इसके लिए अकादमी ने ˜महात्मा गांधी पर लिखित रचनाओं के संकलन की परियोजना शुरू की है। हिंदी भाषा में करीब चार खंडों में प्रकाशित होने वाली इस किताब का संपादन वरिष्ठ आलोचक व साहित्य अकादमी के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी करेंगे। सूत्रों के अनुसार साहित्य अकादमी ने महात्मा गांधी की रचनाओं के संकलन की जो परियोजना तैयार की है, उसमें सभी 24 भारतीय भाषाओं में लिखित रचनाओं को शामिल किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार संकलन में शामिल किए जाने के लिए रचनाओं को चिन्हित करने के लिए अभी तक छह भारतीय भाषाओं के संयोजकों का चयन किया जा चुका है। हर भाषा का संयोजक उस भाषा में लिखित रचनाओं का चयन करेगा, जिसका बाद में हिन्दी में अनुदित कर पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाएगा। डोगरी भाषा में महात्मा गांधी के ऊपर क्या कुछ लिखा गया, उसे एकत्र करने की जिम्मेदारी ललित मंगोत्रा को दी गई है। इसी तरह अंग्रेजी के लिए आलोक भल्ला, राजस्थानी के लिए चन्द्रप्रकाश देवल, हिन्दी के लिए माधव कौशिक, मैथिली के लिए रत्नेश्वर मिश्र और संथाली के लिए छोटे राम माझी को रचनाओं के चयन की जिम्मेदारी दी गई है। अन्य भारतीय भाषाओं में गांधी पर रचनाओं को तलाशने के लिए विद्वानों का चयन इसी महीने होने वाली बैठक में किए जाने की संभावना है। अकादमी सूत्रों के अनुसार पुस्तक के पहले खंड को जल्द से जल्द प्रकाशित किए जाने की योजना है।

Monday, April 22, 2013

Rashtriya Sahara. 21/4/13



पुलिस और सरकार के रवैये से सामाजिक संगठन नाराज


नई दिल्ली (एसएनबी)। गुड़िया के साथ हुए दुष्कर्म की घटना को सामाजिक संगठनों में भारी गुस्सा है। महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों का मानना है कि सरकार और पुलिस का व्यवहार गैर जिम्मेदाराना हो गया है। 


गुड़िया मामले पर सेंन्ट्रर फोर सोशल रिसर्च (सीएसआर) की निदेशक डा. रंजना कुमारी मानना है कि जिस तरह से पुलिस पीड़ित पिता को घूस देकर पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की है वह पूरे पुलिस महकमें के चरित्र को उजागर करता है। उससे भी ज्यादा राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष द्वारा गैर जिम्मेदाराना बनाया देना कि ‘आज रामनवमी का दिन है हम कल कार्रवाई करेंगे। यह तो हद हो गई। 



Rashtriya Sahara. 21/4/13


Rashtriya Sahara 22/4/13


Rashtriya Sahara- 22/4/13


इंसाफ न मिला तो बन जाऊंगी आतंकवादी
 नई दिल्ली। इंसाफ की मांग को लेकर पिछले सौ दिनों से जंतर-मंतर पर बैठी राष्ट्रीय स्तर की बालीबॉल खिलाड़ी ने रविवार को कहा कि अगर अब न्याय नहीं मिला तो वह आतंकवादी बन जाएगी, और इसकी जिम्मेदार सरकार होगी। उन्होंने कहा कि सरकार पीड़िता को न्याय दिलाने के बजाय आरोपी को संरक्षण देती है। कानूनी दावपेंच में मामले को लंबा खींचा जाता है। ऐसे में मेरे सामने आतंकवादी बनने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। पंजाब की यह महिला प्रदेश स्तर की खिलाड़ी हर चुकी है। ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट के तौर पर वह दूसरों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ती रही हैं। वह पैरामेडिकल छात्रा से गैंगरेप की घटना के बाद न्याय की आस लिए राजधानी के जंतर मंतर पहुंची थी और यहां पर 12 जनवरी से सात फरवरी तक भूख हड़ताल पर बैठी थी। तब हालत खराब होने के बाद भूख हड़ताल समाप्त कर दी, लेकिन अभी तक यही पर डटी हुई हैं। इन सौ दिनों में रात के अंधेरे में पुलिस के चेहरे और चरित्र को नजदीक से देखने वाली यह खिलाड़ी कहती है कि रात के सन्नाटे में पुलिसवालों की बातचीत को सुन कर दिल दहल जाता है। लगता है जैसे उनके अंदर मानवता जैसी कोई चीज ही नहीं बची है। पिछले दिनों पांच वर्पीय बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म की घटना से वह काफी परेशान हैं। वह कहती हैं कि पैरामेडिकल छात्रा से गैंगरेप की घटना के बाद लगा था कि सरकार और पुलिस की सोच में बदलाव आयेगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अब महिलाओं को अपनी सुरक्षा के लिए खुद ही पहल करनी होगी। उन्होंने पंजाब कै डर के एक आईपीएस अधिकारी पर जबरन शारीरिक संबंध बनाने और मारपीट का आरोप लगाते हुए कहा कि इस घटना हो गुजरे चार वर्ष होने को आ रहे हैं पर अभी तक न्याय नही मिला है। राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री तक से गुहार लगा चुकी हूं। पिछले सप्ताह यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने गयी थी। लेकिन अभी तक कहीं से भी न्याय मिलता हुआ नहीं दिख रहा है। ऐसे में अब मैं इतनी ज्यादा मायूस हो चुकी हूं कि मेरे सामने एक ही रास्ता बचा है आतंकवादी  बनने का। उन्होंने कहा कि अगर सरकार और पुलिस का रवैया ऐसे ही रहा तो आने वाले समय में रेप की शिकार महिलाएं न्याय के लिए पुलिस और कानून के पास जाने के बजाए खुद ही बदूंक उठाने को मजबूर होंगी।
रेप की शिकार महिलाओं को न्याय पाने के लिए अब खुद उठानी होगी बंदूक न्याय की आस लिए सौ दिनों से जंतर-मंतर पर बैठी है पीड़िता