Wednesday, April 7, 2010

57 फीसद ब्याज वसूलने की जानकारी रिजर्व बैंक को नहीं

आम आदमी को साहूकारों के चंगुल से बचाने के लिए सरकार बैंकों से लोन लेने की बात करती है लेकिन उसे यह नहीं मालूम कि निजी बैंक साहूकारों से दो कदम आगे निकल चुके हैं। निजी बैंक दिए गए लोन पर सलाना 58 फीसद तक ब्याज वसूल रहे हैं। इसकी जानकारी न तो रिजर्व बैंक को है और न ही प्रधानमंत्री कार्यालय और वित्त मंत्रालय को। इस बात का खुलासा एक आरटीआई में हुआ है। कन्हैया लाल नामक शख्स ने आईसीआईसीआई से 2006 में 35 हजार 900 रूपए का लोन लिया था, जिस पर बैंक ने 48.1 फीसद की दर से ब्याज वसूला। इसके बाद उन्होंने इंडिया बुल्स बैंक से 18 हजार का लोन लिया, जिस पर बैंक ने 57.22 फीसद ब्याज मांगा, जिसे उन्होंने देने से मना कर दिया। इस मामले में उन्होंने आरटीआई दायर कर रिजर्व बैंक से यह जानकारी मांगी कि कोई बैंक कितना ब्याज वसूल सकता है। कन्हैया लाल ने दिसम्बर 2007 को आरटीआई दायर कर प्रधानमंत्री कार्यालय से भी यही जानकारी मांगी। पीएमआ॓ ने श्रीलाल को जानकारी मुहैया कराने के लिए आरबीआई को पत्र लिखा। आरबीआई ने पत्र संख्या आरआई 5736/07.05.01/2007-08 (दिनांक 04/02/08) के माध्यम से कहा की पर्सनल लोन पर आईसीआईसीआई बैंक द्वारा वसूले जा रहे ब्याज के बारे में उसके पास कोई जानकारी नहीं है। कन्हैया लाल ने आरबीआई से यह भी जानना चाहा है कि जब उसने 16 नवम्बर 2006 के अपने पत्र में कहा कि ग्राहकों के शोषण के मामले प्राइवेट बैंक आगे हैं, यदि यह सही है तो फिर आईसीआईसीआई बैंक के सीईआ॓ केवी कामत को पद्मश्री पुरस्कार देने का निर्णय किसने लिया? उन्होंने यह भी जानना चाहा कि आईसीआईसीआई और इंडिया बुल्स बैंक सरकार को कितना आयकर चुकाते हैं। इन दोनों सवालों के जवाब में भी आरबीआई ने चुप्पी साध ली। कन्हैया लाल ने मनमानी ब्याज वसूलने के बारे में प्रधानमंत्री कार्यालय में भी आरटीआई दायर कर जबाव मांगा, जिसे प्रधानंमत्री कार्यालय ने पत्र संख्या आरटीआई/925/2007-पीएमए के माध्यम से भारत सरकार के वित्त सेवा विभाग को प्रेषित कर दिया। कन्हैया लाल ने इन दोनों बैंकों द्वारा उपभोक्ताओं से बेतहाशा ब्याज वसूले जाने की शिकायत राष्ट्रपति के अलावा उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, वित्त मंत्रालय, रिजर्व बैंक, बैंकिंग लोकपाल समेत लगभग तीन दर्जन से अधिक विभागों और अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं लेकिन पिछले लगभग चार वर्षो में उन्हें कहीं से संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। कन्हैया लाल ने हार नहीं मानी है और पूरे मामले को कोर्ट में ले जाने का मन बनाया है।

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